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राजस्थान की जनता ने नहीं, गांधी परिवार ने बनाया है मुख्यमंत्री

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एस पी मित्तल, अजमेर

24 जून को देश के सबसे बड़े हिन्दी अखबार दैनिक भास्कर के प्रथम पृष्ठ पर एक खबर छपी है। इस खबर में बताया गया है कि राजस्थान में अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार पिछले 83 दिनों में से 54 दिन जनता के बीच से एब्सेंट (अनुपस्थित) रही है। प्रदेश की जनता का प्रतिनिधि बन कर अखबार ने कहा है कि उपस्थिति में सुधार नहीं किया तो परीक्षा से  डिबार कर दिया जाएगा। भास्कर ने वो 53 दिन बताए, जिनकी सीएम गहलोत और उनकी सरकार गैर हाजिर रही। इसमें कोई दो राय नहीं कि भास्कर ने जागरुक पत्रकारिता का प्रदर्शन किया है। लेकिन भास्कर को यह समझना चाहिए सरकार की उपस्थिति का रजिस्टर कहां रखा है? जहां रजिस्टर रखा है, वहां अशोक गहलोत ने अपनी सरकार की उपस्थिति दर्ज करवा दी है। प्रदेश की जनता भले ही परीक्षा से डिबार की चेतावनी दे रही हो, लेकिन उपस्थिति का रजिस्टर रखने वाले परिवार ने गहलोत सरकार की 100 प्रतिशत उपस्थिति दर्ज की है। भास्कर जिस जनता की तरफ से चेतावनी दे रहा है, उस जनता ने गहलोत को सीएम नहीं बनाया है। राजस्थान की जनता ने तो सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाने के लिए कहा था। इसलिए कांग्रेस के 100 विधायकों को चुना था, जो भाजपा 200 में से 174 सीटें जीतने का दावा कर रही थी, उस भाजपा का एक भी गुर्जर उम्मीदवार विधानसभा का चुनाव नहीं जीत सका। चूंकि 21 विधायकों की संख्या 100 कर दी गई थी, इसलिए पायलट के मुख्यमंत्री बनने की उम्मीद थी, लेकिन कांग्रेस का नेतृत्व करने वाले गांधी परिवार ने अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री बनवा दिया। सब जानते हैं कि कांग्रेस शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों की उपस्थिति का रजिस्टर दिल्ली में गांधी परिवार के पास ही होता है। गांधी परिवार के पास रखे रजिस्टर में उपस्थिति दर्ज कराने में सीएम गहलोत ने कोई कसर नहीं छोड़ी है। भास्कर ने भी देखा होगा की 13 से 14 मई के बीच जब कांग्रेस का चिंतन शिविर हुआ उपस्थिति का रजिस्टर उदयपुर आ गया था। उपस्थिति दर्ज करने वाले गांधी परिवार ने राज्यसभा के चुनाव में तीन उम्मीदवार तय किए। तीनों उम्मीदवारों को जीतवा कर गहलोत ने अपनी उपस्थिति प्रभावी तरीके से दर्ज करवाई। गत दिनों जब उपस्थिति दर्ज करने वाले एक सदस्य से ईडी ने पूछताछ की तो अशोक गहलोत पूरे स्कूल को ही दिल्ली ले गए। इस बार गहलोत ने 100 प्रतिशत उपस्थिति दर्ज करवा दी। प्रदेश की जनता भले ही परीक्षा से डिबार की चेतावनी दे, लेकिन अशोक गहलोत ने अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव तक रजिस्टर में अपनी उपस्थिति दर्ज कर दी है। हो सकता है कि गांधी परिवार अगले विधानसभा चुनाव तक उपस्थिति दर्ज कर रजिस्ट्रर अलमारी में बंद कर दिया हो। भले ही अगले चुनाव में कांग्रेस को 200 में से 11 अंक ही मिलें, लेकिन गहलोत सरकार परीक्षा से डिबार नहीं किया जा सकता। कांग्रेस को परीक्षा तो गहलोत के स्कूल में ही देनी होगी। अशोक गहलोत पहले भी दो बार परीक्षा दे चुके हैं। पहली बार 200 में से 56 अंक और दूसरी बार 21 अंक ही मिले थे। इसलिए अब तीसरी बार 11 अंक की उम्मीद जताई जा रही है। कुछ लोगों को उम्मीद थी कि विधानसभा चुनाव से पहले स्कूल का हेडमास्टर बदल दिया जाएगा। लेकिन इन उम्मीदों पर ईडी की पूछताछ के दौरान पानी फिर गया है। अशोक गहलोत की राजनीति को समझने के लिए भास्कर को अभी और अनुसंधान करने की जरूरत है। 

Ramswaroop Mantri

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