शशिकांत गुप्ते
राधेश्यामजी ने सीतारामजी पूछा आपने सुना है? ऊपर वाले की लाठी में आवाज नहीं होता?
सीतारामजी ने प्रति प्रश्न किया आवाज होता ही नहीं है तो कैसे सुनाई देगा?
राधयेशामजी ने कहा मज़ाक छोड़ो सच में ऊपरवाला कोई है? जिसकी लाठी में आवाज नहीं होता है?
सीतारामजी ने कहा ऊपरवाले की अदालत के बारें में जरूर सुना है। कहतें हैं,जहाँ सिर्फ और सिर्फ न्याय होता है। सामान्यज्ञान की बात है,जो न्याय करने वाला होगा वह बगैर आवाज की भी लाठी (Silencer Stick) कैसे और क्यों चलाएगा?
राधेश्यामजी तर्क प्रस्तुत किया सम्भवतः ऊपरवाला जो भी कोई है,निष्पक्ष न्याय करने वाला है,इसलिए silencer युक्त लाठी का प्रयोग करता होगा?
सीतारामजी अपनी वाली पर आगए,कहने लगे कल्पनालोक की उड़ान भरना छोड़ो, जमीन पर देखो। जमीनी हक़ीक़त देखेंगे तो, दिमाग के सारे तार छिन्न-भिन्न हो जाएंगे।
ऊपरवाला और ऊपरवाली अदालत का चमत्कार सिर्फ फिल्मों में ही दिखाया जाता है।
हक़ीक़त में तो अदालत की कार्यवाही की प्रक्रिया को
लांघकर रंगकर्मियों और सजगपरहरियों को हवालात में ही अर्धनग्न कर दिया है।
सम्भवतः क़ानूनव्यवस्था संभालने वालो को रँगकर्मियों और सजगपरहरियों पर रहम आ गया होगा? बेचारे भीषण गर्मी में भी परेशान हो रहे होंगे और गुनगुना रहे होंगे।
सच्चाई छुप नहीं सकती बनावटी उसूलों से
खुशबू आ नहीं सकती कभी कागज की फूलों से
बेचारे उक्त पंक्तिया गुनगुनाते हुए,गर्मी से त्रस्त हो रहे होंगे?
इसीलिए उन्हें गर्मी से राहत देने के लिए उनके कपड़े उतरवा लिए होंगे। इसे सज़ा समझना ग़लत है।
क़ानूनव्यवस्था संभालने वाले कितने उदारमना हैं, यह स्तुति का विषय है।
यदि वे रँगकर्मियो और सजगपरहरियों पर आरोप दर्ज करते? आरोप को सिद्ध करने की प्रक्रिया पूर्ण कर उन्हें अपराधी साबित करने के लिए न्यायालय में ले जातें?
न्यायालयीन प्रक्रिया बहुत लंबी चलती, निचली अदालत, उच्च न्यायालय, और सर्वोच्च न्यायालय तक मुकदमा चलता।
आरोपियों का कितना समय जाया हो सकता है। आर्थिक हानि भी हो सकती है।
कानूनव्यवस्था संभालने वालों ने उपर्युक्त प्रक्रिया से आरोपियों को बचाया है।
ऐसे उदारमना क़ानूनव्यवस्था संभालने वालों को तो पुरस्कृत करना चाहिए।
इसे निरंकुशता समझना ग़लत है।
यही तो है।
Minimum Government Maximum Governance
कम से कम सरकार और ज्यादा से ज्यादा शासन।
शशिकांत गुप्ते इंदौर





