१२ सितम्बर २०२१ को कुशीनगर की आमसभा में उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कहते है जरा सुनिए ….* *हर तबके के लोगों को राशन समान रुप से मिल रहा है।विकास सबका लेकिन, तुष्टीकरण किसी का नही।और जनता से सवालिया लहजे में पूछते है।राशन मिल रहा है कि नहीं ? फिर राशन मिल रहा है कि नहीं ?* *क्या राशन २०१७ के पहले भी मिलता था ? क्योंकि तब तो अब्बाजान कहने वाले लोग राशन हज़म कर जाते थे। कुशीनगर का राशन नेपाल पहुंच जाता था, बंगलादेश पहुंच जाता था, लेकिन अब इन गरीबों का राशन कोई निगल नही पायेगा निगलेगा तो जेल पहुंच जायेगा।*
संतशिरोमणी, प्रातः स्मरणीय श्री – श्री योगी आदित्यनाथ जी इन दिनों बहुत परेशान रहते है। गोरखपुर मठ के बाबाजान को परेशानी है, अब्बाजान से। अब्बाजान उर्दू में बहुत प्यार और आदर के साथ पिता को कहते हैं। मेरी मां बताती थीं कि दुनिया के किसी भी मुल्क में बेटियां पिता से बहुत करीब होती हैं, मुझे नही पता कि योगी आदित्यनाथ दुनिया के पिताओं से इतने क्यों चिढ़ते हैं। उन्हें इतनी हिकारत की नज़र से क्यों देखते हैं। और उनके भीतर इस ख़ूबसूरत अल्फ़ाज़ को लेकर इतनी नफ़रत क्यों है। मैंने आज तक अपने पिता को कभी अब्बाजान कहकर नही पुकारा। मैं तो बाबू ही कहता था बल्कि अब परिवार में सारे बच्चे मुझे भी बाबू कहते हैं। लेकिन मैं चाहता हूं कि भाई के बच्चे, रिश्तेदारों में, भाई – बहनों के बच्चे अब्बाजान कहकर पुकारें। शायद आदित्यनाथ समझ नही पाते कि दुनिया के बुरे से बुरे अब्बाजान अपनी बेटियों के लिए गुरुर हुआ करते हैं, उनके नायक हुआ करते हैं, दुनिया के सबसे ग़रीब अब्बाजान अपनी बेटियों के सबसे बड़ी दौलत हुआ करते हैं। *पीहर से शौहर* के घर जाते हुए अब्बाजान के कंधों पर झूलकर सातों जहां को रुला देती है बेटियाँ। दुनिया की हजारों तोहमतों के बावजूद जिनकी नींदें उचट जाया करती हैं अपनी बेटियों की उदासियों, पर इतनी मामूली सी बात सारे संसार को एक नज़र से देखने की कथा बांचने वाले बाबाजान नही समझ पाते है, क्योंकि कुछ लोग ताउम्र इंसान बनना नही सीख पाते, उदारता की तमाम दुहाईयों के बावजूद आखिरकार ओ मर्द बने रहते है, क्योंकि ओ पिताओं की जमात को भी हिन्दू और मुसलमान का रंग देने की महारत रखते हैं। ओ समझ नही पाते अब्बाजान ही पापा, बाबा, बाबू बाप होते हैं, चाहे पापा कह लीजिए बाबू, बापू चाहे पापा।
काश! योगी आदित्यनाथ भी एक बाप की आंखों में उतरकर औलाद की बेहतरी पर अपनी रौशनी कुर्बान कर देने की हसरतों को पढ़ पाते लेकिन अब पता चला है कि यूपी के बाबाजान अब्बाजान को लेकर गौतम बुद्ध की धरती पर खड़े होकर झूठ बोल रहे थे। अब्बाजान से उनका इशारा मुसलमान से हुआ करता है। *१२ सितम्बर को कुशीनगर की सभा* में उन्होंने कहा था जब उनकी सरकार नही थी तो यूपी में सारा सरकारी राशन केवल अब्बाजान कहे जाने वालों को मिलता था। इस अकेले बयान ने साबित कर दिया है कि विकास के आसमानी नारों के बावजूद मोदी – योगी साम्प्रदायिकता का ज़हर बोए बिना चुनाव का सामना करने से डरते हैं। लेकिन सवाल डर का भी नहीं है, सवाल है सच और झूठ का कि इतने बड़े राज्य का मुख्यमंत्री किसी ख़ास धर्म को जलील करने के लिए तथ्यो का कचूमर कैसे निकाल सकता है। सच तो यह है, कि योगी आदित्यनाथ चाहे जितनी लफ्फाजी करले लेकिन अपने पूर्ववर्ती अखिलेश यादव के सामने कहीं नही ठहरते कम – अज़ – कम राशन के मामले में, यह हम नही कहते मोदीजी की सरकार कह रही है। *राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून* की वेबसाइट बताती है। इस समय यपी में कुल ३ करोड़ ५९ लाख राशन कार्डधारक परिवार है। १४ करोड़ ८६ लाख लोगों को राशन का फायदा मिलता है। *इस १४ करोड़ ८६ लाख को ठीक से याद रखिए* अब देखिए साल २०११ के जनगणना के मुताबिक यूपी में १९ करोड़ ९८ लाख है। इसमें १५ करोड़ ९० लाख हिन्दू और ३ करोड़ ८४ लाख मुसलमान है। अगर मानले कि यूपी के सारे मुसलमान परिवारों को राशन मिलता है, जो कि सच नही है तब भी यह संख्या केवल ३ करोड़ ८४ लाख बनती है। और राशन का लाभ सरकार के मुताबिक १४ करोड़ ८६ लाख लोगों को मिल रहा है। इसका मतलब यह हुआ कि राशन का फायदा लेने वाले कम से कम ११ करोड़ लोग गैरमुसलमान है। या कहे हिन्दू, जैन, बौद्ध, ईसाई, पारसी है, दूसरे धर्मो के हैं। साढ़े दस करोड़ से ज्यादा सिर्फ हिन्दू है, तो अगर राशन केवल अब्बाजान कहने वाले लोगों को मिल रहा है तो भी *११ करोड़ लोग कौन है ?* तथ्य केवल मुसलमानों के खिलाफ नफरत से फैलाई जा रही एक झूठी कहानी की गवाही है। यह असंभव है कि अखिलेश यादव केवल मुसलमानों को राशन का फायदा दिलाया है, अगर ऐसी बात कोई कह रहा है तो सरासर झूठ है। यूपी के बाबजान कहते है राशन केवल अब्बाजान कहने वालो को मिला है। इसका मतलब यह हुआ कि वह संवैधानिक पदों पर बैठकर तथ्य और सत्य को रौंद रहा है।
अब आईए अखिलेश यादव के साथ योगी आदित्यनाथ की तुलना मैं क्यों कर रहा हूँ कि इन्हें अखिलेश यादव से कुछ सीखना चाहिए, अखिलेश यादव ने मार्च २०१६ को यूपी मे *राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम २०१३* लागू किया था। यह कानून मनमोहन सिंह की सरकार बनाकर गयीं थे। अब समझिये असली खेल मार्च २०१६ में अखिलेश यादव ने कानून लागू किया। राष्ट्रीय सुरक्षा कानून की रिपोर्ट बताती है, कि १५ नवम्बर २०१६ तक याने केवल नौ महीने में १४ करोड़ १ लाख लोगों तक राशन का लाभ पहुंचा दिया था। अब देखिए यूपी के नये बाबजान की काबिलियत योगी आदित्यनाथ १९ मार्च २०१७ को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। अब उसी *राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम* की रिपोर्ट कहती है, कि इस समय यूपी में १४ करोड़ ८६ लाख लोगों को राशन का फायदा मिल रहा है यह बाबजान की साढ़े चार साल में योगी आदित्यनाथ अखिलेश यादव के १४ करोड़ में केवल ८५ लाग लोगों को जोड़ सके यह बाबजान का असली रिपोर्ट कार्ड है। यूपी में एक बार फिर से हिन्दू – मुसलमान के बीच धर्म की खाई को चौड़ा किया जा रहा है, इसकी वजह यह है कि बाबजान कोरोना की दूसरी लहर में पत्तो की तरह झड़ी, लाशों पर जवाब नही दे पा रहे हैं। इसकी वजह यह है कि बाबजान गंगा की गोदी पर अपनो की लाशों को दफनाने पर मजबूर हिन्दुओं के सवालों का जवाब नही दे पा रहे है। इसकी वजह यह है बाबजान ने फिरोजाबाद में बिस्तर, दवा और इलाज की कमी से बिलखते लोगों के नज़रों का जवाब नही दे पा रहे है। बाबजान को कोई बताये कि बेटियां अपने बाबूल पर जान छिड़कती है। कोई फर्क नही पड़ता की औलादें अपने पिता किस सम्बोधन से पुकारते है पापा, बापू, अब्बाजान आखिर बाप ही होते है।
योगेश दीवान की पोस्ट





