*सुसंस्कृति परिहार
पोरिवोरतन की जो आंधी बंगाल चुनाव में आई थी कमोवेश उत्तर प्रदेश में उससे भी गया बीता नज़ारा यहां देखा जा रहा है आज तो एक ऐसा दृश्य सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है जिसे देखकर लोग अच्छे दिन आने वाले हैं, की याद कर मज़े ले रहे हैं।घटना राबर्ट्सगंज विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे एक प्रत्याशी से सम्बंधित है जो वर्तमान में विधायक रहे और अब एक मौका और दो की चाहत में स्कूल में बच्चों की तरह कनबुच्ची लगाकर माफी की गुहार लगा रहे हैं। हालांकि स्कूलों में अब ये नहीं लगती। लगता है उन्हें अपनी गलतियों का अहसास तो हो ही गया है साथ ही उनने ये भी बखूबी समझ लिया है कि भाजपा की हालत बहुत खराब हो चुकी है।

बहरहाल यह भी वोटर को प्रभावित करने का एक प्रभावी तरीका है।भारत का वोटर बड़ा सहृदय होता है वह बीती ताहि बिसार के आगे की सुधि लेने में माहिर होता है इसीलिए ऐसे लोग उनकी उदारता का भरपूर लाभ ले लेते हैं और बेचारा मतदाता ठगा जाता है। आजकल उत्तरप्रदेश की वे महिलाएं बहुत उदारता पूर्वक मोदी योगी का यशगान करते हुए भाजपा को मतदान कर रही हैं जिनके घर राशन पहुंचा है जिसमें तेल और नमक भी शामिल हैं।वे साफ कह रही हैं मोदी का नमक खाया है तो वोट तो देनी ही होगी।नमक हरामी नहीं कर सकते हैं।सच बात है। उन्होंने लेकिन कभी यह नहीं सोचा कि ये नमक और राशन कहां से आया है कैसे आया और कब तक मिलेगा? चुनाव खत्म और राशन ख़त्म।एक नट महिला से अजीत अंजुम की बात का बड़े हर्ष से ज़िक्र करते हुए देश का प्रधानमंत्री यह कह रहा है कि मोदी का नमक खाया है और वह महिला उसे समझ रही है यानि वोट पक्का भाजपा की झोली में। उन्हें यह कहते शर्म नहीं आई कि वह मोदी का नमक खा रहीं हैं। जबकि तमाम राशन देश के किसानों मजदूरों की मेहनत का प्रतिफल है।
इधर चुनाव आयोग की भूमिका रहस्यपूर्ण हो जाती है जब चुनाव होने की तिथियां नज़दीक़ थीं तब इस राशन को आगे बढ़ाएं जाने का विरोध क्यों नहीं हुआ?बराबर मोदी और योगी के चित्रों वाले थैलों में तमाम सामान पहुंचाया गया ।बढ़ती बेरोजगारी और कोरोना काल के वक्त हुए अनेकों बेराजगार परिवारों में इस राशन को जीने के सहारे के रूप में महिलाओं ने लिया और यह जयगान मतदान तक पहुंच रहा है। जब उनसे बदलाव या दुहराव का सवाल पूछा जाता है तो वे मोदी योगी नाम दोहराती हैं।जबकि उन्हीं के बेटे और पति अच्छे काम की उम्मीद अखिलेश में देख रहे हैं।यह बहुत गंभीर और विचारणीय पहलू है।
चुनाव के दौरान सांड यहां का सबसे बड़ा फैक्टर है जो बड़ी तादाद में फसलों को चट कर जाते हैं जबकि लोग जागकर खेतों में चौकीदारी करते हैं।इनकी उचित व्यवस्था से नाखुश लोगों ने खेतों से सांडों को रगेड़कर योगी जी की सभा उजाड़ दी।यह भी शायद पहली दफ़े ही हुआ होगा। जनता जो कर सकती है कर रही है।
पहली दफा यह भी हुआ अखिलेश के चुनाव चिन्ह को आतंकी बताया गया है कल पंजे को हत्यारा भी बताया जा सकता है।अमित शाह मोदी जी के 24घंटे सोने की बात करते हैं तो योगी आदित्यनाथ को हत्या का खतरा दिखने लगा है। अफ़सोसनाक ये है कि इनका हिंदु मुस्लिम अब एक हो गया है।सीमा पर पुलबामा जैसा काम मुश्किल हो गया है।ईडी सीबीआई सब हो चुका है।सिवाय मायावती के सब प्रतिद्वंद्वी गरज रहे हैं देखना यह है कि सातवें चरण तक इनके कैसे कैसे षड्यंत्र सामने आते हैं? सोशल मीडिया पर इनकी आई टी सैल अब पिछड़ रही है।तमाम झूठों पर शीघ्र पर्दा हटने लगा है।अब तो यही लगता है कि कि जैसे इनके एक प्रत्याशी अब दबंगई छोड़ कनबुच्ची लगाकर वोट मांग रहे हैं कल को योगी जी ना कहीं रो पड़े जैसे उनकी एक विधायक महोदया कह रहीं थीं मैंने सब कुछ बांटा पर ये वोट मुझे नहीं दे रहे। मोदी अमित शाह के आंसू यह बह जाएं तो संभावित है वे राकेश टिकैत जैसे हालात में परिवर्तन ला सकते हैं।जनता से कह सकते हैं माफ करो भाईयों बहिनों एक मौका और दो—!




