22 जनवरी, 2024। अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन की तारीख। करीब 6 महीने बाकी हैं, पर अयोध्या से 460 किमी दूर नेपाल के जनकपुर में उत्सव की तैयारी शुरू हो गई है। जनकपुर यानी भगवान राम का ससुराल और सीता का घर।
राम मंदिर बनने से जनकपुर के लोग खुश हैं। भारत में राम मंदिर का उद्घाटन होगा, उस दिन यहां दीपोत्सव मनेगा। गली-गली में झांकियां निकाली जाएंगी। घरों में रात भर भजन होंगे। जानकी मंदिर के महंत रोशनदास कहते हैं, ‘हमारी किशोरी जी का घर बन रहा है। हम लोग तो खुश होंगे ही।’
हिंदू ही नहीं मुस्लिम भी राम मंदिर बनने से खुश हैं। वे भी रोज जानकी मंदिर में आते हैं, पूजा में शामिल होते हैं।
हम जिस वक्त जनकपुर पहुंचे, भारत से नेपाल तक फिल्म आदिपुरुष पर हंगामा मचा था। नेपाल में तो थिएटर मालिकों को फिल्म हटानी पड़ गई। हमारे पास जनकपुर के लोगों के लिए दो सवाल थे।
पहला: फिल्म आदिपुरुष में सीता को भारत की बेटी बताने पर वे क्या सोचते हैं?
दूसरा: अयोध्या में राम मंदिर बनने पर कैसा महसूस करते हैं?
जवाबों की तलाश हमने जानकी मंदिर से ही शुरू की। नेपाल के मधेस प्रदेश की राजधानी जनकपुर, टूरिज्म और धर्म के लिहाज से अहम शहर है। यहां बारिश हो रही थी, लेकिन भीड़ पर इसका कोई असर नहीं है। लोग टोलियों में बढ़े जा रहे थे। शाम गहराते ही मंदिर अलग-अलग रंगों की लाइट से जगमगा गया।
मंदिर के अंदर बीचोंबीच एक भवन बना है। यहां श्रीराम के साथ सीताजी की प्रतिमा स्थापित है। यहां से हम मंदिर के महंत के कमरे में पहुंचे। कुछ देर बाद महंत रोशनदास बाहर आए और आसन पर बैठ गए। हमारे साथ जनकपुर के लोकल जर्नलिस्ट थे। मुस्लिम थे, इसके बावजूद मंदिर में उनकी मौजूदगी ने किसी को चौंकाया नहीं। महंत ने लोकल जर्नलिस्ट से हालचाल पूछा।
उन्हें पता चला कि मैं लखनऊ से आया हूं, तो खुश हो गए। बोले- ‘आप तो अपने ननिहाल आए हैं।’ बातचीत शुरू हुई। राममंदिर बनने पर वे बोले, ‘उद्घाटन वाले दिन जनकपुर में कई कार्यक्रम होंगे। हर मंदिर में उत्सव मनेगा। कई साल बाद रामलला अपनी जगह पर आएंगे। अयोध्या में मनने वाले उत्सव में हम लोग भी शामिल होंगे।’
जनकपुर से वैसे ही चीजें भेजीं, जैसे ससुराल से जाती हैं…
महंत रोशनदास कहते हैं, ‘अभी तय नहीं है कि जनकपुर में क्या कार्यक्रम किए जाएंगे, लेकिन हम लोग खास तौर पर तैयारी करेंगे। हमने राम मंदिर के लिए शालिग्राम भेजा था। इसी से राम की प्रतिमा बननी है। मंदिर के लिए भूमिपूजन हुआ था, तब भी जनकपुर से ईंटे गई थीं, जैसे ससुराल से सब कुछ जाता है, वैसे ही।’

जनकपुर से 26 जनवरी को 40 टन वजनी शालिग्राम की 2 शिलाएं अयोध्या भेजी गई थीं। शालिग्राम विशेष तरह का पत्थर होता है, जो नेपाल की शालिग्रामी नदी में मिलता है।
महंत रोशनदास बताते हैं, ‘श्रीराम और सीता के विवाह से ही भारत और नेपाल में रोटी-बेटी का संबंध बना था। ये अयोध्या में दिखना चाहिए। हमारी तरफ से नेपाल सरकार ने प्रस्ताव दिया है कि राम मंदिर में सांकेतिक रूप में जनकपुर धाम भी बनाया जाए। इसमें एक धनुष की स्थापना हो। मंदिर मैनेजमेंट ने ये प्रस्ताव मान भी लिया है।’
हमारा अगला सवाल फिल्म आदिपुरुष पर था। हमने पूछा कि जनकपुर सीताजी का घर है, फिल्म में उन्हें भारत की बेटी बताने के विवाद पर यहां के लोग क्या सोचते हैं? महंत रोशनदास कहते हैं, ‘आप कुछ भी बोल दें और उसे सब स्वीकार करेंगे, ऐसा नहीं है। वेद-पुराण में, वाल्मीकि रामायण में जनकपुर के बारे में लिखा है। उस पर विवाद करना अच्छी बात नहीं है। फिल्म बनाने वाले पहले स्टडी करें, फिर फिल्म बनाएं। कुछ ऐसा न करें, जो आस्था से खिलवाड़ करे।’
महंत से मिलने के बाद हम दोबारा मंदिर परिसर में पहुंचे। वहां प्री-वेडिंग शूट चल रहा था। दूल्हा बनने जा रहे राजेश ने बताया कि ‘मेरा और होने वाली दुल्हन रश्मि का परिवार बीरगंज से यहां सगाई के लिए आए हैं। सगाई के बाद फोटोशूट करा रहे हैं। मान्यता है कि यहां सगाई या शादी होती है, तो दूल्हा-दुल्हन की जोड़ी राम सीता की तरह हमेशा बनी रहेगी।’

कई परिवार बेटे-बेटियों की सगाई या शादी करने जनकपुर आते हैं। माना जाता है कि भगवान राम और सीता का विवाह भी इसी जगह हुआ था।
इसके बाद हम मंदिर से करीब 500 मीटर दूर गंगा सागर पहुंचे। यह बड़ा सा तालाब है। मान्यता है कि श्रीराम ने सीताजी के स्वयंवर में धनुष तोड़ा था, तो उसका एक हिस्सा यहीं गिरा था। पिछले 10 साल से इसकी आरती होती है। शाम ढलते ही टूरिस्ट और आसपास के लोग यहां पहुंचने लगते हैं।

यहां हमें मधेस प्रदेश के सांसद राम आशीष यादव मिले। वे नेपाल की जनता समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं। राम आशीष यादव 10 साल से सांसद हैं। वे कहते हैं, ‘हम सभी चाहते हैं कि अयोध्या में जल्द मंदिर तैयार हो। मंदिर को लेकर जनकपुर के लोगों में उत्साह है। हमारे लिए जितना पवित्र जनकपुर धाम है, उतना ही अयोध्या भी है।’
राम आशीष यादव कहते हैं कि भारत में मोदीजी प्रधानमंत्री बने, तो उन्होंने गंगा की सफाई शुरू की। इसके बाद हमने इस ऐतिहासिक तालाब को साफ करवाना शुरू कर दिया। पहले हम आरती के लिए बनारस से पुजारियों को लेकर आए थे, फिर नेपाल के पुजारी आरती करने लगे।’
हमने फिल्म आदिपुरुष की बात की, तो वे बोले, ‘सीताजी नेपाल की विभूतियों में शामिल हैं। फिल्म में उनके बारे में गलत तथ्य बताए गए।’
यहीं हमें रवि गोयनका मिले। रवि दवाइयों का बिजनेस करते हैं और गंगा सागर आरती के लिए बनी कमेटी के सदस्य हैं। वे बताते हैं कि ‘पहले भारत से लोग आते थे, तो हम ताना मारा करते थे कि देखो भाई, हमारी बेटी तो यहां महलों में है, लेकिन रामजी वहां टेंट में रह रहे हैं। ये बहुत खुशी की बात है कि अब वहां भी रामजी का भव्य मंदिर बन रहा है।’
जनकपुर की आबादी करीब 2 लाख है। इनमें 5% मुस्लिम हैं। सवाल था कि जनकपुर में रहने वाले मुस्लिम राम मंदिर पर क्या सोचते हैं। इस बारे में जानने के लिए हम जनकपुर के सीनियर जर्नलिस्ट रोशन जनकपुरी से मिले। वे जानकी मंदिर से लगभग डेढ़ किमी दूर देवी चौक इलाके में रहते हैं।
उन्होंने बताया, ‘जनकपुर में मंदिर बनना शुरू हुआ, तो कारीगरों की जरूरत हुई। बसाहट भी बढ़ रही थी। ऐसे में कई मुस्लिम भी दूसरे इलाकों से आकर बसे। वे जनकपुर की संस्कृति में रच-बस गए। एक वक्त था कि जानकी मंदिर के भंडारण का काम संभालने वाला भी मुस्लिम ही था।’
रोशन जनकपुरी की बात की तस्दीक करने हम दोबारा जानकी मंदिर लौट आए। शाम ढल चुकी थी। यहीं हमें असगर अली मिल गए। भगवा कुर्ता पहने असगर अली साहब मंदिर परिसर में आए, जूते उतारकर मंदिर के मुख्य हिस्से में चले गए। वहां कुछ देर जानकी के मुख्य मंदिर को निहारते रहे, लेकिन अंदर नहीं गए।
लौटे तो हमने बात करने की कोशिश की। उन्होंने अगले दिन का वक्त दिया। अगले दिन हम जानकी मंदिर के ठीक पीछे बनी मस्जिद के पास पहुंचे। वहीं असगर अली मिले। जनकपुर के डिप्टी मेयर रह चुके असगर अली कहते हैं, ‘यहां हिंदू-मुसलमान नहीं हाेता है। सभी यहां शांति से रहते हैं।’
वे बताते हैं, ‘हम लोग मंदिर के कार्यक्रम में खासतौर पर शामिल होते हैं। साल में चार बार यहां मेला लगता है। रामनवमी, विजयादशमी, विवाह पंचमी और झूला के समय जानकी जी का डोला उठता है। जनकपुर के सभी लोग, भले किसी भी धर्म के हों, उसमें शामिल होते हैं।’
असगर अली कहते हैं, ‘जानकी मंदिर की वजह से ही यहां रोजगार है। अगर हम उससे अलग हुए, तो फिर काम की कमी हो जाएगी। हिंदुओं की तरह हम लोग भी अयोध्या में राम मंदिर बनने का इंतजार कर रहे हैं। वहां खुशी होगी, तो हम लोग भी यहां खुशियां मनाएंगे।’

जानकी मंदिर के पीछे ये मस्जिद है। कहा जाता है कि इसे जानकी मंदिर बनाने वाले कारीगरों ने इबादत के लिए बनाया था।
असगर अली से मिलकर हम जानकी मंदिर के सिंह द्वार पर पहुंचे। यहां हमें मोहन साह मिले। मोहन नेपाल में बजरंग दल की तर्ज पर बने युवा दल के जनकपुर प्रमुख हैं। उनसे हमने आदिपुरुष विवाद पर बात की, तो उनके चेहरे पर गुस्सा दिखने लगा। वे कहते हैं, ‘भारत सरकार को आदिपुरुष बनाने वालों को कड़ी सजा देनी चाहिए। उन लोगों ने तथ्यों से छेड़छाड़ की है। सभी को मालूम है कि माता जानकी नेपाल के जनकपुर धाम की हैं।’
आदिपुरुष विवाद पर रिपोर्टिंग के लिए हम काठमांडू गए थे, वहां नौजवानों में भारत विरोधी भावना दिखी थी। जनकपुर के जनक चौक पर लोगों से मिलकर लगा कि यहां ऐसा नहीं है। जनकपुर के लोग सिर्फ फिल्म में तथ्यों को गलत तरीके से दिखाने पर नाराज दिखे। सरकारी नौकरी से रिटायर्ड कारी यादव कहते हैं, ‘आदिपुरुष का विरोध राजनीतिक है। आम लोगों में तो इसकी चर्चा भी नहीं है।’
अयोध्या में श्रीराम मंदिर का ग्राउंड फ्लोर तैयार होने के बाद फर्स्ट फ्लोर का काम शुरू हो गया है। इस पर स्तंभ लगाने के लिए ढांचा तैयार हो रहा है…







