इंदौर में मालवा मिल-पाटनीपुरा मार्ग पर बना नया ब्रिज लोकार्पण के बाद से ही अपनी खामियों के कारण लोगों के बीच चर्चा में रहा है। ब्रिज ट्रैफिक के लिए मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के हाथों लोकार्पित हुआ और जब लोग चलने लगे तो उन्हें स्लैब और सड़क के गेप के कारण दचके लगने लगे। लोकार्पण के बाद शहर में तेज बारिश हुई और ब्रिज पर पानी भर गया। सोशल मीडिया पर यह खामियां वायरल होने लगी। फिर निगम ने उन खामियों को किश्तों में दूर किया,क्योकि इन खामियों को लेकर नगर निगम की किरकिरी हो रही थी। इसके बाद अफसरों ने ठेकेदार एजेंसी पर अधूरे काम को पूरा करने के लिए दबाव बनाया।छह दिन पहले ब्रिज के एक तरफ के हिस्से में बेरिकेड लगा दिए गए और गेप को सीमेंट से भरने की कोशिश की। यह काम चलते ट्रैफिक के बीच दिन में किया गया। इसके अलावा ब्रिज की जल निकासी के लिए फुटपाथ तोड़ दिया और नाली बनाई।
छह दिन पहले ब्रिज के एक तरफ के हिस्से में बेरिकेड लगा दिए गए और गेप को सीमेंट से भरने की कोशिश की। यह काम चलते ट्रैफिक के बीच दिन में किया गया। इसके अलावा ब्रिज की जल निकासी के लिए फुटपाथ तोड़ दिया और नाली बनाई, ताकि बारिश का पानी सीधे रैलिंग के नीचे से नाले में गिरे।
सीमेंट से गेप भरने का चलताऊ काम ज्यादा समय तक ट्रैफिक के सामने टिक नहीं पाया और फिर दचकों से वाहन चालकों को दो-चार होना पड़ा। आखिरकार निगम ने ब्रिज के दोनों हिस्सों में डामरीकरण कर दिया। जिस हिस्से में ब्रिज बना है, वहां दोनों तरफ की सड़कों को ढलान है। इसके चलते वहां वर्षाजल निकासी के लिए बड़ा चैंबर भी बनाया गया है।
आपको बता दें कि ब्रिज निर्माण के कारण आठ माह से पाटनीपुरा मार्ग बंद था। व्यापारियों का भी नगर निगम पर दबाव था कि वे दीपावली त्यौहार से पहले ब्रिज आवागमन के लिए खोलें। इस ब्रिज के निर्माण पर छह करोड़ रुपये खर्च हुए है। ब्रिज को छह लेन बनाया गया है।





