ललितपुर के नेताजी समाजवादी साथी राजेन्द्र रजक नहीं रहे
अभी अकल्पनीय खबर देखी।अंदर तक हिल गया। ललितपुर के नेताजी राजेन्द्र रजक नहीं रहे।कल रात 11:30 बजे हृदयाघात से उनका असामयिक निधन हो गया। ललितपुर के गांधी के तौर पर विख्यात समाजवादी साथी का अचानक हमे छोड़ जाना अत्यंत दुखद है । हम लगातार बात करते रहते थे। 1 जनवरी को पृथ्वीपुर में और 12 जनवरी मुलतापी में मिलना तय हुआ था परंतु 1 का मेरा कार्यक्रम नहीं बना और 12 वे नहीं पहुंच सके। सांची के समाजवादी युवा नेतृत्व प्रशिक्षण शिविर में साथी मुनीन्द्र और 20 युवाओं के साथ मिले थे। बैंगलोर ,इंदौर और ग्वालियर में हुए समाजवादी समागम में वे दलबल सहित आये थे। उनके साथ समाजवादी समागम को लेकर तमाम योजनाएं बनी थीं ,जो अब कभी पूरी नहीं हो सकेंगी । प्रसिद्ध समाजवादी शादीलाल दुबे जी के नजदीकी सहयोगी रहे। सदा आंदोलनरत रहे राजेन्द्र रजक जी। सालाना कई कार्यक्रम किया करते थे।हर समय आमंत्रित करते थे। 12 जनवरी को ही उनका बड़ा कार्यक्रम हुआ करता था। शहीद किसान स्मृति सम्मेलन की वजह से कभी नहीं जा सका। अपने दिल के बहुत करीब वैचारिक साथी के निधन ने मुझे अंदर तक हिला दिया है। किसान सँघर्ष समिति ,समाजवादी समागम के सभी साथियों की ओर से भावभीनी श्रीधानजली। दाता नेताजी के परिवार को इस असहनीय पीड़ा को सहने की छमता प्रदान करे यही कामना करता हूँ। मिट्टी सत्याग्रह यात्रा में हूँ। आज ही 11 बजे अंत्येष्टि है। पहुंचना संभव नहीं होगा। अपने प्रिय साथी के अंतिम दर्शन भी नहीं कर सकूंगा यह अत्यंत पीड़ादायक है। वे लगातार कहते थे पारिवारिक जिम्मेदारियों से मुक्त होकर आपके साथ ही रहूंगा। वैसे भी वे आजीवन समाजवादी पूर्णकालिक कार्यकर्ता ही रहे । सफेद कुर्ते पायजामे के लिबास वे एकदम सामने दिखलाई उलाहना देते दिखलाई पड़ रहे हैं। कह रहे है । ललितपुर में नहीं मिले अब मुझसे मिलने ऊपर आना ही पड़ेगा। कब तक नहीं मिलोगे डॉ सुनीलम! राजेन्द्र रजक जी ने युवा पीढ़ी को समाजवादी विचार से प्रशिक्षित किया है। अब ललितपुर में और बुन्देलखण्ड में समाजवादी आंदोलन की अलख जलाए रखना उनकी जिम्मेदारी होगी। डा. सनीलम,





