इंदौर
रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध का खामियाजा मध्यप्रदेश के दवा कारोबार को भुगतना पड़ रहा है। युद्ध लंबा खिंचा तो 771 मिलियन डॉलर यानी 5892 करोड़ रुपए की दवाओं का निर्यात प्रभावित हो सकता है। पीथमपुर स्थित फार्मा कंपनियों से दोनों देशों को सबसे ज्यादा दवाइयां भेजी जाती हैं। रूस को 590 मिलियन डॉलर यानी 4509 करोड़ रुपए और यूक्रेन को 181 मिलियन डॉलर यानी 1383 करोड़ रुपए का निर्यात किया जाता है।
प्रदेश के कुल 58 एक्सपोर्टर 60% कारोबार यूरोपीय देशों और रूस से ही करते हैं। इसमें फार्मा सेक्टर की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा 17 फीसदी है। फार्मा में मप्र से 95% निर्यात इंदौर रीजन से होता है। विश्लेषकों की मानें तो युद्ध के कारण रूस और यूक्रेन की करेंसी में भारी गिरावट आ रही है।
इस कारण यहां से पहले निर्यात हुआ माल वहां महंगे में बिक रहा है। साथ ही नए निर्यात को लेकर संकट पैदा हो सकता है। पहले कोविड ने फार्मा इंडस्ट्री को तोड़ा, अब युद्ध के कारण बढ़ी चिंता मप्र स्माॅल स्केल ड्रग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष हिमांशु शाह का कहना है कि पहले ही फार्मा सेक्टर की हालत कोविड महामारी के कारण बिगड़ी हुई थी।
चीन से व्यापारिक संबंध कम हो जाने या खत्म हो जाने की वजह से कंटेनर से जुड़ी समस्या सामने आ रही। बेसिक ड्रग भी चीन से नहीं मिल पा रहा। बेसिक ड्रग भारत में बनाए जाने की वजह से कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई, और दवाई की कीमत भी काफी बढ़ गई।
यूक्रेन की करेंसी में गिरावट आने की वजह से भारत से भेजा जा रहा माल और ज्यादा महंगा हो गया है। शाह ने यह भी संभावना जताई कि अगर रूस-यूक्रेन के बीच युद्ध लंबा खींचता है और यूक्रेन की मुद्रा ही खत्म हो जाती है तो यूक्रेन में होने वाला भारत का निर्यात काफी प्रभावित होगा।
निर्यात में हो रहा था इजाफा, अब स्थिति बिगड़ने का डर
- 228 मप्र में कुल फार्मा उद्योग
- 100 इंदौर में लघु उद्योग के यूनिट
- 60 इंदौर में SEZ के अंतर्गत आने वाली बड़ी यूनिट
- 20 से 25 हजार कुल कर्मचारी
- 6600 करोड़ रुपए का निवेश है इंदौर रीजन की सभी फार्मा इंडस्ट्री का।
- इंदौर के मुख्य क्षेत्र जहां फार्मा कंपनियां हैं- पीथमपुर, सांवेर, पोलोग्राउंड, राऊ और पालदा
फेडरेशन ऑफ मप्र चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष राधाशरण गोस्वामी ने बताया कि वर्ष 2019-20 के मुकाबले 2020-21 में भारत द्वारा यूक्रेन को किया गया निर्यात 43.65% बढ़ा है, वहीं रूस को किया गया निर्यात सिर्फ 6.95% बढ़ा है। ऐसे में देखा जाए तो यूक्रेन में भारत के फार्मा सेक्टर का कारोबार ज्यादा तेज गति से बढ़ा है, लेकिन युद्ध के कारण हालात बिगड़ सकते हैं। हालांकि भारत सरकार ने अभी रूस या यूक्रेन में निर्यात पर किसी भी प्रकार की रोक नहीं लगाई है।
ये दवाइयां हम बड़ी मात्रा में निर्यात करते हैं
- लोजेंसेज {कफ सिरप
- एंटीबायोटिक दवाई
- चेस्ट इन्फेक्शन की दवाइयां
- डिसइनफेक्टेंट
पेमेंट होने में भी देरी हो रही
मालवा चैंबर ऑफ कॉमर्स के कार्यकारी अध्यक्ष वीरेंद्र पोरवाल ने सभी फार्मा कंपनियों की तरफ से सरकार को एक ज्ञापन दिया है। इसमें यह बताया है कि युद्ध के कारण जो माल भेज दिया गया है उसका पेमेंट मिलने में देर हो रही है।





