चेन्नई
पिछले विधानसभा चुनावों में लगातार दूसरी बार जीत हासिल कर AIADMK ने यह मिथ तोड़ा था कि तमिलनाडु में सत्ता हर पांच साल में बदल जाती है, लेकिन इस चुनाव में AIADMK के पास जयललिता जैसा करिश्माई चेहरा नहीं है। DMK पूरी ताकत से सत्ता में लौटने की कोशिश कर रही है, लेकिन उसके खेमे में भी करुणानिधि नहीं हैं।
पिछले 40 सालों में यह पहला मौका है, जब तमिलनाडु के चुनाव बगैर करुणानिधि और जयललिता के होंगे। तमिल राजनीति में फिल्म इंडस्ट्री से आए चेहरों का काफी दबदबा रहा है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं दिख रहा है। रजनीकांत एक कदम आगे बढ़ा कर रहस्यमय कारणों से पांव पीछे खींच चुके हैं। कमल हासन जरूर सक्रिय हैं, लेकिन अभी तक उन्होंने अपना रंग तय नहीं किया है। 1967 के बाद तमिलनाडु में किसी राष्ट्रीय दल की सरकार नहीं बनी है। हर बार की तरह इस बार भी भाजपा-कांग्रेस जैसे राष्ट्रीय दल, AIADMK-DMK की छोटे भाइयों की भूमिका में हैं।
जयललिता की विरासत को लेकर झगड़ा
कभी जयललिता की सहयोगी रहीं शशिकला को भ्रष्टाचार के मामले में 4 साल जेल में रहना पड़ा। जेल से बाहर आने के बाद वे जयललिता की विरासत पर दावा जता रही हैं, लेकिन कभी शशिकला के ही आशीर्वाद से मुख्यमंत्री बने ई पलानीस्वामी (ईपीएस) और डिप्टी सीएम बने ओ पनीरसेल्वम (ओपीएस) उनका विरोध कर रहे हैं।

दक्षिण भारत में चुनाव प्रचार के लिए बड़े लेवल पर वॉल पोस्टर का सहारा लिया जाता है। सभी प्रमुखों जगहों पर पार्टी के नेताओं के पोस्टर लगे हैं।
फरवरी में जेल से बाहर आ चुकीं शशिकला (चिन्नम्मा) ने अभी तक कोई पार्टी तो नहीं बनाई, लेकिन उनके भतीजे टीटीवी दिनाकरण जरूर अपनी अलग पार्टी अम्मा मक्कल मुनेत्र कड़गम( एएमएमके) बनाकर मैदान में हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी को 5.25% और उपचुनाव में 7.2% वोट भी मिले थे। यह AIADMK के लिए चिंता की बात है। AIADMK के साथ गठबंधन करने वाली भाजपा के लिए इन दोनों को मिलाना एक बड़ी चुनौती है। अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि अमित शाह के नेतृत्व में इसकी कोशिशें चल रही हैं। AIADMK के साथ चुनाव लड़ने जा रही भाजपा की एक बड़ी चिंता यह भी है कि उसे 2016 के विधानसभा चुनाव में लगभग 6% वोट मिले, लेकिन भाजपा 2019 लोकसभा चुनावों में 3.3% पर आ गई।
स्टालिन DMK के सीएम पद का चेहरा
करुणानिधि की मौत के बाद DMK में भी फूट की आशंका जताई जा रही थी, लेकिन फिलहाल पार्टी में स्टालिन के नाम पर सब एकराय हैं। करुणानिधि की तीन पत्नियां थीं। पार्टी की कमान दूसरी पत्नी दयालु अम्माल के छोटे बेटे स्टालिन के पास है। उनके सगे बड़े भाई अलागिरी को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया जा चुका है। तीसरी पत्नी रजति अम्माल की बेटी कनिमोझी और दूसरे सदस्य स्टालिन के साथ ही हैं। युवाओं में जबरदस्त घुसपैठ वाले स्टालिन के फिल्म स्टार बेटे उदयनिधि, राजनीति का सबसे नया उभरता चेहरा हैं।

आज माघ पूर्णिमा है। इस दिन तमिलनाडु में मदुरै क्षेत्र में फ्लोट फेस्टिवल मनाया जाता है। जहां भगवान सुन्देश्वरा और मीनाक्षी की मूर्तियों को मारियामन टेपकुलम सरोवर में स्नान के लिए ले जाया जाता है।
पिछले विधानसभा चुनावों में डीएमके को महज 94 सीट मिली थीं, लेकिन 2019 के लोकसभा के विधानसभा वार जीत नतीजे देखें तो डीएमके-कांग्रेस गठबंधन को 234 में से 187 सीटों पर बढ़त हासिल हुई। 2016 विधानसभा चुनाव में DMK-कांग्रेस गठबंधन में लड़ी थी। कांग्रेस 50 में से केवल 8 सीट ही जीत पाई। पिछली हार का हवाला देकर DMK इस बार कांग्रेस को आधी सीटों पर लड़ने के लिए कह रही है।
कमल हासन अकेले पड़े
रजनीकांत के राजनीति में आने की घोषणा के बाद समझा जा रहा था कि वे कमल हासन के साथ मिलकर राजनीति में बड़ा उलटफेर कर सकते हैं, लेकिन दिसंबर 2020 में अचानक उन्होंने पांव पीछे खींच लिए। कमल हासन फिलहाल अपनी पार्टी मक्कल नीधि मय्यम (एमएनएम) के चुनाव चिन्ह टॉर्च के साथ चुनावी गलियारे में अकेले रास्ता तलाशते नजर आ रहे हैं।

90 करोड़ की लागत से चेन्नई में मरीना बीच पर बना जयललिता मेमोरियल। जिसका उद्घाटन एक महीना पहले किया गया है।
छोटी पार्टियां भी ले जाती हैं 20% तक वोट
कैडर बेस्ड पार्टी होने के कारण AIADMK और DMK के पास 20-25% स्थायी वोट बैंक है, लेकिन छोटी पार्टियां जैसे पीएमके, वीसीके, एमडीएमके और केएमपी और मुस्लिम लीग कम्युनिस्ट पार्टी का भी तमिलनाडु के अलग-अलग इलाकों में वर्चस्व है। हर विधानसभा चुनाव में यह पार्टियां मिलकर 20% तक वोट हासिल कर लेती हैं।
मुख्यमंत्री हो या पार्टी प्रमुख, सब देते हैं आवेदन
तमिलनाडु की प्रमुख स्थानीय पार्टियों में चाहे कोई कितने भी बड़े पद पर हो उसे पार्टी के आगे चुनाव लड़ने का आवेदन देना ही होता है। चाहे मुख्यमंत्री क्यों ना हो। स्टालिन जैसा ताकतवर पार्टी प्रमुख या उनका बेटा उदयनिधि भी यदि टिकट चाहते हैं तो उन्हें औपचारिक आवेदन करना होगा। पिछले 3 दिनों से चल रहे आवेदन प्रक्रिया में मुख्यमंत्री से लेकर उदयनिधि तक ने पार्टी कार्यालय में अपनी पसंदीदा सीट के लिए बायोडाटा जमा किया है





