–सुसंस्कृति परिहार
सदन में निशिकांत दुबे ने जो विचार संसद में रखें हैं वे इस सरकार के मन की बात है।वह नहीं चाहती कि प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी को जो सदन पर भारी पड़ रहे हैं,सदन में विपक्ष का नेतृत्व करें। इसलिए संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू इसकी तैयारी में लग गए हैं। विशेष मोशन के तहत उन्हें सदन से बाहर देखने व्यग्र हैं तथा झूठ बोलकर बिरला के आफिस का वीडियो दिखा रहे हैं जिसमें गाली गलौज का जिक्र करते हुए उन्हें शर्म नहीं आ रही है।उस वीडियो में कहीं भी गाली नहीं दी गई है।
हम सभी जानते हैं राहुल गांधी को एक बार निचली अदालत के ज़रिए सदन से बाहर कर दिया गया बाद में केस जीतकर वे वापस लौट आए थे। इसलिए इस बार सदन में भाजपा अपने बहुमत के आधार पर उन्हें बाहर करना चाहती है।
आखिरकार राहुल गांधी का दोष क्या है यह कि उन्होंने स्पीकर ओम बिरला के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव लाया जो उन्हें बोलने नहीं देते थे? हालांकि इस प्रस्ताव पर 118 सदस्यों के हस्ताक्षर में राहुल गांधी शामिल नहीं है।
दूसरा कारण ये हो सकता है कि कांग्रेस की महिला सांसदों ने देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल जी के ख़िलाफ़ अपशब्द बोलने पर पीएम की कुर्सी पर चढ़कर विरोध दर्ज कराया।जबकि वे स्वप्रेरित होकर वहां पहुंची थीं। राहुल कतई दोषी नहीं है।
तीसरी बात पूर्व सेनाध्यक्ष नरवणे जी की पुस्तक का वह खुलासा जिसे राहुल गांधी ने सार्वजनिक किया। जिसमें रक्षामंत्री और प्रधानमंत्री के आदेश की प्रतीक्षा में ‘जो उचित समझो करो’ कहा गया।यह अनुचित है भारतीय सेना अपने रक्षामंत्री और प्रधानमंत्री के आदेश से युद्ध करती है। विदित हो दूसरे दिन प्रधानमंत्री को राहुल गांधी पुस्तक भेंट करना चाहते थे पर पीएम सदन नहीं आए।
इसके अलावा जो सबसे बड़ा चुभन देने वाला सवाल था वह एपस्टीन मामला था जिसमें पीएम, उनके मंत्री हरदीप सिंह पुरी और मित्र अनिल अंबानी के नाम आए थे उस पर हंगामा हुआ। लेकिन इसके बाद टेड टेरिफ में कटौती होने का जश्न । ट्रेड डील से भारतीय किसानो के साथ छलावा।जैसे महत्वपूर्ण सवाल आते रहे।
और सबसे महत्वपूर्ण तो वह भाषण रहा जब ओम बिरला की अनुपस्थिति में ,जगदंबिका पाल की अध्यक्षता में हल्के विरोध के चलते सदन में राहुल गांधी ने लगभग सभी बातें डिटेल में सदन के सामने रख दीं भाजपाई सुनते रह गए।देश और विदेश से उस भाषण को सराहा गया।यही सबसे बड़ी चोट ओम बिरला के जाने से भाजपा को लगी।
यही वजह है कि वे अब कांटे को निकालने आतुर हैं। इसमें कम ही उम्मीद है कि राहुल गांधी बच पाएंगे।
किंतु,यह सच है और सुनिश्चित है राहुल को यदि निकाला जाता है तो वे आग का गोला बन भाजपा को दहला सकते हैं।देश भर में उनका जो मान सम्मान बढ़ा है।उसका खामियाजा सरकार को भुगतना ही होगा। क्योंकि उनके सदन में उठाए सभी सवाल देश हितैषी रहे हैं।वे ऐसे पहले प्रतिपक्ष नेता हैं जिन्होंने निर्भय होकर संविधान विरोधियों और देश गिरवी रखने वाले, अमरीकी राष्ट्रपति के आगे सरेंडर करने वाले पीएम के खिलाफ जबरदस्त आवाज़ उठाई है।जिसे जेल जाने और मार दिए जाने से डर नहीं लगता।उसका यह सरकार कितना दमन करेगी? लोकतंत्र ज़िंदा हो रहा है तानाशाहों का अंत सुनिश्चित है।






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