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नैनीताल में जघन्य बलात्कार : फिर बलात्कारी को बचाने की कोशिश 

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✍️ दिव्या गुप्ता, दिल्ली

 30 अप्रैल को उत्तराखण्ड के नैनीताल से जब एक 12 वर्षीय बच्ची के 65 वर्षीय अधेड़ उम्र के व्यक्ति द्वारा बालात्कार की घटना सामने आती है तो इस बार भी अपराधी को सज़ा देने के सवाल को तिलांजलि देते हुए फ़ासीवादी गुण्डे इस मसले का इस्तेमाल करके पूरे इलाक़े में साम्प्रदायिक उन्माद भड़काने में जुट गए। 

बलात्कार की घटना के ख़िलाफ़ जहाँ एक तरफ़ नैनीताल की जनता बच्ची के लिए न्याय माँगते हुए सड़कों पर उतर रही थी वहीं दूसरी तरफ भाजपा और आरएसएस के लोग स्त्री-विरोधी और मुस्लिम-विरोधी नारे लगाते हुए सड़कों पर हिंसा को अंज़ाम दे रहे थे। ख़ैर, इन गुण्डा तत्वों से किसी और चीज़ की अपेक्षा करना हमारी मूर्खता होगी!!

    इस उन्मादी माहौल के बीच जब इलाक़े की एक हिन्दू महिला शैला नेगी इन संघी गुण्डों की महिला-विरोधी और नफ़रती राजनीति पर सवाल करती है और बहादुरी से साम्प्रदायिक भीड़ का मुक़ाबला करती है तो फ़ासीवादी भीड़ अपना असल रंग दिखाते हुए उसे डराते और धमकाते हैं, उस महिला के पिता से उनका धर्म पूछा जाता है और उन्हें पाकिस्तान जाने को कहा जाता है। 

     उन्मादी भीड़ सिर्फ़ यहीं तक नहीं रुकते हैं बल्कि अपने आईटी सेल और मीडिया प्रचार के ज़रिये शैला को बलात्कार की धमकियाँ देने में लग जाते हैं।

      इसी तरह, बीते दिनों पहलगाम में हुए आतंकी हमले के दौरान जिस नौसेना अधिकारी की लाश और उसकी पत्नी की तस्वीरों के ज़रिए फ़ासीवादी देश को साम्प्रदायिकता की आग में झोंकने की पूरी ताक़त लगा रहे थे उसी नौसैनिक की पत्नी हिमांशी ने जब लोगों से कश्मीरियों और मुसलमानों को निशाना न बनाने और शान्ति क़ायम करने की अपील की, तो यह रक्तपिशाच वहाँ भी महिला-विरोधी हरकतें करने से नहीं चूके।

      पहलगाम हमले के बाद से ही इनका पूरा तंत्र आपदा को अपने लिए अवसर में तब्दील करने में लगा हुआ है और तमाम तरीक़ों से देश में हिन्दू-मुसलमान के नाम पर लोगों का क़त्लेआम और दंगा करने में जुट गया है। 

    सुरक्षा में चूक और “कश्मीर में सब कुछ सामान्य है” के हवाई दावों पर सवाल खड़ा न किया जाए, इसके लिए पहले से ही निर्मित नक़ली दुश्मन को संघियों द्वारा दोषी बताकर उनपर हमले शुरू कर दिये गये हैं और युद्धोन्माद भड़काया जा रहा है।

      हाल ही में संघियों द्वारा सड़कों पर पाकिस्तानी झण्डे चिपकाकर भी साम्प्रदायिक तनाव पैदा करने की कोशिशें की गयी और ऐसा ही एक मामला बंगाल से सामने आया जहाँ सनातनी एकता मंच के दो व्यक्तियों ने सार्वजनिक शौचालय में पाकिस्तान का झण्डा चिपकाया और साम्प्रदायिक उन्माद पैदा करने के उद्देश्य से भारत-विरोधी नारे भी लिखे।

      ग़ौरतलब है कि इन फ़ासीवादियों को न्याय से कभी कोई सरोकार नहीं रहता क्योंकि इनकी पूरी राजनीति और विचारधारा झूठ पर टिकी होती है जो हर समस्या के लिए ज़िम्मेदार एक नक़ली शत्रु खड़ा करती है जो कि आज हमारे देश में मुसलमान है या हर वह व्यक्ति जो फ़ासीवादी राजनीति के ख़िलाफ़ मुखर होकर बोलता है।

      आईआईटी बीएचयू में संघ परिवार के आईटी सेल के तीन व्यक्तियों द्वारा एक छात्रा से बालात्कार का मामला हो, प्रज्ज्वल रेवन्ना से लेकर कुलदीप सिंह सेंगर हो या फिर चिनमयानन्द, संघी बलात्कारियों और यौन उत्पीड़कों की फ़ेहरिस्त बहुत लम्बी है और पितृसत्तात्मक मानसिकता तो इनकी फ़ासीवादी राजनीति व विचारधारा का एक अहम अंग है।

       ऐसे में, इनके द्वारा स्त्रियों के लिए न्याय और सुरक्षा की बात करना न सिर्फ़ बेमानी है बल्कि घटिया मज़ाक है। नैनीताल की आम जनता और इन्साफ़पसन्द महिला शैला नेगी ने जब इनके दोहरे चरित्र को बेनक़ाब किया तो ये अपने असल असल रंग में आ गये!

       नैनीताल रेप मामले में पुलिस एवं प्रशासन का जो रवैया रहा है वह एक बार फिर यह साबित कर देता है कि राज्यसत्ता के हर अंग-उपांग में फ़ासीवादियों ने आन्तरिक तौर पर क़ब्ज़ा जमा लिया है और ऐसे में आज न्याय और इंसाफ़ भी सिर्फ़ किताब में लिखे हुए सुन्दर शब्द रह गये हैं।

        पहलगाम आतंकी हमले के बाद से ही कश्मीरियों पर जिस प्रकार पुलिस-प्रशासन की आड़ में संघियों ने हमले किये, वह यह स्पष्ट कर देता है की ये तमाम संस्थाएँ आज आवाम के विरुद्ध व साम्प्रदायिक फ़ासीवादियों के इशारे पर ही काम कर रही हैं।

Ramswaroop Mantri

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