“क्विक कॉमर्स”, “30 मिनिट डिलीवरी”, “10 मिनिट डिलीवरी” : ये लफ़्ज़ हमारी ज़िंदगी में घुसपैठ करने की तैयारी में हैं..
★ पर 30 या 10 मिनिट में आप को समान क्यों चाहिए? 10/30 मिनिट में तो आप ख़ुद के घर के पास की दुकान से भी समान ख़रीद कर घर वापस नहीं आ सकते!! इतनी जल्दबाज़ी क्यों है?
◆ क्विक कॉमर्स एक बिज़नेस आईडिया से ज़्यादा एक “सनसनी”, “थ्रिल” है..पूरे खेल में समान की क्वालिटी, दाम में कोई फ़र्क़ नहीं है..आप को सिर्फ़ एक “नया एक्सपीरिएंस” दिया जा रहा है..
◆ पूरे खेल में करोड़ों डॉलर लगाए जा चुके हैं..क्विक कॉमर्स कंपनियों को 1₹ का फ़ाइदा नहीं है..पर डॉलर की बारिश हो रही है..
● अस्ल में नमक, तेल को करोड़ों के शॉपिंग मॉल में लाखों ₹ का किराया दे कर बेचना एक नाकामयाब मॉडल साबित हो चुका है..दुनियाभर की रिटेल कंपनियां ख़ुद का ख़र्च घटाने की क़वाइद में लगी हुई हैं..
● रिटेल कंपनियों का सब से बड़ा ख़र्च है : स्टॉक रखना, किराया, सैलरी, बिजली बिल..ऊपर से महंगाई और घटती हुई डिमांड..वैसे भी किराना व्यापार 5%-7% का धंधा है..
● अब रिटेल कंपनियां चाहती हैं कि एक शहर में 10 छोटे छोटे गोडाउन हो..इन गोदामों का किराया मॉल के बनिस्बत 10% है..हर गोडाउन में ‘इलाक़े के हिसाब से ज़्यादा स्टॉक रखने की भी ज़रूरत नहीं है..तो इन्वेस्टमेंट घटेगा..
● एम्प्लॉयी की सैलरी, बिजली, AC वग़ैरह का ख़र्च भी 70% घटेगा..मेंटेनेंस का ख़र्च भी 50% से ज़्यादा घटेगा..
★ या’नि एक “सनसनी” के साथ एक झटके में रिटेल कंपनियों का मुनाफ़ा कई गुना बढ़ जाएगा..पर अब तक ऐसा हो नहीं पाया है..ये भी अब तक एक बड़ी नाकामयाबी है..
★ क्विक कॉमर्स के फ़ाइदे हो सकते हैं पर मैं हरदम एक व्यापार के “डार्क साइड” को पहले समझना चाहता हूँ..मुझे इन्वेस्टमेंट की डाउनसाइड में साफ़ नज़रिया पसंद है..
★ क्विक कॉमर्स पूरी दुनिया में “असहाय इकॉनमी” बना रहा है जिसे इंग्लिश में “गिग इकॉनमी” कहा जाता है..”स्पीड” आर्थिक, सामाजिक और मानसिक शोषण का नया हथियार बनने जा रहा है..
रिटेल व्यापार की हिमायत करता हूँ..पर मैं तह ए दिल से चाहता हूँ कि “क्विक कॉमर्स का पागलपन” जल्द से जल्द नाकामयाब हो, ख़त्म हो..
क्विक कॉमर्स आने वाले दो सालों में लोकल व्यापार को तबाह कर देगा। ब्लिंकिट, ज़ेप्टो, इंस्टमार्ट ऑलरेडी बाजार में है एमेजॉन का तेज भी जल्दी लॉच होने वाला है। सबके डार्क स्टोर खुल रहे हैं। हमारे यहां पिछले महीने सिर्फ एक सेक्टर में ही ब्लिंकिट ने 9 करोड़ की सेल की है ये 9 करोड़ लोकल व्यापारियों की सेल को ही छीना गया है। धीरे धीरे बाजार तबाह होंगे।
तबाही ही मकसद है। गोवलकर जी ने कहा था कि 90 प्रतिशत जनता गरीब होगी तभी लंबे समय तक शासन किया जा सकता हैं। यहीं किया जा रहा है।





