निरस्त किए गए अर्जित अवकाश का रिटायरमेंट के बाद कर दिया भुगतान
इंदौर, रफी मोहम्मद शेख.
ओरिएंटल इश्युरेंस कंपनी के क्षेत्रीय कार्यालय में पदस्थ के मैनेजर को गलत तरीके से अर्जित अवकाश के नगदीकरण का मामला सामने आया है। उक्त मैनेजर को यह भुगतान रिटायरमेंट के बाद किया गया है। इस मामले की शिकायत दिल्ली मुख्यालय में की गई है, जिसके बाद मामले में जांच शुरू हुई है। खास बात यह है कि पहले हुई जांच विजिलेंस अधिकारी ने पूर्व में जारी आदेश को सही पाया था। उसके बावजूद यह भुगतान जारी कर दिया गया।
बताया जा रहा है कि जांच के बाद कुछ दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की गाज गिर सकती है।मिली जानकारी के अनुसार मामला इंदौर विकास प्राधिकरण स्थित ओरिएंटल इश्युरेंस कंपनी के आॅफिस का है। इस कार्यालय में कुछ समय पहले मैनेजर के रूप में ए.एस. चावला पदस्थ थे, जो सितंबर 2020 में रिटायर हुए थे। मामला मुख्यालय पर रहने के लिए मिलने वाला अर्जित अवकाश का है, जिसमें गड़बड़ी की शिकायत हुई है।
मुख्यालय के बाहर जाने का मामलाकिसी भी कर्मचारी को मुख्यालय पर रहने के दौरान ही अर्जित अवकाश की पात्रता होती है। बीमा मुख्यालय ने दिनांक 29 जून 2920 को परिपत्र क्रमांक 8351 जारी किया था। इसके अनुसार कोई भी अधिकारी या कर्मचारी अगर हेडक्वार्टर छोड़कर चला जाता है तो उसे इसकी पात्रता नहीं होगी। जानकारी के अनुसार कोरोनाकाल में तत्कालीन मैनेजर ए.एस. चावला इंदौर मुख्यालय को छोड़कर अपने गृहनगर भोपाल चले गए थे। उनके साथ ही 13 अन्य अधिकारियों को भी मुख्यालय छोड़ने की सूचना आई थी।
अवकाश कर दिया था कमकंपनी के तत्कालीन पर्सनल विभाग के रीजनल मैनेजर ने इन 13 अधिकारियों के अर्जित अवकाश को उनके अकाउंट में से कम कर दिया था। अक्टूबर में पर्सनल मैनेजर रिटायर हो गए तो उनके स्थान पर विभाग का काम रेखा सतपुते को सौंपा गया। उन्होंने पूर्व में जारी किए आदेश को निरस्त करते हुए इन 13 अधिकारियों के कम किए गए अर्जित अवकाश को वापस उनके अकाउंट में क्रेडिट कर दिया। इस कारण सितंबर में ही रिटायर हो चुके ए.एस. चावला को फरवरी 2021 में इस अर्जित अवकाश की राशि दो लाख 29 हजार चार सौ 44 रुपए भुगतान कर दिया गया। यह भुगतान आईडीए स्थित यूनियन बैंक की ब्रांच के माध्यम से किया गया।
पूर्व जांच में पाया था दोषीमिली जानकारी के अनुसार ए.एस. चावला के एक लाख चार हजार पचास रुपए की राशि टीडीएस के रूप में भी काटी गई है। इस प्रकार कंपनी को दोनों मामलों में कुल तीन लाख 33 हजार चार सौ 94 रुपए का नुकसान हुआ है। दिल्ली मुख्यालय को अक्टूबर में ही इस संबंध में शिकायत कर दी गई थी। स्थानीय विजिलेंस आॅफिसर शरद घाडगे ने इस मामले में जांच की थी। उन्होंने पाया था कि ए.एस. चावला को किया गया भुगतान सही नहीं था। उन्होंने इस संबंध में अपनी रिपोर्ट मुख्यालय को भेज दी थी। इसके बावजूद कंपनी के उपमहाप्रबंधक आर.सी. बिडला और मैनेजर रेखा सतपुते ने चावला को भुगतान जारी किया। अब फिर से हुई शिकायत के बाद चीफ विजिलेंस आॅफिसर दिनेश नामदेव ने मामले की जांच के आदेश जारी किए हैं। संभावना है कि जांच के बाद कुछ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।





