
सनत कुमार जैन
भारतीय जनता पार्टी ने 80:20 का जो खेल खेला था। उसका जवाब इंडिया गठबंधन को, अब भाजपा को देने का मौका मिल गया है। 80 फ़ीसदी हिंदुओं के वोट धार्मिक ध्रुवीकरण के आधार पर भारतीय जनता पार्टी ने अपने पक्ष में करने की जो बयार बहाई थी। इसका फायदा 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को खुलकर मिला। धार्मिक ध्रुवीकरण को लेकर हिंदुत्व की जो राजनीति भारतीय जनता पार्टी कर रही थी। उसका जवाब अब इंडिया गठबंधन और कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ओबीसी वर्ग के प्रति प्रेम जताकर भाजपा को चुनौती दे रहे हैं। बिहार में जाति आधार पर जनगणना हुई।
60 फ़ीसदी से ज्यादा पिछड़ी जातियां जनगणना की रिपोर्ट में सामने आई हैं। जिनमे अति गरीब, गरीब और मध्यवर्ग की बहुत बड़ी आबादी पिछड़े वर्ग की है। पिछड़े वर्ग के आरक्षण को लेकर पिछले कई वर्षों से राजनीतिक दलों द्वारा आरक्षण बढ़ाने की मांग हो रही थी। कई राज्यों के हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में पिछड़ा वर्ग आरक्षण को लेकर याचिका लंबित है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा 50 फ़ीसदी अधिकतम आरक्षण की सीलिंग तय किए जाने के कारण पिछड़े वर्ग को आरक्षण का लाभ उनकी जनसंख्या के आधार पर नहीं मिल पा रहा था। क्योंकि कभी इनकी जनगणना हुई नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट ने जाति जनगणना के आधार पर आंकड़े भी समय-समय पर मांगे हैं। केंद्र सरकार ने एक आयोग भी गठित किया था। जिसे पिछडा वर्ग की जनसंख्या कर रिपोर्ट सौंपनी थी। हाल ही में एक रिपोर्ट आयोग ने केंद्र सरकार को सौंप दी है। आंकड़ों के आधार पर ही आरक्षण के बारे में निर्णय करने की बात न्यायालय ने अपने निर्णयों में कई बार कही थी।
बिहार सरकार ने जाति जनगणना करा ली है। इस निर्णय में भारतीय जनता पार्टी भी साथ थी। 60 फ़ीसदी से ज्यादा हिंदू जातियां बिहार में पिछड़े वर्ग के अंतर्गत आती हैं। ऐसी स्थिति में अब विपक्ष और कांग्रेस के लिए 80:20 के धार्मिक ध्रुवीकरण की नई तोड मिल गई है। धार्मिक ध्रुवीकरण के मुकाबले में अब सामाजिक ध्रुवीकरण की नई लड़ाई भारत में शुरू हो गई है। राहुल गांधी ने जिस तरह से पिछड़े वर्ग की उपेक्षा का आरोप सरकार पर लगाया है। उसके बाद से भारतवर्ष में सभी हिन्दू जातियों में अपने आर्थिक एवं सामाजिक अधिकार को लेकर एक नई चेतना देखने को मिल रही है। पिछड़ा वर्ग, दलित, आदिवासी जाति आधार पर एकजुट हो रहा है। इसका नुकसान भारतीय जनता पार्टी को स्पष्ट रूप से होता हुआ दिख रहा है। हिंदू समुदाय भी अब खंड-खंड में बंटने के लिए तैयार है। महिला आरक्षण कानून को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने जिस तरह से विशेष सत्र बुलाकर, महिलाओं का आरक्षण कानून बनाकर,महिलाओं का समर्थन पाने की चेष्टा की थी। उसमें भी भारतीय जनता पार्टी पिछड़ते हुई दिख रही है। परिसीमन के बाद ही 2029 लोकसभा चुनाव मे महिलाओं को आरक्षण मिल सकता है। भाजपा ने अभी से महिलाओं की उम्मीदें जगा दी हैं।
भारतीय जनता पार्टी और वर्तमान केंद्र सरकार महिलाओं को जाति आधार पर आरक्षण देने के लिए तैयार नहीं है। यह माना जा रहा है,कि उच्च वर्ग की महिलाओँ को महिला आरक्षण का लाभ मिलेगा। पिछड़ा वर्ग, एसटी, एससी की महिलाएं एक बार फिर पीछे रह जाएगी। इसी बात को ध्यान में रखते हुए, राहुल गांधी ने संसद के अंदर केंद्रीय सचिवालय में 90 सचिवों के बीच में से केवल 3 सदस्य पिछड़ा वर्ग के होने के बात कहकर सत्ता मे पिछड़े वर्ग की भागीदारी का नया मुद्दा, बना दिया है। एसटी,एससी वर्ग को आरक्षण का लाभ मिल रहा है। पिछड़ा वर्ग इससे वंचित है। भारतीय जनता पार्टी ने 80:20 का जो धार्मिक ध्रुवीकरण बनाया था। उसी का जवाब सामाजिक ध्रुवीकरण के रूप में 20:80 का है। समय रहते भारतीय जनता पार्टी को इंडिया गठबंधन के इस चक्रव्यूह को समझाना पड़ेगा। भारतीय जनता पार्टी यदि इस चक्रव्यूह को भेद पाई, तो ठीक है। अन्यथा जाति समीकरण इंडिया गठबंधन के पक्ष में जाता हुआ दिख रहा हैं। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव में इसका असर जरूर पड़ेगा।





