रामकिशोर मेहता
राजा चिंतित है,
विचलित है प्रजा।
सामने दिखाई दे रही समस्या
गम्भीर है।
समाधान आसान नहीं है।
राजा की आज्ञा है
‘ इस लकीर को
छोटा करना है।’
बुलाया जाता है
देश के
बुद्धिमानों / विद्वानों
का सम्मेलन।
सम्मेलन में प्रश्न उठता है
“लकीर कहाँ है?”
एक बिजली सी कौंधती है।
प्रजा को
कुछ दिखाई नहीं पड़ता।
विद्वान चीख उठते है
“यूरेका”
लो हो गई
समस्या हल।
समझा देते हैं राजा को
कि प्रजा को
समस्या का
दिख जाना ही तो
असली समस्या है।





