यूपी विधानसभा में विपक्ष के नेता और सपा विधायक माता प्रसाद पांडे ने शनिवार को कहा कि पुलिस ने उन्हें और समाजवादी पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल को बरेली जाने से रोक दिया। पांडे के आवास के बाहर स्थानीय पुलिसकर्मी तैनात हैं। माता प्रसाद पांडे के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल शनिवार 4 अक्टूबर को बरेली जाने वाला था। पांडे ने कहा कि पुलिस ने उन्हें एक नोटिस दिया है जिसमें उन्हें घर पर ही रहने और बरेली न जाने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने कहा कि “मेरे नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल वहाँ (बरेली) जा रहा था। मुझे पुलिस ने एक नोटिस दिया था, और इंस्पेक्टर ने मुझसे कहा था कि मुझे घर पर ही रहना है और बाहर नहीं जाना है। अगर कलेक्टर ने लिखा होता, तो मैं उसे स्वीकार कर लेता। फिर, बरेली के डीएम का एक पत्र आया। उन्होंने यह भी कहा कि आपके आने से यहाँ का माहौल खराब होगा, इसलिए आपको यहाँ नहीं आना चाहिए। अपनी कमियों को छिपाने के लिए, वे हमें वहाँ नहीं जाने दे रहे हैं। अब हम अपनी पार्टी के सदस्यों से बात करेंगे और उसके अनुसार निर्णय लेंगे।”
इस बीच, ‘आई लव मुहम्मद’ के जवाब में ‘आई लव महादेव’ के नारों-पोस्टरों पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का बयान आया है। उन्होंने एक समाचार एजंसी से बातचीत में कहा कि यह जनता का ध्यान वास्तविक मुद्दों से भटकाने की सोची-समझी साजिश है। उन्होंने यह भी कहा कि महादेव पूजा के विषय हैं या प्रेम के? यह महादेव का अपमान है। उन्होंने कहा कि आई लव मुहम्मद के बारे में उन्हें नहीं पता। इस बारे में मुस्लिम बेहतर जानते हैं कि वह सही हैं या गलत।
बरेली में स्थिति तनावपूर्ण है, जहां 26 सितंबर को “आई लव मोहम्मद” पोस्टरों को लेकर विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गए थे। गिरफ्तारियों के बाद वहां तनाव बढ़ गया है। बरेली प्रशासन ने 2 अक्टूबर दोपहर 3 बजे से 4 अक्टूबर दोपहर 3 बजे तक 48 घंटे के लिए मोबाइल इंटरनेट और ब्रॉडबैंड सेवाएं निलंबित कर रखी हैं।
आई लव विवाद कानपुर से बारावफात के मौके पर शुरू हुआ था। वहां मुस्लिम संगठन ने आई लव मुहम्मद का बैनर लगाया। इस पर हिन्दू संगठनों ने पुलिस में शिकायत दी कि यह नई शुरुआत है। इसे रोका जाए। इसके बाद उस बैनर को फाड़ दिया गया। कानपुर पुलिस से इसकी शिकायत की गई। पुलिस ने कहा कि ऐसी नई शुरुआत नहीं की जा सकती। इसके बाद मुस्लिम युवकों पर हिन्दू संगठन के पोस्टर फाड़ने का आरोप लगाकर एफआईआर दर्ज कराई गई। पुलिस ने उन युवकों की गिरफ्तारी की, उनका वीडियो सोशल मीडिया पर डाला गया, जिसमें मुस्लिम युवकों को ठीक से चलता-फिरता नहीं दिखाया गया था। इसके खिलाफ सोशल मीडिया पर आक्रोश भड़क उठा। लोगों ने लिखना शुरू कर दिया कि आई लव मुहम्मद कहना, लिखना, बोलना कोई अपराध नहीं। पूरे देश में सड़कों पर प्रदर्शन शुरू हो गए। विदेशों में भी प्रतिक्रिया हुई। उसी कड़ी में 26 सितंबर को बरेली में भी प्रदर्शन आयोजित किया गया था।





