अग्नि आलोक
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नवग्रह

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वो केतु की तरह
सब कुछ जानते हैं
मैं राहु की तरह भ्रम
फिर भी फैलाता हूं।

वो बुद्ध की तरह
बुद्धि का तर्क लगाते हैं
मैं मंगल की तरह जिद्दी
जिद्द कर माँ काली से सब मांगता हूं।

वो शुक्र की तरह
मिथ्या प्रेमपाश में फंसते है
मैं शनि की तरह
कर्म कर सब भाग्य में लिखता हूं।

वो चाँद की तरह
सबको मोहक लगते हैं
मैं सूर्य की तरह जलकर
योग अग्नि में तपता हूँ।

डॉ.राजीव डोगरा
कांगड़ा हिमाचल प्रदेश (युवा कवि लेखक)
(हिंदी अध्यापक)
पता-गांव जनयानकड़
पिन कोड -176038
कांगड़ा हिमाचल प्रदेश
rajivdogra1@gmail.com

Ramswaroop Mantri

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