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नर्मदा की पुकार…… 36 सालों के हकदार…..बिना पुनवार्स डूब नामंजूर….!

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8 फरवरी 2017 को सर्वोच्च अदालत के फैसला अनुसार सरदार सरोवर परियोजना के डूब प्रभावित का संपूर्ण पुनवार्स करना था।एवं पुनर्वास स्थलों पर सुविधाएं उपलब्ध करवाना था और 31 जुलाई को सारे डूब प्रभावितों  गांवों को खाली करना था। मध्य प्रदेश शासन ने हजारों की संख्या में पुलिस बल लगाया था। सैकड़ों की संख्या में गांव गांव में पुलिसों का मार्च कराया था डूब प्रभावितों को डराने के लिये लेकिन लोग अपने गांवो में डटे रहे और 31 जुलाई की डेड लाइन को खारिज कर  दिया।31 जुलाई 2017 की बरसी है आज ,अबतक 4 सालों बाद भी पुनर्वास बाकी है।


कार्यक्रम की शुरुआत नर्मदा के गीत से हुई । कार्यक्रम की प्रस्तावना देवराम कनेरा रखी। महिला शक्ति में से सनोवर बी मंसूरी ने बात रखी। टिन शेड में रहने वाली सुशीला बहन ने टिन शेड में क्या परेशानी है।2 साल से टिन शेड  में है और सरकार ने अबतक उनका पुनर्वास नही किया है। टिन शेड में पानी , बिजली, मूलभूत सुविधाएं नही है। बड़वानी के किसान चंद्रशेखर यादव ने भी नर्मदा के संघर्ष के समर्थन  में बात रखी। सेंचुरी के नवीन मिश्रा जी एवं साथियों  ने जागो मजदूर किसान,गीत गाकर जोश भर दिया। जगदीश भाई  पटेल, कडमाल ने बात रखी। सत्येंद्र यादव जी सेंचुरी ने बात रखी उनका 4 सालों से रोजगार के लिये संघर्ष जारी है।  शांति पूर्ण ,गांधी जी रास्ते पर चलकर लड़ाई जारी है। सेंचुरी कंपनी को फर्जी तरीके बेच कर उनका वेतन सेंचुरी मैनेजमेंट ने बंद कर दिया था। उनके नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेत्री मेधा पाटकर नेतृत्व में कानूनी एवं जमीनी संघर्ष कर वेतन शुरू करना पड़ा। अब 4 साल के बाद फिर सेंचुरी मैनेजमेंट मंजीत ग्लोबल को फर्जी तरिके बेचने का काम किया।म.प्रदेश हाई कोर्ट इंदौर में चल रहे प्रकरण  की सुनवाई होकर आदेश आना बाकी है। आज भी उनका संघर्ष जारी है।


अंत मे नर्मदा बचाओ आन्दोलन के नेत्री मेधा पाटकर जी ने बात रखी और 31 जुलाई को जो सुप्रीम कोर्ट फैसला अनुसार गांव खाली करने  का था। लेकिन नर्मदा के लोगों ने संघर्ष बल पर उस आदेश को खारिज किया। नर्मदा के महिला पुरुषों ने  जनबल दिखाया और पुलिस बल को पीछे हटना पड़ा। भूअर्जन एवं पुनर्वास अधिकारी के कार्यालय सामने बैठकर अपना अधिकार की बात कर कर रहे है। बड़वानी के हो या धार के पुनर्वास अधिकारी  हो, अगर शेष रहे डूब प्रभावितों का अधिकार नही दिया तो खबरदार रहने की बात कही। अगर गरीब महिलाओं , पुरुषों का पुनर्वास नही किया तो 2017 के जैसे बड़ा  संघर्ष करने की तैयारी है।दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन को 8 महीने हो गये। लेकिन केंद्र की सरकार 3 काले कानून वापस नही ले रही है। उसी खिलाफ संघर्ष जारी है। दिल्ली में संसद के सामने किसानों की संसद चल रही है। 26 जुलाई को महिला किसान संसद चली। महिलाओं ने कहा कि मोदीजी यह 3 काले कानून वापस करलो नही तो 2024 के चुनाव में हम आपको सबक सिखाएंगे।
बिना पुनवार्स डूब नामंजूर, नामंजूर।नर्मदा बचाओ,मानव बचाओ।लड़ेंगे, जीतेंगे।
भागीराम यादव, ओमप्रकाश यादव, मायाराम भाई, सुरेश प्रधान, वाहिद मंसूरी, जगदीश पटेल, रणवीर तोमर, ओम पाटीदार, बालाराम यादव, डॉ विनोद यादव, डॉ महेश मालवीया,  सनोवर बी मंसूरी, कमला यादव,  नवीन मिश्रा  सत्येंद्र यादव, रणछोड़ मामा, पवन यादव, राजा मण्डलोई, महेंद्र तोमर, मुकेश भगोरिया, मेधा पाटकर, संपर्क 9755544097

Ramswaroop Mantri

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