पुष्पा गुप्ता
एक इंडियन युवा मित्र ने ब्रिटेन से ‘रेडिट’ पर लिखा कि वह ब्रिटेन में हर महीने 40 हजार पाउंड सालाना (4495360 रुपये) कमाता है. इसके बावजूद उसका अपना घर नहीं है. वह किराए पर रह रहा है.
पूछने पर उसने बताया कि वीजा की वजह से ज्यादा काम नहीं कर सकता. बिजनेस करने के बारे में सोचना तो दूर की बात है. उसके पेरेंट्स ने लोन लेकर पढ़ाया और इसके लिए अपनी जमीन तक बेच दी. अब वह परेशान है. उनको भी निराश कर रहा हूँ. कुछ दे नहीं पाता.
उसने कहा : सबसे बुरी बात यह है कि मैंने अपने पेरेंट्स को निराश किया है. उन्होंने यहाँ ब्रिटेन से मुझे MBA कराने के लिए लाखों रुपये खर्च किए, जमीनें बेची और लोन लिया. अब मैं मुश्किल से अपना गुजारा कर पा रहा हूं.
युवक कहता है : अब पेरेंट्स मुझपर अरेंज मैरिज का दबाव डाल रहे हैं. हालांकि मुझे लेन-देन वाली अरेंज मैरिज पर यकीन नहीं है. लेकिन दूसरी तरफ बेगर्स कांट बी चूजर्स. मुझे ऐसे रिश्तों के बारे में सपने देखने की बजाए अपनी वास्तविक हालत को स्वीकार करना होगा, जो लगता है कि अब कभी नहीं हो सकते.
उसने विदेश में पढ़ने, कमाने के सपने देखने वाले अन्य छात्रों को चेतावनी देते हुए लिखा, “मेरी गलतियों को मत दोहराओ. STEM (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथ्स) चुनो और इंटर्नशिप करो. अपना सपोर्ट सिस्टम खुद बनाओ. फिजिकली एक्टिव रहो. जब तक मुझे समझ में आया कि वास्तविकता कैसे काम करती है, तब तक मौका निकल चुका था.”
हर साल लाखों भारतीय अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों में पढ़ाई करने बड़े सपने के साथ पहुंचते हैं. उम्मीद होती है कि प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी और कॉलेजों से डिग्री मिलने के बाद शानदार सैलरी पैकेज मिलेगा और लाइफ सेटल हो जाएगी.
लेकिन हर किसी का यह सपना सच नहीं हो पाता. स्टूडेंट्स को संस्कृति, पढ़ाई का दबाव और पैसों की दिक्कतों समेत कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है. इसके बाद अच्छी नौकरी भी मिलने की 100 फीसदी गारंटी नहीं होती.
हकीकत में विदेश में जिंदगी किस तरह की होती है यह पूछने पर 28 वर्षीय युवक ने बताया कि उसने ब्रिटेन की ग्रीनविच यूनिवर्सिटी से एमबीए किया है. वह पिछले आठ साल से ब्रिटेन में रह रहा है. पहले पांच साल स्टूडेंट के रूप में रहा और फिर तीन साल कंसल्टेंट के तौर पर काम कर रहा है. हाथ में कुछ नहीं.





