क्रांति कुमार
गंगा बाई से मन भर गया. बुढ़ापे में भी जवानी हिचकोले मारने लगी. एक दिन नज़र सत्यवती पर पड़ी, बेटी के उम्र की थी आशीर्वाद देकर आगे बढ़ा जा सकता था !
लेकिन शांतनु की वासना जाग उठी, उसे दिन रात सिर्फ सत्यवती का शरीर नज़र आने लगा. प्रजा भुखी थी, राज्य का कामकाज कुछ ठीक नही चल रहा था. शांतनु अपनी वासना की दुनिया में खोया हुआ था !
सुबह होते ही उसने सत्यवती से निवेदन किया क्या तुम मुझसे विवाह करोगी. सत्यवती बड़ी बुद्धिमान महिला थी, उसने कहा.. हे राजन सीधे सीधे क्यों नही कहते तुम्हे मेरा शरीर का भोग लगाना है.. इतना घुमा फिराकर कहने की क्या जरुरत है… करुँगी विवाह लेकिन मेरी एक शर्त है, मेरी कोख से जन्मा बालक ही हस्तिनापुर का उत्तराधिकारी होगा. शांतनु बीच मझधार में फंस गया !
भीष्म ने कहा हे पिता क्यों एक मामूली सत्यवती के लिए व्याकुल हो, आपके हरेम महल में एक से एक टन टन टका टक महिलाएं हैं. शांतनु ने कहा आंखें अटक गई हैं सत्यवती के शरीर के लिए काश तुम आज्ञाकारी पुत्र होते ?
भीष्म ने आज्ञाकारी पुत्र का दायित्व निभाते हुए आजीवन अविवाहित रहने की प्रतिज्ञा ली. पुरे राज्य में आज्ञाकारी पुत्र की जय जय कार होने लगी. आज्ञाकारी का अर्थ है तर्क नही कोई सवाल नही, बस आज्ञा का पालन करो. ब्राह्मण धर्म और पितृसत्ता आज्ञाकार होने के सिद्धांत पर टिकी है !
सदियों से भारतीय पुत्र आज्ञाकारी पुत्र होने का भारी बोझ उठाते आ रहे हैं. पिता बच्चों को पिटता है, बच्चे माता पिता पर निर्भर हैं मजबूरी में मार खा लेते हैं. हर मार पिता पुत्र के बीच के प्रेम को खत्म करती है !
पिता चाहता है बेटा पढ़ाई लिखाई शादि नौकरी हर काम उससे पूछकर करे, येही आज्ञाकारी पुत्र का कर्तव्य है. पुत्र पैदा कियें हो या ग़ुलाम. पिता बच्चों को तैरना सीखा सकते हैं लेकिन कितनी घहराई में तैरना है कितनी दूर तैरना है कब किधर तैरना है इसका निर्णय सिर्फ पुत्र कर सकता है !
हमने घर के भीतर दमन शोषण करने के कई तरकीबें इजाद कर रखी हैं. पिता का काम सुझाव देना है आदेश नही. क्या पढ़ना है क्या बनना है किससे विवाह करना है इसका निर्णय करने का अधिकार सिर्फ पुत्र को है !
बच्चों को पीटकर अपना आने वाला भविष्य ख़राब मत करो. हिंसा का जबाब हिंसा है, प्रेम स्नेह का जबाब प्रेम और स्नेह है !
इन्ही आज्ञाकारी पुत्रों के कारण भारत में कभी कोई क्रांति नही हुई. अहंकारी पिता और आज्ञाकारी पुत्रों की संख्या ओबीसी एससी समाज में ज्यादा है !
Kranti Kumar





