अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

लोगों का बौद्धिक स्तर पालतू पशुओं जैसा, अराजक लगती है मेरी बात 

Share

     (ध्यानतंत्र अधारित सम्भोगसिद्धि प्रकरण)

      डॉ. विकास मानव 

   लोगों का मानसिक, बौद्धिक स्तर पालतू पशुओं की तरह नितांत पिछड़ा हुआ है। इतना गिरा हुआ कि वे स्वयं अपनी गिरावट से ही प्रेम करने लगे हैं। वे चेतन दिखते हैं, हैं बिल्कुल जड़.

     ऐसे प्रगल्भ लोगों की महा भीड़ है, जो अपने को सबसे से ऊपर सिद्ध करने के लिए मेरे योग’ध्यान’सम्भोग-तंत्र के साधना क्षेत्र को गालियां देते रहते हैं। 

    ये लोग मात्र हमें गालियां नहीं देते, ऐसे लोग, देश और समाज की बात आ जाए तो ठीक इसी तरह की गालियाँ अपने देश और समाज को भी देते हैं। कोसने और गालियां देने का यह संस्कार उन्हें मूलत: अपनी ही नजर में गिरा देता है. वे अपने प्रचार-तंत्र से हमें कुचलकर और निर्वीय बनाकर हमारे ऊपर वर्चस्व कायम करना चाहते हैं। उन्हें बाहरी श्रृंखलाएं दिखाई देती हैं परंतु भीतरी नहीं। 

     यदि आपको मुक्त होना है तो उस समस्त ज्ञान व्यवस्था को परखना होगा और उन रज्जुओं को तोड़ते जाना होगा जो आपकी चेतना में डाली गई हैं। 

    मेरा लेखन और वक्तव्य बहुतों को अराजक लगता है। वे क्षुब्ध अनुभव करते हैं कि यह कहां एलियन आ गया जो पूर्व की, अब तक की हर चीज को तोड़ और बदल देता है। 

    मैं तोड़ता कुछ नहीं हूं। परिभाषाएं बदलता हूं चीजों को सही रोशनी में प्रस्तुत करता हूं और उसके बाद निर्णय उन्ही पर छोड़ देता हूं कि वे पहले की मान्यताओं और हमारी स्थापनाओं को सामने रखकर तुलना करें कि दोनों में सही क्या है? प्रमाणिक क्या है? किसे स्वीकार करना होगा? 

       मैं आपकी चेतना में असंख्य रज्जुओं को तोड़ने का प्रयत्न करता हूं जिनको आपको स्वयं तोड़ना था। दुख की बात यह है कि यह काम  हमारे पूर्ववर्ती विद्वानों ने भी नहीं किया जिनकी महिमा के सामने हम नतशिर हुआ करते हैं। 

   आप मुझे उपयोगी समझते हो तो पढ़ें। मेरी ऊर्जा संभाल सकते हैं तो लें. जितना ग्रहण कर सकते हैं करें. अन्यथा उपेक्षा कर जाएं। 

आइए सत्संग यानी सत्य का संग करते हैं :

    ऋषभ और ऋषि एक ही धातु से उत्पन्न होने से ऋषि अर्थात् ’रे’ होने से ’रेतस्’ -ऋषभ अर्थात् ’काम’ हो जाता है जो संतति का कारक है। 

    रेतस्’ से ’ऊर्ध्व’ अर्थात् वृषभारूढ वह है जिसने ’काम’ को वश में कर रखा है। इसलिए उसे ऊर्ध्वरेतस्, ऊर्ध्वरेता कहा जाता है तथा उसे पशुपति शिव के रूप में देखा जाता है। लोक में भी वृषभ की पीठ पर स्थित पिंड को देखकर भी इस तथ्य को सरलता से समझा जा सकता है। 

     ब्रह्मचर्य काम -ऊर्जा का विरोध नहीं है,बल्कि इसका ट्रांसफॉर्मेशन है। नीचे की तरफ बह जाना काम ऊर्जा का अधोगमन है। ब्रम्हचर्य ऊर्जा का ऊर्ध्वगमन है, ऊपर की तरफ उठ जाना है। मैं दो घण्टे नॉन स्टॉप सेक्स करता हूँ या एक रात में एक-एक घण्टे का सात राउंड देता हूँ. ‘एक’ ले या ‘सात’ मिलकर लें. यह क्षमता किस मेडिसिन से मिलती है? दुनिया का कौन- सा इंसान इतना कर सकता है? बताएँ, प्रूव करें और बीस लाख तक का इनाम लें.

     अपनी बिल में दुबके रहकर किसी को गरियाना आसान है. औकात है तो सामने आकर, अपनी पत्नी, बहन, बेटी को प्रस्तुत कर आज़माएँ. 

     पुरुष का ऊर्जा केंद्र मूलाधार है जबकि स्त्री का केंद्र ह्दय प्रधान है। पुरुष को मूलाधार से ऊर्जा उठा कर ह्रदयगामी बनना होता है। जबकि स्त्री को और गहरे ह्दय में ही ठहराव करना पड़ता है। 

    मूलाधार ऊर्जा जब पुरुष के आगे के भाग से उपर उठती है तब संसार की माया पैदा करती है। आगे से उपर उठने वाली कुंडलिनी ऊर्जा पुरुष प्रधान होती है। 

    जब काम के रूप में बहती है तो काम सुख कहलाती है और जब मूलाधार ऊर्जा पीछे रीढ़ से उपर उर्ध्गमन होती है तो उसे सूक्ष्म जगत की यात्रा होती है।

     जब मूलाधार ऊर्जा आगे से उपर उठती है तब वह दस प्रकार की प्रकृति बनाती है – काम ,क्रोध, मोह ,लोभ इत्यादि। 

    आपकी जो गति सीमा है, उससे कई जन्मो तक प्रयास करते रहिए, परंतु आगे से जो ऊर्जा उपर उठती है ;उसमे संसारी के गुण ही प्रकट होंगे।

    जब ऊर्जा पीछे से उर्द्ध्गमन होगी तब देव तत्व ,देव गुण विकसित होते है। पीछे से ऊर्जा सूक्ष्म रूप में उठती है और काम और अर्थ के लिए ऊर्जा जड़ता के रूप में उठती और बहती है। 

     अधिकतर लोग अर्थ , प्रसिद्धि , हवसवृत्ति पाने के लिए योग ,अध्यात्म ध्यान में प्रवेश पाना चाहते है। ध्यानयोगगतंत्र के सम्भोग का मार्ग संसार पाने के लिए नही, संसार से मुक्त होने का मार्ग है. मेरे से मिक्स हुई लड़की, स्त्री खुद कहती है : स्वर्ग मिला और भगवान भी. अब और कुछ नहीं चाहिए. इसलिए कि, और कुछ बचा ही नहीं. ‘सार’ मिल गया. ‘असार’ का क्या करना.

Ramswaroop Mantri

Recent posts

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें