मुनेश त्यागी
,,,तू ईश्वर और धर्म के चक्कर और जाल से निकल,
,,,तू विवेकी, तर्कवादी, आविष्कारी और अनुसंधानी और विष्लेषक बन,
,,,सवाल पूछ,गढी गढाई बातों पर विश्वास मत कर,
,,,जिन्न, फरिश्ते, देवदूत, स्नान, हवन, बाबा, माता, संतो और समागम के चक्कर छोड़,
,,,तूने महासागरों को जोड़ा है,
,,,तूने नहरें नाली निकाली हैं,
,,,तूने तालाब और कुंड बनाए हैं,
,,,तूने महाद्वीपों को जोड़ा है,
,,,तूने नदियों के तटों को पुल और बांध बनाकर जोड़ा है,
,,,तूने बोलियों भाषाओं का जाल बिछाया है,
,,,तूने संगीत के सुर ताल बनाए हैं,
,,,तूने असाध्य रोगों का इलाज किया है,
,,,तूने भूख के साम्राराज को फतह किया है,
,,,तूने अजंता और एलोरा का निर्माण किया है,
,,, तूने दुनिया के सेवन वंडर्स का निर्माण किया है,
,,,तूने सारी दुनिया के सभी मंदिर, मस्जिद, चर्च और गुरुद्वारे बनाए हैं,
,,, दुनिया में प्राकृतिक चीजों के अलावा जो कुछ भी दिखाई देता है, सुनाई देता है, उनका निर्माता तू ही है,
,,,तू दुनिया के चमत्कारों का निर्माता है,
,,,आजकल आदमी रुपी कुछ दुष्टों ने बहुत सारी बीमारियां जैसे धर्मांधता, अंधविश्वास, पाखंड, ढपोरशंख पूजा, पाठ, हवन पूजन आदि धरती पर उगा दिये हैं,
,,, इनका इलाज ओ मानव! तू अपने साथियों के साथ मिलकर ही ढूंढ सकता है,
,,,तू सबको साथ लेकर धरती को स्वर्ग बना सकता है,
,,,अगर कहीं स्वर्ग या जन्नत है तो उसे धरती पर उतार ला, वास्तव में इस धरती को ही स्वर्ग बनाया जा सकता है, इसके अलावा स्वर्ग और नर्क कहीं भी नहीं हैं,
,,इसी में तेरा और मानव जाति का कल्याण है,
,,,ओ,धरती के पुत्र! तू बहुत ही शक्तिशाली और महाबली है,
,,,तू अपनी ताकत को पहचान और इस धरती को स्वर्ग बना इसे जीने लायक बना,
,,, तू इस दुनिया में हजारों वर्षों से कायम शोषण, अन्याय, दमन, भेदभाव, अत्याचार और जुल्मों सितम को जड़ से मिटा और इनका सर्वनाश कर और इस खराब कर दी गई दुनिया को, एक बेहतरीन दुनिया में बदल।
,,,तू एक ऐसे समाज का निर्माण कर जिसमें सबको रोजी-रोटी, शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, दवाई, रोजगार मिले,
,,,ओ मानव तू अपने साथियों को साथ लेकर कि समाज में उग आये जातिवाद, भ्रष्टाचार, स्वार्थ पन, भाई भतीजावाद, भीतरघात, सांप्रदायिकता, मारामारी, अपराध आदि का विनाश कर,
केवल तू ही इन अद्भुत कारनामों को कर सकता है, देवी देवता या और कोई नहीं।





