-तेजपाल सिंह ‘तेज‘
हाल ही में दिल्ली में डॉ. भीमराव अंबेडकर स्कूल ऑफ स्पेशलाइज्ड एक्सीलेंस का नाम बदलकर ‘सीएम श्री’ रखे जाने का विवाद केवल एक स्कूल या बोर्ड का नहीं, बल्कि भारत की आत्मा पर लगने वाली चोट का प्रतीक है। यह वही भारत है, जिसकी रीढ़ — संविधान — बाबा साहेब ने खड़ी की थी, और आज उसी रीढ़ को झुकाने के प्रयास लगातार हो रहे हैं।
ऐतिहासिक योगदान के अपमान की पराकाष्ठा:
आम आदमी पार्टी ने इस बदलाव का कड़ा विरोध करते हुए स्कूल के बाहर प्रदर्शन किया, बोर्ड को दोबारा लगाया और ऐलान किया कि “बाबा साहेब का नाम मिटाने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” लेकिन सवाल यह है — क्या यह केवल एक स्कूल का विवाद है, या फिर अंबेडकर-विरोधी मानसिकता के एक लम्बे सिलसिले का हिस्सा?
आधिकारिक तथ्य-सार:
· दिल्ली सरकार (Directorate of Education) के किसी भी आधिकारिक दस्तावेज़ में यह नहीं लिखा है कि
“75 अंबेडकर स्कूलों के नाम बदलकर CM Shri स्कूल कर दिए गए।”
· हाँ, 2025 में दिल्ली शिक्षा निदेशालय ने एक नई पहल “CM SHRI Schools” शुरू की है, और कुल 75 स्कूलों को इस योजना के अंतर्गत नामित/श्रेणीबद्ध किया गया है। (यह संख्या 75 आधिकारिक सर्कुलर में दी गई है।)
· इनमें से कुछ स्कूल पहले से Dr. B. R. Ambedkar Schools of Specialised Excellence (SoSE) कहलाते थे। यानी, इन स्कूलों को “CM SHRI” ब्रांड में सम्मिलित किया गया, पर सरकारी आदेशों में “अंबेडकर” नाम हटाने की स्पष्ट अधिसूचना दर्ज नहीं है।
· राजनीतिक विवाद इसलिए उठा क्योंकि कुछ स्कूलों पर लगे पुराने बोर्ड (Ambedkar नाम वाले) हटा दिए गए या ढँक दिए गए — जिससे यह “नाम बदलने” की छवि बनी,
जबकि आधिकारिक तौर पर यह “श्रेणी/ब्रांड परिवर्तन” बताया गया है।
| श्रेणी | विवरण | स्रोत |
| Schools of Specialised Excellence (SoSE), दिल्ली | अप्रैल 2022 में बताया गया कि दिल्ली सरकार ने SoSEs को B. R. Ambedkar Schools of Specialised Excellence के नाम से पुनः नामकरण किया है — “30 में से 30” SoSEs का नाम बदला गया। India Today+2www.ndtv.com+2 | अप्रैल 2022 |
| CM SHRI Schools, दिल्ली | 2025-26 शैक्षणिक सत्र से दिल्ली-सरकार ने 75 स्कूलों को CM SHRI Schools के रूप में घोषित किया है, जिसमें SoSE/SoE प्रकार के स्कूल शामिल होने का निर्देश है। The Times of India+2The New Indian Express+2 | सितंबर 2025 |
| नाम परिवर्तन का दायरा | SoSE → Ambedkar नामांकन (2022) SoSE/SoE → CM SHRI श्रेणी (2025) पर “Ambedkar नाम को पूरी तरह हटाकर CM SHRI नाम कर दिया गया” — इस दिशा में स्कूल-वार पुख्ता सरकारी सूची सार्वजनिक नहीं मिली। | — |
संक्षिप्त निष्कर्ष:
- SoSEs को 2022 में Ambedkar के नाम से नामित किया गया था।
- 2025 में CM SHRI नाम से 75 स्कूल घोषित किए गए।
- हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि हर एक Ambedkar नाम वाले स्कूल का नाम CM SHRI में बदल गया हो और ‘Ambedkar नाम हटने’ का पूरी तरह वाला आदेश जहाँ-तहाँ जारी हुआ हो।
विशेष : “दिल्ली सरकार ने 2025-26 सत्र से 75 स्कूलों को CM SHRI श्रेणी में शामिल किया है, जिसमें SoSE/SoE प्रकार की स्कूलें शामिल हैं।” “पिछले दौर में (2022) SoSEs को Ambedkar नाम से नामित किया गया था।” “हालाँकि हर स्कूल-वार नाम परिवर्तन का पक्का सरकारी रिकॉर्ड अभी सार्वजनिक नहीं मिला है।”
नाम बदलने की राजनीति: श्रेय की चोरी या इतिहास की मिट्टी में दखल?
AAP के प्रदेश संयोजक सौरभ भारद्वाज ने इस घटना पर तीखी टिप्पणी की —“सरकार को कोई नया काम नहीं करना, बस नाम बदलो और क्रेडिट चुराओ।” यह कथन केवल दिल्ली तक सीमित नहीं है। आज पूरे देश में नाम बदलने की राजनीति सत्ता का सबसे आसान औज़ार बन गई है —जहाँ किसी नेता की विरासत मिटाकर सत्ता अपने नाम की मुहर लगाना चाहती है। मगर जब यह प्रवृत्ति डॉ. अंबेडकर जैसे महापुरुष पर आघात करे, तो यह केवल राजनीति नहीं, संविधान पर प्रहार बन जाती है।
बाबा साहेब का नाम हटाना — केवल बोर्ड नहीं, एक विचार को मिटाने की कोशिश:
बाबा साहेब अंबेडकर का नाम केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय का प्रतीक है। उनका नाम हटाना दलित समाज, वंचित वर्गों और संविधान में आस्था रखने वाले हर नागरिक के आत्मसम्मान पर प्रहार है। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। बीते कुछ वर्षों में देश के अलग-अलग हिस्सों से बाबा साहेब के प्रतीकों, मूर्तियों और नामों के साथ छेड़छाड़ की खबरें बार-बार आई हैं।
दलित प्रतीकों के साथ छेड़छाड़: अंबेडकर के नाम पर बने संस्थानों के नाम परिवर्तन:
कुछ राज्यों में डॉ. अंबेडकर नामक विश्वविद्यालयों, पार्कों या योजनाओं के नाम बदलने की कोशिशें की गईं। लखनऊ का डॉ. अंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल, जिसकी कल्पना दलित सम्मान के प्रतीक के रूप में की गई थी, वहाँ अब राजनीतिक सभाएँ और अन्य आयोजनों का मंच बना दिया गया।
· उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार और गुजरात में बार-बार बाबा साहेब की मूर्तियाँ तोड़ी गईं।
· कई सरकारी कार्यालयों से उनकी तस्वीरें हटाई गईं या पीछे कर दी गईं।
· कुछ राज्यों में दलित नेताओं के नाम पर बनी योजनाओं का नाम बदल दिया गया।
· कहीं उनके नाम पर बने संस्थानों का नाम बदल दिया गया,
· कहीं सरकारी कार्यालयों से उनकी तस्वीरें हटाई गईं,
· और कहीं उनके विचारों को “राजनीतिक एजेंडा” बताकर तिरस्कृत किया गया।
ये घटनाएँ एक सुसंगठित प्रयास की तरह दिखती हैं—“अंबेडकर को आदर्श के रूप में नहीं, अवसर के रूप में देखने की प्रवृत्ति।” हर बार यही संदेश गया — कि सत्ता को अंबेडकर के प्रतीक से डर लगता है, क्योंकि वह प्रतीक जाग्रत चेतना और बराबरी का प्रतीक है।
संविधान और आरक्षण पर प्रश्न:
आरक्षण को “समाप्त करने” या “नई समीक्षा” की मांग बार-बार उठाई जाती है। संविधान की धारा 370, 35A या आरक्षण संबंधी प्रावधानों पर बारंबार पुनर्विचार की बात करना — संविधान की आत्मा से असहमति का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
दलित चेतना और लोकतंत्र — दोनों पर चोट:
जब डॉ. अंबेडकर का नाम किसी स्कूल से मिटाया जाता है, तो यह केवल एक व्यक्ति का नाम नहीं हटता; वह उस पीढ़ी का अपमान है जिसने सदियों की सामाजिक जंजीरों को तोड़कर शिक्षा और समानता की राह पकड़ी। याद रखिए, जिस व्यक्ति ने भारत को आधुनिक लोकतंत्र की राह दिखाई, उसी के नाम को हटाने का दुस्साहस करना लोकतंत्र की आत्मा को घायल करना।
बाबा साहेब का नाम क्यों खटकता है कुछ लोगों को?
क्यों बार-बार अंबेडकर का नाम और प्रतीक निशाने पर आते हैं? क्यों उनकी मूर्तियां तोड़ी जाती हैं, उनकी तस्वीरें हटाई जाती हैं, और उनके बनाए संस्थानों के नाम बदले जाते हैं?
क्योंकि अंबेडकर केवल एक व्यक्ति नहीं, विचार की क्रांति हैं — वह विचार जो समानता और प्रश्न पूछने की ताकत देता है। और यह सवाल सत्ता के लिए सबसे असुविधाजनक होता है।
निष्कर्ष (सार रूप में)
· कुल 75 स्कूल “CM SHRI Schools” घोषित किए गए हैं।
· इनमें से कुछ पहले “Dr B.R. Ambedkar Schools of Specialised Excellence” थे।
· सरकारी दस्तावेज में “नाम हटाने” का स्पष्ट आदेश नहीं है
· लेकिन जमीनी स्तर पर कई स्कूलों से अंबेडकर का बोर्ड हटाने की घटनाएं हुई हैं,
जिससे यह विवाद भड़का कि “नाम बदल दिया गया है।”
पुष्टि हुई : तथ्य
· Delhi Government ने अपने स्कूलों के नेटवर्क में चल रही Schools of Specialised Excellence (SoSEs) को नाम बदलने का निर्णय लिया था: 2022 में कहा गया कि “Schools of Specialised Excellence” नामक स्कूलों को अब B. R. Ambedkar के नाम पर रखा जाएगा — यानी “Dr. B. R. Ambedkar School of Specialised Excellence”। India Today+3India Today+3The Financial Express+3
· उदाहरण के लिए, यह कहा गया कि 31 शिक्षण संस्थाएँ थीं, जिनमें से लगभग 30 को इस नाम से पुनर्निर्मित करना था। The Financial Express+1
· हालिया आरोप हैं कि Bharatiya Janata Party-मानी दिल्ली सरकार ने कुछ स्कूलों के नाम “CM Shri School(s)” के रूप में बदलने की कोशिश की है, या यह दावा किया जा रहा है। The New Indian Express+1





