-निर्मल कुमार शर्मा
दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में शुमार अमेरिका के तीन विश्वविद्यालयों क्रमशः वर्मोंट विश्वविद्यालय,टफ्ट्स विश्वविद्यालय और हार्वर्ड विश्वविद्यालय के वायस इंस्टीट्यूट फॉर बायोलॉजिकल इंस्पायर्ड इंजीनियरिंग के शोध वैज्ञानिकों ने मिल-जुलकर एक ऐसे ऐडवांस्ड रोबोट्स का निर्माण किया है,जो चल-फिर सकते हैं,स्वयं की बीमारियों का खुद ही इलाज भी कर सकते हैं,बगैर भोजन के हफ्तों जीवित रह सकते हैं,इनकी सबसे आश्चर्यजनक खूबी यह है कि ये ठीक-ठीक अपने जैसे और आकार-प्रकार के बच्चे पैदा करने के लिए आपस में प्रजनन भी कर सकते हैं ! इन अत्याधुनिक जीवित रोबोट्स को जेनोबोट्स या Xenobots कहते हैं।
इन अमेरिकी वैज्ञानिकों ने अफ्रीकी मेंढकों की स्टेम कोशिकाओं का उपयोग करके दुनिया के सबसे पहले इन अत्याधुनिक जीवित रोबोट्स या जेनोबोट्स या Xenobots को बनाए हैं। वैज्ञानिकों द्वारा जेनोबोट्स को पहली बार सन् 2020 में दुनिया के सामने लाया गया था। ये जेनोबोट्स आकार में 1मिलीमीटर से भी छोटे हैं। वैज्ञानिकों ने इन्हें बनाने के लिए सर्वप्रथम अफ्रीकी मेंढकों के भ्रूण से जीवित स्टेम कोशिकाओं को स्क्रैप किया और उसके बाद उन्हें इनक्यूबेट करने के लिए स्वतंत्र रूप से छोड़ दिया। इन्हीं विश्वविद्यालयों के कंप्यूटर सांइस के एक प्रोफेसर ने कहा कि दुनिया के बहुत से लोग रोबोट्स को धातु और सिरेमिक्स से बनी एक वैज्ञानिक मशीन ही मानने की भयंकर गलती करते हैं,जो स्वतंत्र रूप से इधर-उधर चल-फिर सकते हैं,कुछ काम कर सकते हैं, लेकिन वस्तुतः ऐसा बिल्कुल भी नहीं है !यह उनकी कल्पना से भी बहुत अलग हो सकता है,मसलन ये जीवित रोबोट्स या जेनोबोट्स किसी भी जीव उदाहरणार्थ अनुवांशिक रूप से अपवर्तित मेंढक की स्टेम कोशिका से विकसित जीव भी हो सकते हैं ! दरअसल जेनोवोट्स बॉयोलोजिकल रोबोट्स के वर्जन हैं,ये कई अलग-अलग कोशिकाओं को जोड़कर अपना शरीर बना सकते हैं ! मनुष्य की तरह मेंढक की कोशिकाएं भी एक शरीर का निर्माण कर सकतीं हैं !
जेनेटिक वैज्ञानिकों द्वारा अभी-अभी अविष्कृत इन 1मिलीमीटर बड़े जेनोवोट्स मेडिकल और विशेषकर शरीर विज्ञान के क्षेत्र में अपना उल्लेखनीय योगदान कर सकते हैं। भविष्य में जैसे-जैसे वैज्ञानिक उन्नति के साथ एक मिलीमीटर से बड़े और बड़े तथा बलशाली जेनोवोट्स बनते जाएंगे,जो हम आधुनिक मानवों के हर क्षेत्र में हमारे कठिन से कठिन या असंभव प्रतीत होनेवाले कार्यों को चुटकियों में कर देने में बहुत सहायक सिद्ध होने लगेंगे। भविष्य में संभव है जबतक एक समय ऐसा भी आ सकता है,जब वैज्ञानिक ऐसे -ऐसे जेनोवोट्स का अविष्कार करने लगें जो आजकल की बड़ी क्रेनों,बुलडोज़रों,रेलपटरी बिछाने वाली बड़ी-बड़ी मशीनों आदि को स्थानापन्न करके उनके द्वारा किए जाने वाले काम को खुद संभाल लें। दूसरे शब्दों में कहें कि हम मानव सभ्यता के समानांतर एक जेनोवोट्स की एकदम नई,अद्भुत और आधुनिकतम् सभ्यता का उदय हमारी इसी धरती पर शुरू हो जाय ! इसमें विश्वमानवता के प्रति एक बहुत बड़े खतरे के प्रति भी वैज्ञानिकों को सावधान रहना चाहिए कि अति विकसित जेनोवोट्स की नई और आधुनिकतम् सभ्यता अगर मानव सभ्यता से बगावत या विद्रोह कर दें,तो उस स्थिति में क्या होगा ? इसकी कल्पना आज से 37 वर्ष पूर्व सन् 1984 में बनी मशहूर फिल्म द टर्मिनेटर ( The Terminator )जिसके अभिनेता आर्नोल्ड अलोइस स्वार्जजेनेगर ( Arnold Alois Schwarzenegger) थे और इस फिल्म के निर्देशक मशहूर फिल्म निर्देशक जेम्स कैमरॉन ( James Cameron ) थे,में यह समस्या बखूबी दर्शाई गई है,जिसमें कुछ बहुत ही ऐडवांस्ड रोबोटिक मशीनें मानवता के खिलाफ बगावत कर देतीं हैं ! इस फिल्म में एक बच्चे से क्रुद्ध होकर वे रोबोटिक मशीनें उसके जान के पीछे पड़ जातीं हैं,जिसे कुछ पुराने टेक्नोलॉजी आधारित रोबोटिक मशीन बने अभिनेता आर्नोल्ड अलोइस स्वार्जजेनेगर को उस बच्चे को उन ऐडवांस्ड रोबोटिक मशीनों से बचाने में पसीने छूट जाते हैं !
इसलिए इस दुनिया के आधुनिकतम् रोबोट्स बनाने वैज्ञानिकों और जेनेटिक्स वैज्ञानिकों को यह बात पूरी तरह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि इस धरती पर एक मिलीमीटर से लेकर बड़े से बड़े तथा अति बलशाली जेनोवोट्स बनाते समय यह बात अपने दिलो-दिमाग और अपनी जहन में हमेशा रखनी चाहिए कि कभी भविष्य में ये अति विलक्षण बुद्धि वाले सुपरकंप्यूटराइज्ड अतिबलशाली जेनोवोट्स,जो अपना निर्णय लेने में एक वैज्ञानिक से भी लाखों गुना कम समय लेते हैं,अगर अपने बनाने वाले से ही किसी चूकवश विद्रोह कर बैठें तो उस विकट परिस्थिति में क्या होगा ! क्योंकि इस धरती पर समस्त मानवप्रजाति के महाविध्वंस के सबब बने हजारों की संख्या में परमाणु बम,हाइड्रोजन बम और नाइट्रोजन बम तथा केमिकल बम आदि ही अब तक न जाने कितने करोड़ों लोगों का संहार कर चुके हैं इसलिए कालजयी महापुरुष और मानवता के सबसे बड़े पुजारी भगवान गौतम बुद्ध के इस शिक्षा का हमेशा ध्यान रखा जाना चाहिए कि हमेशा किसी भी चीज की अति न हो,सदा मध्यम मार्ग अपनाया जाना चाहिए,इसके अलावे सुप्रसिद्ध खगोलविद और भौतिक तथा रसायन वैज्ञानिक कार्ल सागैन ने कहा है कि इस समस्त ब्रह्मांड में सांसों के स्पंदन से युक्त फिलहाल हमारी इकमात्र धरती ही है,अभी तक हमारी धरती जैसा सजीव ग्रह कहीं भी नहीं है ! अगर असीम ब्रह्मांड की असीम गहराइयों में कहीं उसकी जैसी ग्रह होने की अत्यत क्षीण संभावना भी है,तो उसकी दूरी खरबों प्रकाशवर्ष की दूरी पर है ! जहाँ मनुष्य के लिए पहुँचना कभी भी असंभव है ! इसलिए इस धरती,इसके समस्त जैवमण्डल व समूची विश्वमानवता को बचाना व संरक्षित करना हमारा नैतिक,सामाजिक और मानवीय अभीष्ट कर्तव्य है।
-निर्मल कुमार शर्मा, ‘गौरैया एवम् पर्यावरण संरक्षण तथा देश-विदेश के समाचार पत्र-पत्रिकाओं में पर्यावरण,वैज्ञानिक,सामाजिक,आर्थिक व राजनैतिक विषयों पर बेखौफ,स्पष्ट व स्वतंत्र लेखन,गाजियाबाद,उप्र,





