अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

*मणिपुर में मोदी का मायाजाल!*

Share

 -सुसंस्कृति परिहार 

किसी देश का प्रधानमंत्री इतना निष्ठुर भी हो सकता है कि एक राज्य धू धू जल रहा हो वहां गृह युद्ध जैसे हालात हों लोग मारे जा रहे हों स्त्रियों को नग्न कर खुलेआम शर्मिंदा किया जा रहा हो और उसके पास इन लोगों के लिए सहानुभूति के दो शब्द भी ना निकले हों।वह पूरे दो साल छै महीने बाद वहां जाए तो क्या होगा यह मणिपुर के गहरे ज़ख्म खाएं लोग ही समझ सकते हैं। इंसानियत की जिस तरह यहां उपेक्षा की गई उसकी चोट को भुलाना अब सहज और आसान नहीं।

 मोदीजी द्वारा इस दूरी से तो यह अहसास हो जाता है कि यह गृहयुद्ध केन्द्रीय सरकार की मंशा से हुआ है वे संभवतः यह चाहते रहे कि मैतेई और कूकी परस्पर लड़ें और कूकी समुदाय को मिले आदिवासी अधिकारों के तहत् प्राप्त ज़मीन पर मैतेई को भी वह अधिकार मिल जाए ।ऐसा फैसला अदालत से दिलवाया गया। मैतेई मूलतः इम्फाल घाटी में और कूकी वा कुछ नागा पहाड़ी क्षेत्रों में रहते आए हैं। मैतेई पढ़ें लिखे सम्पन्न नौकरी पेशा और व्यापारी लोग हैं।उनका कहना कि पहले वे आदिवासी थे इसलिए कोर्ट ने उन्हें ये दर्जा लौटाया है।

वस्तुस्थिति यह है कि मैतेई को आदिवासी घोषित कर कूकी के खनिज सम्पदा से परिपूर्ण पहाड़ी क्षेत्रों को इन्हें देकर भारत सरकार इनका दोहन करने गौतम अडानी को सौंपना चाहती है।कूकी अपने जल जंगल और ज़मीन से बस्तर के आदिवासियों की तरह बेपनाह मोहब्बत करते हैं। इसलिए यह संघर्ष आज भी थमा नहीं है। सरकार द्वारा इस गृहयुद्ध को पनपाने में तत्कालीन मुख्यमंत्री का भरपूर  सहयोग मिला।इससे मैतेई और कूकी दोनों समुदायों को क्षति उठानी पड़ी। लेकिन कूकियो को जो क्षति उठानी पड़ी उसका वास्तविक आंकड़ा शायद ही मिल पाए।

इस संघर्ष में बड़ी तादाद में कूकियों ने जानें दीं, हज़ारों की तादाद में उनके घर जलाए गए। चूंकि बहुसंख्यक कूकियों ने ईसाई धर्म अपनाया हुआ है इसलिए कथित तौर पर मैतेई हिंदुओं ने उन्हें हिंदू विरोधी मानते हुए सैंकड़ों चर्च जलाए। जिस कारण उन्होंने बड़ी संख्या में मिजोरम पहुंचकर अपनी जान बचाई।कुछ हज़ार आज भी चूराचांदपुर के कैम्प में पड़े हुए हैं।इन परेशान और रोते तड़फते लोगों से मिलने प्रति पक्ष नेता जलते मणिपुर में राहुल गांधी तीन बार यहां के दौरे पर आए।पहली बार  जब वे गए तो उन्हें  जाने से रोकने की कोशिश हुई  लेकिन वे निडर होकर लोगों से मिले। उनको न्याय दिलाने भारत जोड़ो यात्रा का दूसरा चरण मणिपुर से भारत जोड़ो न्याय यात्रा नाम से प्रारम्भ किया। उम्मीद थी उनकी आवाज सरकार सुनेगी और मणिपुर के दुख भरे दिनों को राहत पेकेज मिलेगा। लेकिन इस बेरहम सरकार ने इस बीच कुछ भी नहीं किया। मणिपुर धधकता रहा।

दो साल से अधिक लंबे अंतराल के बाद, जब मोदी के विरोध में देश भर में वोट चोर गद्दी छोड़ नारा गूंज रहा है जगह जगह विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं उधर नेपाल में युवाओं ने तख्ता पलट दिया है ऐसे हालात में मणिपुर जाना भारी भरकम पैकेज की घोषणा करना अपनी छवि सुधारने का एक प्रयास लगता है।जिसे मणिपुर की आमजनता ने बुरी तरह नकार दिया है। चूंकि मणिपुर में राष्ट्रपति शासन है पूर्व मुख्यमंत्री बीरेन सिंह उनके साथ चहलकदमी कर रहे हैं।इससे यह भी संशय हो रहा है कि शायद जल्द ही वहां चुनाव की घोषणा हो जाए।

इस बात पर आम मणिपुर के मतदाताओं से बात करने पर जो कयास लगाए जा रहे हैं वे यह बता रहे हैं कि मोदी से आम लोग अप्रसन्न हैं।वे उनके मायाजाल में अब नहीं फंसने वाले।

सच ही कहा गया है कि मुश्किल वक्त में ही सही ग़लत की परख होती है।

Ramswaroop Mantri

Recent posts

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें