सूफियों, संतों का बस यही फरमान है।
हमारी एकता इस वतन की जान है।।
हम कितने ही रंगों में रंगे हैं लेकिन।
तीन रंग का तिरंगा, हमारी शान है ।।
दिलों में नफरत की सियासत को मिटाना है।
अम्न-शांति – भाई-चारे का गीत गाना है ।।
जश्न-ए-आज़ादी हो या हो के गणतंत्र दिवस।
हमें तो घर-घर में अब तिरंगा फहराना है।।
हिन्दी, उर्दू, पंजाबी, कश्मीरी बोलते हैं ।
हर भाषा को दिल की गहराई से तोलते हैं ।।
ज़हर कितना भी दिलों में घोल दे सियासत यहाँ !
हम वो हैं जो गंगा के पानी से रोज़ा खोलते हैं !
मुहब्बत से लबरेज़ हर सामान कर लिया
इस दिल को सूर तुलसी रसखान कर लिया !
बिस्मिल की शहनाई, सुनी कृष्ण की बांसुरी।
उसने तो पल भर में गंगा स्नान कर लिया !
सरहद की हिफाज़त करने वाला हर जवान बोलेगा ।
ये दिल तो इकबाल का तराना, जन-मन गान बोलेगा !
मादरे – वतन पर जान देने की बात आई तो ।
हमारे लहू का कतरा-कतरा हिन्दुस्तान बोलेगा !
मैं गीता, बाइबिल, कुरआन रखता हूँ !
सभी धर्मों का मैं सम्मान रखता हूँ !
ये मेरे पुरखों की जागीर है लोगों !
मैं अपने दिल में हिन्दुस्तान रखता हूँ !
कोई महफिल ऐसी भी सजाई जाये ।
जिसमें प्यार की खुश्बू फैलाई जाये !
मन्दिर के कलश, मस्ज़िद की मिनारें बोलीं।
अब तो मादरे-वतन की धुन सुनाई जाये !
ये तुलसी, ये मीराँ, ये रसखान की मिट्टी है ।
ये गाँधी, ये बिस्मिल के बलिदान की मिट्टी है !
यहीं गूँजतीं हैं सदाएं अमन चैन की ।
यही मेरे प्यारे हिन्दुस्तान की मिट्टी है !
- सुप्रसिद्ध शायर चांद शेरी, ईमेल – chand.sheri@gmail.com
संकलन -निर्मल कुमार शर्मा, गाजियाबाद, उप्र,संपर्क -9910629632





Ever lines related our life superb sir
thenks