संजय कनौजिया की कलम”नई दिल्ली में “अम्बेडकरवादी साझा मंच” जिसके संस्थापक संगठन व संचालक रहे..(1) “अखिल भारतीय मानवीय अधिकार संघ”(डॉ० एम. यू दुआ जी) (2) “भीम आर्मी-भारत एकता मिशन”(नरेन भीखूराम जैन जी) (3) “बहुजन भाईचारा मैत्री मिशन”(संजय कनौजिया जी) (4) “सी. एस. आर. रिसर्च फाउंडेशन”(दीन दयाल अग्रवाल जी) (5) “जन चेतना मंच”(इंद्रजीत यादव जी) (6) “कारवां- सामाजिक चेतना के लिए”(सुभाष बागड़ी जी) (7) “राष्ट्रीय मुस्लिम एकता मंच”(दीदार हुसैन बेग़ जी) (8) “ठेकेदारी हटाओ संयुक्त मोर्चा”(इंजीनियर-डी. सी. कपिल जी) (9) “यूनाइटेड डेमोक्रेटिक एलाइंस”(राजीव भृगु रंजन कुमार जी एवं शबाना जी) (10) विश्व रजक महासंघ दिल्ली प्रदेश”(रवि कुमार माथुर जी) तथा सक्रिय साथी महेश पहवार जी, हरपाल सिंह जी, अजीज भाई जी, बी. के. कटारिया जी, मनोज विद्रोही जी, दिनेश्वर जी, अजय कुमार जी, जैसे अनुभवी व सक्रिय साथियों ने एकजुट होकर संघर्ष के सभी बिंदुओं को साझा कर निर्माण किया है ! *भूमिका*�� सामूहिक साझा मंच का निर्माण इतना आसान भी नहीं होता, इसमें संगठात्मक साथियों को उदार बनकर फैंसले लेने होते हैं..हर संगठन के अपने कुछ विशेष बिंदु भी होते है जिन्हे सुलझी हुई और प्रगतिशील मानसिकता की सोच के साथी अपने उन बिंदुओं को जो उनके संघर्ष के वाहक होते हैं, उस स्थिति मे जनहितों के उद्देश्यों की पूर्ति हेतू समझौता भी करना पड़ता है..कई बिंदुओं पर एक राय नहीं बनती परन्तु महत्वपुर्ण बिंदुओं पर एक राय जरूर बनती है..”अम्बेडकरवादी साझा मंच” गांधी, अंबेडकर, लोहिया, जयप्रकश नारायण, चौ० चरण सिंह, देवीलाल, कर्पूरी ठाकुर, कांशीराम जैसे महान दार्शनिकों की दिखाई “दशा और दिशा” को लेकर सदैव संघर्षरत रहेगा..तथा “लड़ेगा तो जीतेगा भी”.. अंबेडकरवादी साझा मंच” एक शुद्ध सामाजिक मंच है..इसमें किसी भी राजनैतिक दलों की दखल-अंदाजी को शामिल रखने से रिक्त रखा गया है..लेकिन कोई भी राजनैतिक दल, समाज को विषैला या जनहितों कि परवाह किये बगैर किसी तरह कि अनुचित स्थिति पैदा करेगा तो “मंच” उसके खिलाफ संवैधानिक रूप से अपनी लड़ाई जारी रखेगा.. “अम्बेडकरवादी साझा मंच” सभी सामान विचारधारा वाले सामाजिक संगठनों को और अधिक जोड़ेगा तथा साथ लेकर सामाजिक न्याय-समता मूलक समाज-धर्मनिरपेक्षता-सौहार्द-सद्धभावना-मानवीय कल्याण- वैचारिक जागरूकता-संस्कृति-भाईचारे-प्रेम, अपनत्व की सुरक्षा सहित..हर जाति, हर धर्म, भाषा, भाषी, छात्र, युवा, नारी, मजदूर, किसान लघु व्यावसायिक, शोषित, वंचित, उपेक्षित, मूल निवासी, शैक्षणिक संस्थान व कामगारों के लिए के लिए संघर्ष करेगा.. साम्प्रदायिकता (धार्मिक उन्मांद), महंगाई, बेरोजगारी, अपराध, बलात्कार, निजीकरण, ठेकेदारी प्रथा, आरक्षण, शोषण, वेतनमान, सुरक्षित दिहाड़ी व अन्य बुनयादी मांगों आदि इत्यादि के लिए एकजुट होकर संघर्ष करता रहेगा !! *विचारणीय*�� (1) आज एक ओर जहाँ सत्तासीन फासीवादी ताक़त के 30 प्रतिशत लोग एकजुट होकर जनहित के ख़िलाफ सभी तरह के विषैले उन्मांद पैदा कर, कहते हैं कि “हिंदुत्व खतरे में है”..वहीँ दूसरी ओर वह वर्ग जो देश की कुल आबादी का 70 प्रतिशत है, और स्वस्थ्य लोकतंत्र की ख़ूबसूरती को बनाए रखने की चाह रखता है वह वर्ग “संविधान को खतरे में देख रहा है” संविधान खतरे में यानी देश की बर्बादी ! (2) जाति के कुचक्र ने अपनी जड़ें इतनी गहरी बना डालीं हैं, कि इससे पार पाना अभी असंभव प्रतीत हो रहा है..जब तक कि इस धरती पर कोई अम्बेडकर की भाँती नायक जन्म नहीं लेता, अतः बाबा साहब के इस नारे कि “जाति तोड़ो” में वर्तमान स्थिति को भांपते हुए महत्वपूर्ण तबदीली कर “जाति जोड़ो” के नारे पर काम किया जाए..कुछ दशक पूर्व से जाति जोड़ने का काम कोई करता आ रहा है और डॉ० अम्बेडकर व डॉ० लोहिया के सिद्धांत पर जो “रोटी और बेटी के रिश्ते को एक करने का था” उसको जाने अनजाने ही सही पूरा करते आने का काम अन्तर्जातीये व धर्मिये विवाह कर प्रेमी जोड़े ही करते आ रहे हैं..जबकि दूसरी ओर सत्तासीन फासीवादी लोग, “रोमियों स्क़ॉड” बनाकर प्रेमी युगलों को प्रताड़ित करते चले आ रहें हैं और तो और प्रेमविवाह के नाम पर जिन राज्यों में फासीवादियों की सरकारें हैं वहां खाफपंचायतों के दकियानूसी फरमान की तर्ज़ पर कानून बना रहे हैं..इसके ठीक विपरीत ऐसे प्रेमी युगलों व विवाहितों को सुरक्षा तथा प्रोत्साहित करने की जरुरत है !! *कार्येक्रम*�� अम्बेडकरवादी साझा मंच बाबा साहब भीम राव अंबेडकर साहब की 131वीं जयंती की पूर्व संध्या के अवसर पर, “संविधान बचाओ देश बचाओ” नामक विषय गोष्ठी तथा एक रचनात्मक कार्येक्रम जिसमे प्रेम विवाहितों को तथा ऐसे युगलों को सुरक्षा देने वाले संगठन, को सम्मान देकर प्रोत्साहित कर दिनांक-13/4/2022 को, गांधी शान्ति प्रतिष्ठान, नई दिल्ली में दोपहर-1 बजे से, आयोजित करेंगे..कार्येक्रम में आप सब सम्मानित साथी अपने-अपने साथियों सहित सादर आमंत्रित हैं..”आप सब का स्वागत रहेगा” !! (लेखक-राजनैतिक व सामाजिक चिंतक है)






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