गैंगस्टर सिर-मूंछ मुंडवाकर, हाथ जोड़कर खड़े हैं। अपने गुनाहों की माफी मांग रहे हैं। नसीहत दे रहे हैं कि बदमाशी में कुछ नहीं रखा, बर्बाद कर देगी, ढाबों पर बर्तन मांजने पड़ेंगे, छोड़ दीजिए।
007, 0029 जैसी खतरनाक गैंग के ये सरगना कभी मूछों को ताव देते थे, लग्जरी कारों का काफिला निकालते और ऑटोमैटिक हथियारों के वीडियो बनाकर अपनी बदमाशी की नुमाइश करते थे।
राजस्थान पुलिस ने पिछले 6 महीने में ऐसी 8 बड़ी गैंग का खात्मा किया है। इनके 200 से ज्यादा खूंखार बदमाशों को सलाखों में बंद कर दिया है।
007 गैंग : चार साल में जुड़े 300 से ज्यादा बदमाश, अब पूरी गैंग जेल में

लोहावट का राजाराम जो अपराध की दुनिया में राजू मांजू बना और 007 नाम से गैंग बनाई।
लोहावट (जोधपुर) के जम्भेश्वर नगर के राजू मांजू और श्यामलाल विश्नोई 2017 से पहले खेती-किसानी करते थे। जब पता लगा कि देश का सबसे बड़ा हाईवे प्रोजेक्ट भारत माला जोधपुर, पचपदरा, सांचौर, फलोदी, बीकानेर और नागौर जिले से होकर गुजरेगा। तो दोनों ने भारत माला प्रोजेक्ट के ठेकेदारों से वसूली के लिए 007 गैंग बनाई।
10 लाख करोड़ के इस प्रोजेक्ट में टेंडर लेने के लिए ठेकेदारों के बीच कॉम्पिटिशन चल रहा था। ऐसे में कुछ ठेकेदारों ने लोकल स्तर पर गुंडागर्दी करने वाले राजू मांजू को अपने साथ मिलाया। दूसरे ठेकेदारों को डरा धमका कर टेंडर नहीं लेने के लिए मजबूर किया। धीरे-धीरे नए लोगों को भी भर्ती कर लिया। गैंग के बदमाश ठेकेदारों के बीच विवाद को सुलझाने, धमकाने और वसूली के नाम पर लाखों रुपए वसूलते। कुछ ही समय में गैंग के हर मेंबर के पास लग्जरी कारें और ऑटोमेटिक हथियार आ गए।
लग्जरी गाड़ियों का काफिला, हथियार लहराते बदमाश
फायरिंग की रील बनाते हुए 007 गैंग का बदमाश हिस्ट्रीशीटर सुनील कावां। सीकर में हुए राजू ठेहट मर्डर में राजू मांजू गैंग ने ही सीकर तक हथियार पहुंचाए थे।
राजू को रील्स बनाने का शौक था। हथियारों और गाड़ियों के साथ वीडियो सोशल मीडिया पर डालने लगा। सोशल मीडिया पर उसने 007 गैंग के नाम से सैकड़ों पेज बनवाए। शादी और दूसरे कार्यक्रम में भाग लेने के लिए गैंग के मेंबर लग्जरी कारों के काफिले के साथ जाते थे। कुछ ही महीनों में 300 से ज्यादा युवा गैंग से जुड़ गए।
गोशाला खोलकर ब्लैक मनी को व्हाइट किया
गैंग के मुख्य सरगना राजू मांजू ने ब्लैक मनी को व्हाइट करने और खुद की रॉबिनहुड जैसी छवि बनाने के लिए लोहावट के शिवपुरी और जम्भेश्वर नगर में दो गोशालाएं खोलीं।
लेकिन असली काम वसूली के करोड़ों रुपए को गोशाला में दान दिखाकर व्हाइट मनी में बदलना था। भारत माला प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद वसूली का काम खत्म हुआ तो गैंग के बदमाश तस्करी में कूद गए। एमडी (ड्रग), अफीम और हथियारों की तस्करी शुरू कर दिया था। तस्करी का माल गोशालाओं में छिपाया जाता और वहां बैठकर मीटिंग होती थी।राजू मांजू ने जो गौशलाएं खोली। वसूली का पैसा ब्लैक से व्हाइट किया।
गैंग के 18 खूंखार बदमाश, जिनके खिलाफ 220 से ज्यादा मामले दर्ज
राजू मांजू (32 मामले), गणेशाराम विश्नोई (34 मामले) और श्यामलाल विश्नोई (17 मामले) दर्ज हैं। इनमें राजू मांजू लोहावट, गणेशाराम विश्नोई बालेसर और श्यामलाल भोजसर से गैंग को ऑपरेट कर रह थे। गैंग ने जोधपुर, बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर, नागौर, पाली, जालोर, सांचौर और फलोदी जिले में तस्करी का नेटवर्क बनाया। कुल 18 एक्टिव बदमाशों के खिलाफ अलग-अलग थानों में 220 से ज्यादा हत्या, लूट, फिरौती, अपहरण जैसे संगीन अपराधों के मामले दर्ज हो रखे थे। बदमाश पुलिस से बचने के लिए अपराध के बाद कर्नाटक के हुबली और महाराष्ट्र के पुणे जैसे शहरों में फरारी काटते थे।
ऐसे किया पुलिस ने 007 गैंग का सफाया

ग्रामीण पुलिस की डीएसटी टीम के एएसआई अमानाराम राठौड़। साधू के वेश में कई बार गैंग की रेकी की।
पुलिस ने साधु बनकर गौशाला में गैंग की रेकी की
एएसआई अमानाराम ने बताया कि गैंग के बदमाशों की लिस्ट बनाकर रेकी की तो पता लगा कि राजू मांजू और श्याम विश्नोई गौशाला मीटिंग करते हैं। यहीं गैंग के बाकी बदमाश आकर मिलते हैं। डीएसटी टीम के तीन पुलिसकर्मियों ने अपना हुलिया बदला और साधु के वेश में गौशाला में रहने लगे। पुलिसकर्मी गोसेवा करते हुए राजू मांजू और गैंग के बदमाशों की रेकी करते। यहीं से राजू मांजू के ठिकाने और उसकी करतूतों के सारे इनपुट पुलिस को मिले।

डीएसटी टीम के कमांडो भवानीराम ने गोशालाओं में सेवादार बनकर रेकी की और इनपुट निकाले।
2 महीने में 007 की पूरी गैंग को खत्म कर दिया
जोधपुर ग्रामीण एसपी धमेंद्र सिंह यादव ने बताया कि गैंग के खात्मे के लिए डीएसटी टीम को मुख्य बदमाशों के पीछे लगा दिया था। सबसे पहले टीम ने महज 2 महीने में ही 007 गैंग के मुख्य 19 बदमाशों को पकड़ कर जेल में डाला। फिर सरगना राजू मांजू पर शिकंजा कसने की तैयारी की। मार्च-अप्रैल महीने में मनीष शेखानी (27 मामले दर्ज), श्यामलाल विश्नोई (17 मामले दर्ज), हनुमान उर्फ लादेन (12 मामले दर्ज), गणेशराम विश्नोई (34 मामले दर्ज), श्रीराम मांजू (29 मामले दर्ज) सहित 19 बदमाश पकड़े जा चुके थे।

पुलिस के पास गैंग का पूरा चिट्ठा।
होटल में भीख मांगकर खाना पड़ा
पुलिस ने जब 007 गैंग के सभी बदमाशों को पकड़ लिया तो सरगना राजू मांजू पुलिस से छुपते हुए हर दिन ठिकाना बदलने लगा। कुछ दिनों में उसके पास पैसे भी खत्म हो गए। उसे एक रात को हाईवे पर एक ढ़ापे में बर्तन मांजने पड़े। तब जाकर होटल वाले ने उसे खाने के लिए खाना दिया।
साढ़े तीन किलो एमडी ड्रग के साथ पकड़ा गया मांजू
पुलिस को अचानक सूचना मिली कि राजू मांजू लोहावट के जम्भेश्वर नगर में छिपा है। यहां राजू मांजू अपने साथी राजेश सिहाग के साथ एक ढाणी में छिपा था। पुलिस आते देख वो बाइक पर अपने साथी के साथ भागने लगा। लेकिन बाइक रेतीले रास्तों में फंस गई। ऐसे में मांजू और राजेश पैदल भागने लगे। पुलिस ने करीब 2 किलोमीटर तक दोनों का पीछा कर 16 मार्च 2023 को दोनों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने राजू मांजू के पास से साढ़े तीन किलो एमडी ड्रग बरामद की थी।जोधपुर पुलिस की गिरफ्त में वांटेड हिस्ट्रीशीटर और 007 गैंग का सरगना राजू मांजू (सफेद शर्ट में)।
VIDEO में हाथ जोड़कर बोला- अपराधी मत बनना
राजू मांजू ने पकड़े के बाद जाने के बाद सोशल मीडिया पर अपना एक वीडियो डाला। उसने वीडियो में बताया कि हीरोगिरी चक्कर में उसने बदमाशी की। लेकिन पुलिस के खौफ में उसे दर-दर की ठोकरें खानी पड़ी। परिवार से दूर रहकर भीख तक मांगनी पड़ी। युवाओं की से अपील करते हुए कहा कि कोई भई अपराधी मत बनना, नहीं तो उनका भी हश्र हमारी तरह होगा।
0029 गैंग : हेड कांस्टेबल का बेटा, भंवरी कांड में जेल से बाहर आकर बनाई 100 बदमाशों की गैंग
राजस्थान पुलिस में हेड कॉन्स्टेबल का बेटा विशनाराम जांगू जिसने भंवरी देवी की लाश ठिकाने लगाई। एक लाख रुपए का ईनामी हिस्ट्रीशीटर 2 साल पहले जेल से जमानत पर बाहर आया था। उसने देखा कि राजू मांजू उसके गढ़ में 007 गैंग बनाकर करोड़ों की वसूली कर रहा है। इस पर विशनाराम अपने पुराने दोस्तों और जोधपुर जिले के टॉप अपराधियों से मिला।

लोहावटा थाना क्षेत्र के जालोड़ा गांव में रहने वाला विशनाराम करीब 15 साल पहले जमीन पर कब्जे का काम करता था।
करीब 100 लोगों को गैंग से जोड़ा और नाम 0029 गैंग रखा। गैंग के ज्यादातर बदमाश एमडी ड्रग और डोडा पोस्त की तस्करी करने लगे। विशनाराम के खिलाफ पहले 54 मामले दर्ज थे। जेल से बाहर आने के बाद दो साल में उसके खिलाफ 14 नए मामले दर्ज हुए। उसके खिलाफ 11 अगस्त को 1 लाख रुपए का इनाम भी घोषित हुआ था।
गाड़ियों के आगे लोहे की रोड़ लगाते ताकि टक्कर मारकर भाग सकें
विशनाराम की गैंग में हार्डकोर अपराधी ज्यादा थे, उनमें पुलिस से पकड़े जाने का भी खौफ नहीं था। पुलिस पर हमला करने से भी नहीं चूकते थे। ड्रग और हथियार तस्करी में वर्चस्व की लड़ाई के लिए गैंग के बदमाश मरने-मारने पर उतारू थे। बदमाशों ने अपनी गाड़ियों के आगे लोहे के भारी बम्पर लगा रखे थे। रात को तस्कर गाड़ियों में डोडा पोस्त सप्लाई करते थे।

विशनाराम गाड़ियों के आगे लोहे का बम्पर लगाकर रखता था फिर पुलिस की गाड़ियों को सामने आने पर टक्कर मार देता था।
अगर पुलिस नाकाबंदी में इन्हें रोकती तो ये अपनी गाड़ियों से टक्कर मार देते थे। लोहे के बम्पर से पुलिस की गाड़ी पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो जाती थी। बदमाशों को भागने का समय मिल जाता था। खुद विशनाराम तीन से चार बार पुलिस के साथ ऐसा कर चुका था।
गैंग के 17 बदमाशों के खिलाफ 327 मामले दर्ज
0029 गैंग के सरगना विशनाराम विश्नोई के खिलाफ 68 प्रकरण दर्ज हैं। उसकी गैंग में 17 हार्डकोर अपराधी हैं, जिनके खिलाफ 327 से ज्यादा लूट, हत्या, फिरोती, अपहरण जैसे संगीन अपराधों के मामले दर्ज हो रखे हैं। ओमप्रकाश जांगू के खिलाफ 46 मामले, अशोक जांगू पर 43 मामले, कैलाश जाखड़ के खिलाफ 43 मामले दर्ज हैं। मोरिया मुंजासर गांव का अनिल मांजू जिले के टॉप-10 बदमाशों में से एक है।विशनाराम चर्चित भंवरी हत्याकांड में 10 साल तक जेल में रहा। दो साल पहले ही जमानत पर बाहर आया था।
अंडमान निकोबार तक पहुंची जोधपुर पुलिस
विश्नाराम विश्नोई की गैंग को जहां भी पैसों की जरूरत पड़ती, पूनाराम उनकी मदद करता था। पूनाराम खुद हत्या के मामले में फरार चल रहा था। पुलिस ने गैंग की कमर तोड़ने के लिए सबसे पहले पूनाराम को पकड़ने का प्लान बनाया। पूनाराम फरारी काटने के लिए अंडमान निकोबार में जाकर छुपता था। पुलिस ने अपने मुखबिर बनाए और उन्हें अलर्ट किया कि जब भी पूनाराम अंडमान निकोबार आए वे पुलिस को सूचना कर दे।
गैंग के फाइनेंसर को एयरपोर्ट से पकड़ा
पुलिस के लगातार छापों को देख राजस्थान में छुपा पूनाराम एक बार फिर अंडमान-निकोबार की तरफ भागा। वहां पहुंचते ही पुलिस को इसकी सूचना मिल चुकी थी। पूनाराम को गिरफ्तार करने राजस्थान पुलिस की एक टीम अंडमान पहुंच गई। लेकिन इसकी भनक पूनाराम को लग गई। वो अंडमान से फ्लाइट पकड़कर कलकत्ता के लिए रवाना हो गया। लेकिन जोधपुर ग्रामीण पुलिस ने सीआरपीएफ की मदद से कलकत्ता एयरपोर्ट पर ही पूनाराम को 24 जुली को गिरफ्तार कर लिया।

19 अगस्त को विशानाराम को देचू के पास दयाकोर गांव से पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया।
अगस्त में 0029 गैंग के मुखिया को पकड़ा
007 गैंग का खात्म करने के बाद पुलिस ने 0029 गैंग के बदमाशों को पकड़ना शुरू किया। गैंग के फाइनेंसर पूनाराम को कलकत्ता एयरपोर्ट से कड़ने के बाद विशनाराम को 19 अगस्त को लोहावट क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अब गैंग के अन्य बदमाश अशोक जांगू और सुभाष विश्नोई की तलाश कर रही है।
दादागिरी करके मैंने मेरी जिंदगी खराब कर ली
सोशल मीडिया पर लग्जरी कारों से स्टंट दिखाने वाले और मूंछों पर ताव देने वाले विशनाराम को पुलिस ने पकड़ा तो ना मूंछ रही ना ही सिर पर बाल। विशनाराम ने पकड़ने जाने के बाद वीडियो में बताया कि उसने दादागिरी करके अपनी जिंदगी खराब कर ली। बदमाशी में जिंदगी के कई साल खराब कर दिए। जेलों में जिंदगी काटी। रेत के टीलों में छुपकर रातें गुजारी। मेरी सबसे अपील है कोई भी अपराध की दुनिया में मत आना।

हाथ जोड़कर नसीहत देते हुए विशनाराम।
वर्चस्व की लड़ाई को लेकर दोनों गैंग में दो बार हुई गैंगवार
007 और 0029 गैंग शुरू से ही वर्चस्व की लड़ाई चली आ रही थी। पहली बार 14 नवंबर 2021 को देचू थाना क्षेत्र के ठाडिया गांव में दिनेश खीचड़ के यहां शादी समारोह में लोहावट निवासी राजू मांजू व जालोड़ा निवासी विशनाराम जांगू अपने-अपने समर्थकों के साथ पहुंचे। दोनों के बीच पुरानी रंजिश के चलते गैंगवार शुरू हो गई। लड़ाई में कुछ लोग घायल हो गए। शादी समारोह में अफरा-तफरी मच गई। इसके बाद पुलिस ने एफआईआर 281, 282, 283 दर्ज कर एक दर्जन से ज्यादा बदमाशों को गिरफ्तार किया। 2022 में भी ऐसी ही एक गैंगवार फिर हुई।





