समाजवादी चिंतक रघु ठाकुर की पुस्तक ‘ समय के प्रश्न ‘ का कांस्टीट्यूशन क्लब में लोकार्पण
नई दिल्ली,। सुप्रसिद्ध समाजवादी चिंतक व जननेता रघु ठाकुर की पुस्तक ‘समय के प्रश्न’ के विषय में पत्रकारिता, राजनीति व सामाजिक क्षेत्र के विशिष्ट लोगों ने राय व्यक्त की है कि यह पुस्तक देश दुनिया और समाज की तमाम समस्याओं के समाधान लोकतंत्र की सुरक्षा और महात्मा गांधी के दर्शन में ढूंढ़ती हैं। रघु ठाकुर ने ‘ एक देश एक चुनाव ‘ पर बोलते हुए कहा कि यह नारा तब सार्थक होगा जब चुनाव का खर्च भी चुनाव आयोग ही दे और अमीर- गरीब निर्विशेष कोई भी प्रत्याशी चुनाव लड़ सके।
पुस्तक का आज कांस्टीट्यूशन क्लब में लोकार्पण हुआ। इस अवसर पर रघु ठाकुर सहित हरिजन सेवक संघ के अध्यक्ष लक्ष्मी दास, राज्यसभा सदस्य संजय सिंह, लेखक शिवदयाल, समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक अनूप संडा व पुस्तक की सम्पादक डॉ. शिवा श्रीवास्तव की विशेष उपस्थिति रही।
पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के सहयोगी रहे एच एस शर्मा , आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी की पौत्री अपर्णा, पत्रकार – लेखक अरविन्द मोहन, कार्टूनिस्ट इरफ़ान, पत्रकार धर्मेन्द्र भदौरिया, लेखक – शोधकर्ता अशोक पंकज, हरिजन सेवक संघ के सचिव संजय राय, पत्रकार आकांक्षा ठाकुर आदि की विशेष उपस्थिति रही।धन्यवाद ज्ञापन श्रीमती अनीता सिंह ने व संचालन पुस्तक के प्रकाशक नित्यानंद ने किया।
उल्लेखनीय है कि सार्वजनिक प्रश्नों पर रघु ठाकुर की यह बाईसवीं पुस्तक है।
रघु ठाकुर ने आंतरिक लोकतंत्र, एक देश एक चुनाव , इलेक्टोरल बांड, जातिप्रथा, स्वदेशी, विश्व- संसद व मीडिया सहित अनेक विषयों की विसंगति बताते हुए उनके समाधान लोकतंत्र, सादगी व स्वावलंबन में बताए।
राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा देश में रघु ठाकुर के अलावा कोई राजनेता न्यायपालिका के फैसलों की सम्यक समीक्षा करता हुआ नहीं दिखता।रघु ठाकुर जो लिखते हैं तीन चार दशक बाद उसका महत्व समझ में आता है। 1997 में आर्थिक उदारीकरण, वैश्वीकरण पर सुल्तानपुर में जो विचार व्यक्त किए थे उन्हें टेप करके लिप्यंतरित कर किताब का स्वरूप दिया गया था। आज उस किताब को पढ़ने से समझ में आता पूंजीवादी और कारपोरेट संचालित वैश्विक व्यवस्था से बाहर निकलना कितना जरूरी है। डॉ लोहिया का यह नारा कि ‘ सड़कें खामोश हो जायेंगी तो संसद और सत्ता आवारा हो जायेगी ‘ का जिक्र करते हुए संजय सिंह ने कहा अरावली का विनाश जनता के सड़क पर उतरने से ही रुका है अन्यथा राजस्थान की सरकार और न्यायपालिका ने तो इसे नष्ट करने की व्यवस्था दे ही दी थी।
रघु ठाकुर ने अपने वक्तव्य की शुरुआत में आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी से जुड़ा एक प्रसंग सुनाते हुए कहा कि उनके विद्यार्थी जीवन में हजारी प्रसाद जी ने सागर विश्वविद्यालय में एक व्याख्यान में छात्रों के विषय में कुलपति के मंतव्य के विपरित बोलते हुए कहा था कि आंदोलन लोहार की खटखट की तरह है और इसे निर्माण की ही एक प्रक्रिया मानना चाहिए। आज दुनिया में असहमति और आन्दोलन के लिए जगह कम हो रही है। दुनिया की तमाम समस्या और विसंगति का यही कारण है। उन्होंने ‘एक देश एक चुनाव’ पर बोलते हुए कहा कि सबसे पहले इसकी मांग और पहल उन्होंने और उनके साथियों ने ही की थी, लेकिन सरकार जिस तरह इस दिशा में आगे बढ़ना चाहती है उसमें सुधार की जरूरत है। पंचायत से लेकर संसद तक के चुनाव एक साथ कराना जितना जरूरी है उतना ही जरूरी है दूसरे दलों की सरकारों को भंग न कर उन्हें निर्धारित अवधि तक काम करने देना। जनता पार्टी के समय में जब कुछ राज्य सरकारों को प्रतिकूल मानते हुए भंग किया गया तब भी उन्होंने अकेले इस मानसिकता का विरोध किया था। उन्होंने कहा कि डॉ राममनोहर लोहिया कहते थे कि राजनीतिक दल अपनी स्वयं की आलोचना भी करना सीखें। लोहिया ने सन् 1955 में केरल में गोलीकांड के विरोध में अपने ही दल की सरकार के मुख्यमंत्री को यह कहकर त्यागपत्र देने के लिए कहा था कि नैतिकता सिर्फ विपक्षी दलों पर ही नहीं, खुद पर भी लागू करनी चाहिए।
पार्टी या संविधान में संशोधन केवल सत्ता के विस्तार के लिए नहीं बल्कि सिद्धांत – नीति- कार्यक्रम के लिए स्वीकार्य है।
रघु ठाकुर ने संयुक्त राष्ट्र संघ की विफलता की चर्चा करते हुए डॉ लोहिया की कल्पना के अनुरूप विश्व- संसद को भी साकार करने की जरूरत बताई।
चुनावी बांड ने किस तरह देश की राजनीति और मीडिया को बिगाड़ा है इसका जिक्र करते हुए रघु ठाकुर ने कहा कि सिर्फ यह कहना उचित नहीं है कि सत्ताधारी भाजपा को छह हजार करोड़ का चंदा मिला है। उद्योगपति हैसियत देखकर बाकी दलों को भी चंदा दे रहे हैं और विपक्षी दल उस चंदे की रकम को ले रहे हैं। मीडिया को भी इसका हिस्सा जाता है। क्या सत्तापक्ष और क्या विपक्ष सभी को सभी को इस चंदे की रकम की हिस्सेदारी के हिसाब से मीडिया स्थान दे रहा है जिससे सारी राजनीति गड़बड़ाई हुई है।
रघु ठाकुर ने पूंजीवाद और धर्म के गठजोड़ से पैदा हुई विसंगति को भी उजागर करते हुए कहा कि धर्म ने इंसान के दिमागों को बांटा है। पूंजीवाद के फलने फूलने में यह भी एक कारण है।
दुनिया के ताकतवर देश जिस तरह व्यापार पर कब्जा जमा रहे हैं उसे नव साम्राज्यवाद बताते हुए रघु ठाकुर ने कहा अमरीका ने जब वेनेजुएला के राष्ट्रपति का जिस तरह अपहरण कर लिया उसे देखते हुए राष्ट्रों की संप्रभुता और राष्ट्रवाद जैसी अवधारणा खतरे में पड़ गयी है। क्या ऐसी स्थिति में यह जरूरी नहीं लगता कि भारत की संसद विश्व व्यापार संगठन से अलग होने का फैसला करे और व्यापार के आधार पर बने नव साम्राज्यवाद को चुनौती दे। जो संगठन और जो लोग स्वदेशी के पक्षधर थे उन्हें आज मुखर होने की जरूरत है।
रघु ठाकुर ने इस अवसर पर सागर विश्वविद्यालय के संस्थापक डॉ हरिसिंह गौर को याद करते हुए कहा भारत में महिलाएं अगर न्यायालय में वकालत कर पा रही हैं तो उसके पीछे डा. गौर की पहल और प्रयास हैं। वे दिल्ली विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलपति रहे, नागपुर विश्वविद्यालय के भी कुलपति रहे। अपने जीवन की सारी कमाई अपनी जन्मभूमि के पिछड़ेपन और ग़रीबी को दूर करने के लिए विश्वविद्यालय खोलने में लगा दी। उस विश्वविद्यालय में अपने परिवार के लोगों को न रखकर उदाहरण प्रस्तुत किया। आज शिक्षा और चिकित्सा में जो लोग पैसा लगा रहे हैं क्या वे इससे कुछ सीख सकते हैं?
जातिवाद के मुद्दे पर बोलते हुए रघु ठाकुर ने कहा जातिवाद का पोषण राजनीति के लोगों ने किया है। वे ही किसी को टिकट देने से पहले संबंधित चुनाव क्षेत्र में जातिविशेष का आधार देखते हैं। जहां जो जाति अल्पसंख्या में है उसमें से टिकट दिया जाये तो जातिवाद मिटेगा और बहुसंख्यक – अल्पसंख्यक परस्पर सम्मान की भावना रखेंगे।
उत्तरप्रदेश के ललितपुर में डा. राममनोहर लोहिया के ऐतिहासिक भाषण की याद दिलाते हुए रघु ठाकुर ने कहा उस भाषण में डा. लोहिया ने कहा था कि बीसवीं सदी की दो महान घटनाएं हैं, एटम बम और गांधी। हमें देखना है कि इन दोनों में से कौन जीतता है। आज यह विचार करने की भी जरूरत है कि लोकतंत्र या तानाशाही, विचार और विचारहीनता में से हम किसे महत्त्व देते हैं।
उल्लेखनीय है कि पुस्तक की भूमिका पत्रकार एवं इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष रामबहादुर राय ने लिखी है। रघु जी ने उनकी चर्चा करते हुए कहा कि श्री राय ने उन पुस्तकों की भी भूमिका उदारता पूर्वक लिखी है जिनमें उनकी विचारधारा की आलोचना है।
हरिजन सेवक संघ के सचिव लक्ष्मी दास ने पुस्तक ‘ समय के प्रश्न ‘ को लम्बे समय तक प्रासंगिक और चर्चा में रहने वाली किताब बताते हुए कहा रघु ठाकुर अपने दौर के सवालों से जिस तरह जूझ रहे हैं उसे देखकर आने वाले समय में कोई भी कहेगा कि किस राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय विषय पर रघु ने क्या कहा था। उन्होंने बदली हुई परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि वही साम्यवादी चीन जो धर्म को अफीम मानता था आज धार्मिक रूप से कट्टर देशों की मदद में खड़ा दिखाई दे रहा है। आजादी के आंदोलन के समय जिस सादगी को एक मूल्य माना गया था वहां उद्योगपति परिवार शादियों में पानी की तरह पैसा बहाते हुए हेलीकॉप्टर से फूल बरसा रहे हैं और भारत के गांव देहात के लोग उसकी नकल करना चाहते हैं।
पटना से आये लेखक शिवदयाल ने कहा कि ऐसे समय में जब मूल्य और आपसदारी जैसी चीजें बिखर रही हैं रघु ठाकुर की पुस्तक विकास के मानवीय चेहरे की तलाश करने के साथ साथ सामाजिक आर्थिक विकास को एक साथ जोड़ कर देखती है। रघु ठाकुर को मूलतः एक राजनीतिज्ञ बताते हुए शिवदयाल ने कहा कि वे इस के साथ साथ एक लेखक भी हैं। आज के समय में जब भिन्नता को ही विभाजन का आधार बना दिया गया है रघु जी समावेशीकरण और समाजवादी मूल्यों को जीवन की पूंजी बताकर मनुष्य के कोमल भाव और परदुखकातरता को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।
पूर्व विधायक अनूप संडा ने इस अवसर पर रघु जी के सान्निध्य से हुए लाभ का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रभावशाली लोगों से बहस करने का सामर्थ्य उन्हीं से मिला। रघु जी ने सिद्धांत के लिए सत्ता को छोड़ना ठीक समझा।
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के धमतरी से आये शिव नेताम ने अतिथियों को डा. लोहिया का चित्र भेंट कर उस नगरी सिहावा आंदोलन की याद दिलाई जहां से 1952 में लोहिया ने आदिवासियों को भूमि का अधिकार दिलाने का आंदोलन शुरू किया था।
आयोजन में डा. ब्रजेश शर्मा, अशोक पंकज, अशोक पंडा, शिवराज सिंह, गांधीवादी रमेश शर्मा, जावेद उस्मानी , रामकुमार पचौरी , पूर्व सांसद रमाकांत शर्मा, एडवोकेट अशोक सिंह, आइपीएस राजेन्द्र सिंह एडवोकेट मिश्र ( बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री के नाती), देवेन्द्र वर्मा, एडवोकेट शमभूदयाल बघेल, श्यामसुंदर यादव, दयाशंकर शर्मा, धीरेन्द्र पासवान, दीपक कुमार, जमशेद भाई, अरुण प्रताप सिंह, प्रोफ़ेसर जयवीर राठी , मुकेश चंद्रा, हरिजन सेवक संघ के सचिव संजय राय, डॉ मनोज कुमार राय, सर्वेश मिश्रा, अजीत त्यागी, अभिषेक कुमार, राजेश शर्मा, पार्षद राकेश कुमार आदि गणमान्य लोगों की उपस्थिति रही।






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