भोपाल। । प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एक बार नहीं अनेकों बार मां नर्मदा को अपनी बुढ़ापे की काशी मानकर इसके विकास के लिये काफी ढिंढोरा पीट चुके हैं लेकिन हकीकत यह है कि जिस दिन शिवराज सिंह चौहान ने सत्ता की कमान संभाली थी उसी दिन से उनके विधानसभा क्षेत्र बुदनी में अवैध रेत के कारोबार के साथ-साथ अवैध वन कटाई के कारोबार की शुरुआत हुई थी और जैसे-जैसे शिवराज सिंह का राज चलता रहा वैसे-वैसे अवैध रेत और अवैध वन कटाई का कारोबार भी खूब फलता-फूलता रहा आज इन दोनों कारोबारों की स्थिति यह है कि इसे रोकने में सरकार कोई भी दल की हो वह नाकामयाब साबित हो रही है और आये दिन अवैध रेत का कारोबार करने वाले लोगों के द्वारा प्रशासनिक अधिकारियों के साथ-साथ वन और पुलिसकर्मियों के साथ-साथ मारपीट से लेकर गोली चालान तक की खबरें सुर्खियों में रहती हैं
शिवराज के शासनकाल के चलते रेत के कारोबार में हर कोई ने इसे अपना मुख्य कारोबार बना लिया है तो वहीं इन राजनेता तो इस कारोबार में लिप्त हैं ही तो वहीं राजनेताओं के संरक्षण में भी रेत और अवैध वन कटाई का कारोबार फल-फूल रहा है जबसे शिवराज सिंह की सरकार बनी तबसे लेकर आज तक रेत के कारोबार से अधिक से अधिक राजस्व वसूली के लिये सरकार के प्रयास चलते रहे और स्थिति यह है कि इस वर्ष सरकार द्वारा रेत के राजस्व से १४०० करोड़ रुपये वसूलने की योजना बनाई गई है लेकिन यह सभी जानते हैं कि जहां सरकार रेत से अधिक से अधिक राजस्व कमाने की योजना बनाती है तो वहीं रेत का अवैध कारोबार करने वाले भी सरकार से कई गुना अधिक कमाई करने में लगे हुए हैं क्योंकि इन अवैध रेत के कारोबार करने वालों को न तो टीपी नहीं कटवानी पड़ती और न ही रायल्टी देना पड़ती है लेकिन यह जरूर है कि उनके अवैध कारोबार में दायरे में आने वाले मैदानी अफसरों से सेटिंग बिठाना पड़ती है और उसके चलते यह कारोबार धड़ल्ले से चलता है, सूत्र बताते हैं कि शिवराज सरकार ने इस बार इस वित्तीय वर्ष में रेत के कारोबार से १४०० करोड़ रुपये का राजस्व वसूलने के लिये खनिज और विभाग के अधिकारियों से कहा है लेकिन यह भी जानकारी मिली है कि अधिकारियों ने शिवराज सिंह के इस टारगेट को पूरा करने में आनाकानी कर दी है, मजे की बात तो यह है कि इस वित्तीय वर्ष में जहां शिवराज सरकार ने निर्धारित फार्मूले के अनुसार रेत का राजस्व में दस प्रतिशत बढ़ाकर नीलामी का फरमान अधिकारियों को थमा दिया लेकिन कोरोना संक्रमण से बिगड़े माहौल की वजह से रायसेन, मंदसौर, अलीराजपुर, उज्जैन व आगर मालवा में रेत खदानों की नीलामी अभी तक नहीं हो पाई अब इन जिलों की खदाने बारिश के बाद नीलाम होंगी, खनिज निगम इसकी तैयारी में लगा हुआ है उसमें से रायसेन, मंदसौर और अलीराजपुर की खदानों के ठेके रायल्टी की दूसरी किश्त जमा न करने के कारण दो महीन से निरस्त की गई हैं लेकिन सवाल यह उठता है कि खनिज विभाग ने भले ही इन जिलों की रेत की खदानें अपने दस्तावेज में निरस्त कर दी हों लेकिन इन जिलों की जमीनी स्थिति को यदि देखें तो इन जिलों की सड़कों पर आज भी रेत से भरे डम्पर धड़ल्ले से दौड़ रहे हैं सवाल यह उठता है कि जब इन जिलों की खदानें निरस्त हैं तो आखिर रेत से भरे डम्पर कहां से आ रहे हैं यह सभी जानते हैं कि इस तरह के अवैध कारोबार करने वालों को जहां राजनैतिक संरक्षण तो मिलता ही है तो वहीं प्रशासनिक और जिन-जिन मार्गों से यह डम्पर गुजरते हैं उन मार्गों पर पुलिस से लेकर हर प्रशासनिक अधिकारी से सांठगांठ होती है तभी तो यह कारोबार धड़ल्ले से प्रदेश में फल-फूल रहा है
मजे की बात तो यह है कि रेत के इस अवैध कारोबार में शिवराज सिंह के परिजनों का नाम भी एक बार नहीं अनेकों बार उजागर हुआ है ऐसी स्थिति में अन्य राजनेता भी इस कारोबार में लिप्त होने के लिये लालायित तो रहते हैं तभी तो कमलनाथ सरकार के कार्यकाल के दौरान उनके वह हवाबाज और समाचार पत्रों की सुर्खियों में बने रहने वाले नेता पीसी शर्मा जब होशंगाबाद जिले के प्रभारी मंत्री थे तो आम जनता ने ही नहीं बल्कि कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने भी पीसी शर्मा पर रेत के अवैध कारोबार को संरक्षण देने के आरोप लगाये थे तो वहीं कमलनाथ सरकार में सुपर चीफ मिनिस्टर पीसी शर्मा की तरह दूसरे चहेते कंप्यूटर बाबा के द्वारा दलबल सहित रेत के घाटों से अवैध वसूली के समाचार सुर्खियों में रहे हैं भले ही कमलनाथ की सरकार प्रदेश से चली गई हो लेकिन आज भी भाजपाई ही नहीं बल्कि कांग्रेसी नेताओं का रेत के अवैध कारोबार में लिप्त होने की खबरें भी हमेशा सुर्खियों में बनी रहती हैं, यही वजह है कि रेत के अवैध कारोबार को रोकने के लिए सरकार जितनी कोशिश करती है उससे कहीं अधिक गति से यह कारोबार प्रदेश में फल-फूल रहा है और इसके चलते आज शिवराज की मां नर्मदा जिसे वह बुढ़ापे की काशी होने का ढिंढोरा पीटते थे उसी नर्मदा से शुरू हुआ रेत का अवैध कारोबार आज पूरे प्रदश में धड़ल्ले से फल-फूल रहा है, तो वहीं सरकार भी इसे खत्म करने का दिखावा करती नजर आती है यदि सरकार चाहे तो यह कारोबार एक मिनट भी नहीं चल सकता लेकिन कुछ तो है जो इस कारोबार को बढ़ावा देने में लोग लगे हुए हैं।
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