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मतदाता सूची में भारी गड़बड़ी होने के आरोप लगा रही पार्टियां

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अरुण पटेल

 नगरीय निकाय चुनाव के लिए भाजपा, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी पूरे जोर-शोर से मैदान में कूदने की तैयारियां कर रही हैं। कांग्रेस ने प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर के नगर निगम महापौर पद के लिए अपना प्रत्याशी विधायक संजय शुक्ला को बना दिया है तो आम आदमी पार्टी ने कई नगरीय निकाय चुनाव के लिए अपने पार्षद पद के प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर दी है। भाजपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने बड़े पैमाने पर मतदाता सूचियों में गड़बड़ी का आरोप लगाया है। भले ही आरोपों के स्वर अलग-अलग हैं लेकिन एक केंद्रीय स्वर यह उभरा है कि मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां हुई हैं। इंदौर और भोपाल नगर निगम की मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां होने का आरोप लगा है। राज्य निर्वाचन आयोग इस मामले में आरोपों के घेरे में घिरता नजर आ रहा है क्योंकि मतदाता सूचियां सही बने यह देखने का दायित्व उसका ही है।
चुनाव की निष्पक्षता के लिए केवल निष्पक्ष होना ही काफी नहीं होता बल्कि लोगों को ऐसा एहसास भी होना चाहिए कि निष्पक्षता से कार्यवाही हो रही है । इन आरोपों की गंभीरता से जांच होना चाहिए । जो आपत्तियां उठाई जा रही है उनके समाधान कारक निराकरण के बिना अगर चुनाव होते हैं तो फिर उसकी निष्पक्षता के सामने सवालिया निशान लग जाएगा। राज्य चुनाव आयोग की साख को लेकर जो सवालिया निशान लग रहे हैं उनका अपना महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि आरोप लगाने वालों में विधानसभा के प्रोटेम स्पीकर, मंत्री, पूर्व मंत्री और विधायक शामिल हैं। अब देखने वाली बात यही होगी कि आयोग अपनी साख बनाए रखने के लिए क्या कदम उठाता है ? आयोग को यह देखना चाहिए कि मतदाता सूचियों में जो भी शिकायतें आई हैं उसका सत्यापन कराया जाए जैसी की मांग राज्य के राजनीतिक दल कर रहे हैं। प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में सवा लाख से अधिक फर्जी नाम शामिल है तो वहीं दूसरी ओर राजधानी भोपाल के नगर निगम की मतदाता सूची में एक लाख मतदाताओं के नाम जोड़े ही नहीं गए हैं और 50 हजार लोगों के नाम रिपीट हुए हैं। हर वार्ड में नए मतदाताओं के नाम जुड़ ही नहीं पाए हैं। इसके विपरीत कई लोगों के नाम दो से तीन बार तक मतदाता सूची में शामिल हैं। कांग्रेस के प्रदेश सचिव दिलीप कौशल ने फर्जी मतदाताओं के बारे में 1100 पेज में फर्जी नाम की प्रमाण सहित सूची आयोग को सौंपी थी और कौशल के अनुसार आयोग ने जांच कराने का आदेश दे दिए हैं। उनके अनुसार गड़बड़ियों का बड़ा कारण कारण यह है कि मतदाता सूचियों को 2015 के नगर निगम चुनाव की सूची को आधार मानते हुए बनाया गया है। इसका यह परिणाम हुआ कि 01 जनवरी 2021 को जो मतदाता 18 वर्ष के हुए हैं उनके नाम जुड़ ही नहीं पाए और यदि सही ढंग से इनमें सुधार नहीं हुआ तो युवा मतदाता मतदान से वंचित रह जाएंगे। भाजपा और कांग्रेस नेताओं ने आयोग से 2019 में हुए लोकसभा चुनाव के आधार पर मतदाता सूचियों में नाम जोड़ने की मांग की है।
राज्य विधानसभा के प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा का कहना है कि पिछले नगर निगम चुनाव की मतदाता सूची को आधार बनाया गया है और जरूरी है कि लोकसभा चुनाव की मतदाता सूची को आधार बनाकर घर-घर जाकर नाम नए सिरे से जोड़े जाना चाहिए। शिवराज सरकार के कैबिनेट मंत्री विश्वास सारंग का कहना है कि मतदाता सूची में गड़बड़ियां हैं। कहीं पर नाम रिपीट हो गए तो कहीं पर काट दिए गए। कई स्थानों पर मतदाताओं के नाम जुड़े ही नहीं इसलिए मतदाता सूची में सुधार जरूरी है। पूर्व मंत्री तथा कांग्रेस विधायक पीसी शर्मा ने कहा है कि 2019 के लोकसभा चुनाव के आधार पर ही मतदाता सूची तैयार होना चाहिए और हमने चुनाव आयोग को ज्ञापन दिया है। पूर्व मंत्री तथा भाजपा के निकाय चुनाव के लिए बनाए गए प्रदेश संयोजक उमाशंकर गुप्ता ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस के शासनकाल में फर्जी नाम जोड़ने के कारण गड़बड़ियां सामने आ रही हैं। एक सप्ताह तक दिन-रात मेहनत करने के बाद भी कार्यकर्ता सारी गड़बड़ियां नहीं पकड़ पाए हैं। उमाशंकर गुप्ता की प्रतिक्रिया पर पलटवार करते हुए प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री और चुनाव आयोग प्रभारी एडवोकेट जेपी धनोपिया ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस की कमलनाथ सरकार के 15 माह के कार्यकाल में मतदाता सूची संबंधी कोई कार्य नहीं हुआ था सारी गड़बड़ियां शिवराज सरकार के कार्यकाल की हैं और भाजपा नेताओं की हालत उल्टा चोर कोतवाल को डांटे जैसी है। धनोपिया ने कहा कि जो भी गड़बड़ियां सामने आ रही हैं और भाजपा के लोग षड्यंत्र कर कांग्रेस विचारधारा और समर्थक मतदाताओं के नाम कटवाना चाह रहे हैं। हमने चुनाव आयोग को ज्ञापन देकर मांग की है कि किसी मतदाता का नाम बिना सत्यापन के ना काटा जाए। यदि एक भी नाम बिना सत्यापन के काटा गया तो ठीक नहीं होगा। धनोपिया ने गंभीर आरोप लगाया कि भाजपा सरकार चुनाव टालने की कोशिश कर रही है। पार्टी ने आपत्तियों के लिए एक सप्ताह का और समय बढ़ाने की मांग की है तथा साथ में यह भी कहा है कि नगरीय निकाय चुनावों के साथ ही पंचायतों के चुनाव का कार्यक्रम भी घोषित किया जाए। चुनाव आयोग को ज्ञापन सौंपने वालों में धनोपिया के साथ ही पूर्व मंत्री व विधायक पीसी शर्मा, विधायक आरिफ मसूद, भोपाल की पूर्व महापौर विभा पटेल और भोपाल शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष कैलाश मिश्रा भी शामिल थे। प्रदेश कांग्रेस महामंत्री प्रभारी मीडिया विभाग केके मिश्रा ने कहा है कि मतदाता सूचियों में पाई जा रही विसंगतियों पर जब प्रत्येक राजनैतिक दल किसी न किसी रूप में उंगलियां उठा रहे हैं तब राज्य निर्वाचन आयोग को दिखाई देने वाले असरकारक कदम उठाना चाहिए ताकि की चुनाव पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से हो सके।

Ramswaroop Mantri

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