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*भोपाल में राष्ट्रीय ध्वज जलाए जाने वालों पर अब तक कार्रवाई नहीं?*

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-सुसंस्कृति परिहार 

पिछले दिनों मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से एक तिरंगे झंडों को जलाने का शर्मनाक सच एक वीडियो में सामने आया। जिसमें भोपाल नगर निगम के वार्ड 50  दानापानी रोड स्थित वार्ड कार्यालय के पीछे रोहित नगर में राष्ट्रध्वज जलाए जा रहे थे। इस बीच एक युवक पहुंचा और उसने जलती आग से तिरंगे बाहर निकालने लगा, वार्ड प्रभारी विजेंद्र चौहान उसे रोकने लगे। दोनों में झूमा झटकी होती रही, बहुत से तिरंगे जलकर राख हो गए। कुछ तिरंगे बिना जले और आधे जले बचा लिए गए हैं।

नगर निगम ने सफाई दी है कि मामले में ननि का कोई कर्मचारी शामिल नहीं है। हालांकि, नगर आयुक्त हरेंद्र नारायण सिंह ने जांच कराने के निर्देश दिए हैं। आयुक्त का यह कहना बेबुनियाद है कि इस मामले में कोई नगरनिगम कर्मचारी शामिल नहीं है।जबकि सच ये है कि यह घोर अपमानक कार्य किसी अधिकारी के आदेश पर ही हुआ है।

नगर निगम सूत्रों की मानें तो ये तिरंगे दो साल घर घर तिरंगा अभियान के लिए खरीदे गए थे, लेकिन वितरण नहीं किया गया जो लंबे समय से नगर निगम कार्यालय में रखे रहे। समझा जाता है कि उनसे मुक्ति पाने ही उन्हें आग के हवाले कर दिया गया। हालांकि, नगर निगम प्रशासन ने इससे इनकार किया है। उसका कहना कि वार्ड कार्यालय के सामने स्थित झुग्गी बस्ती के किसी व्यक्ति ने ये झंडे लाकर जलाए हैं।यह तार्किक रुप से भी सत्य नहीं है किसी झुग्गी वाले की इतनी हिमाकत नहीं हो सकती कि वह वार्ड कार्यालय से इतनी बड़ी तादाद में झंडे ले जाकर कचरे के ढेर में जलाए।

यह ध्वज संहिता का उल्लंघन और राष्ट्रध्वज तिरंगे का अपमान है। संहिता में इसके अपमान पर सज़ा का प्रावधान है। जिसमें कहा गया है कि इस ध्‍वज को सांप्रदायिक लाभ, पर्दें या वस्‍त्रों के रूप में उपयोग नहीं किया जा सकता है। जहां तक संभव हो इसे मौसम से प्रभावित हुए बिना सूर्योदय से सूर्यास्‍त तक फहराया जाना चाहिए।

इस ध्‍वज को आशय पूर्वक भूमि, फर्श या पानी से स्‍पर्श नहीं कराया जाना चाहिए। इसे वाहनों के हुड, ऊपर और बगल या पीछे, रेलों, नावों या वायुयान पर लपेटा नहीं जा सकता।किसी अन्‍य ध्‍वज या ध्‍वज पट्ट को हमारे ध्‍वज से ऊंचे स्‍थान पर लगाया नहीं जा सकता है। तिरंगे ध्‍वज को वंदनवार, ध्‍वज पट्ट या गुलाब के समान संरचना बनाकर उपयोग भी नहीं किया जा सकता।

26 जनवरी 2002 को भारतीय ध्‍वज संहिता में संशोधन किया गया और स्‍वतंत्रता के कई वर्ष बाद भारत के नागरिकों को अपने घरों, कार्यालयों और फैक्‍ट‍री में न केवल राष्‍ट्रीय दिवसों पर, बल्कि किसी भी दिन बिना किसी रुकावट के फहराने की अनुमति मिल गई। अब भारतीय नागरिक राष्‍ट्रीय झंडे को शान से कहीं भी और किसी भी समय फहरा सकते है। बशर्ते कि वे ध्‍वज की संहिता का कठोरता पूर्वक पालन करें और तिरंगे की शान में कोई कमी न आने दें। 

भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 2 और 3: तिरंगे का अपमान करने पर या उसके साथ असम्मानजनक व्यवहार करने पर दोषी को 3 साल तक की जेल या जुर्माना या दोनों का दंड दिया जा सकता है। तिरंगे का अपमान करने में इसके जलाना, फाड़ना, जमीन पर गिराना, या किसी भी तरह से अनादर दिखाना शामिल है। कई विद्यालयों के शिक्षक,उल्टा झंडा फहराने या देर शाम तक उसे उतारने पर दंडित हुए हैं।जबकि तिरंगा यात्रा के दौरान या योग करते वक्त पसीने से मुंह पोंछने वाले नेताओं पर आज तक कार्रवाई नहीं की गई।

नगरनिगम भोपाल में हुआ यह राष्ट्रीय ध्वज के अपमान का मामला अत्यंत गंभीर है। वास्तविक कर्ताधर्ता को बचाने झुग्गी झोपड़ी के किसी व्यक्ति को फंसाने का कुचक्र रचा जा रहा है जिसका झुग्गी झोपड़ी संघ अध्यक्ष ने भी कांग्रेस के नेतृत्व में विरोध दर्ज कराया है।इस बाबत शहपुरा पुलिस थाने में रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई है।

 विदित हो,देश में तिरंगे झंडे को राष्ट्रीय ध्वज के रुप में स्वीकार करने पर सिर्फ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने उसके तीन रंगों पर आपत्ति जताई थी।उसे अशुभ माना था वे सिर्फ भगवा झंडे के पक्षधर थे। इसलिए कई बार विरोध स्वरूप उन्होंने तिरंगे को जलाया था। सर्वविदित है कि संघ ने नागपुर कार्यालय पर सन् 1950से 2002तक तिरंगा नही फहराया।आज भी वे बेमन से तिरंगा फहराते हैं। भोपाल में उसके बाद घटी यह दूसरी  बड़ी घटना है।

भारत देश की पहचान,आन,बान,शान के प्रतीक इस झंडे के लिए अनेकों स्वतंत्रता सेनानियों ने अपनी जान कुर्बान की है। भारतीय सेना ने भी इस तिरंगे की खातिर अपना लहू बहाया है। विदेशी धरती और  चांद पर जब जब हमारा ध्वज लहराता है  वह हमें गौरव का अहसास कराता है।ऐसे राष्ट्रीय ध्वज का अपमान नहीं सहेगा हिन्दुस्तान। भोपाल में इस अशोभनीय कृत्य करने वाले नगरनिगम कर्मियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए तथा आयुक्त को इस कृत्य पर शर्मिन्दा होकर राष्ट्र से माफ़ी मांगनी चाहिए तथा उस युवक को सम्मानित करना चाहिए जिसने ना केवल झंडों को आग से निकाला बल्कि इसकी सूचना पुलिस को दी जबकि बहुत से तमाशबीन इस दृश्य को देखते रहे।

Ramswaroop Mantri

1 comment

  • कोई औचित्य है इस पोस्ट का??
    वो ध्वज पुराने हो गए ,धूल मिट्टी से सन गये तो कूड़े में डालने से बेहतर है जला कर खत्म करना।

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