*संजय गुप्ता*
ये बेहूदा सिस्टम…मंत्री का व्यथित होना और भोपाल की चुप्पी
स्मार्ट सिटी इंदौर, सफाई का सिरमौर और महागुरु। जश्न, उत्सव के बीच में एक घटना हुई। गड्ढे, इंदौर-देवास जाम, बारिश से बदहाल ट्रैफिक, ड्रग्स के बढ़ते कारोबार, सीमांकन-नामांतरण के लिए होती लाखों की मांग, एफआईआर के लिए थानों में परेशान होने की बात नहीं कर रहा हूं। यह तो चल रही है और चलती रहेगी अब इनकी इंदौरियों को आदत हो चुकी है।बात हो रही मप्र के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एमवायएच के एनआईसीयू में दो नवजात को चूहों द्वारा कुतरने और मौत होने की।… 40 लाख की आबादी के मेट्रो बनते इस शहर में बहुत ही मामूली घटना की।
इसी दौरान सिंधिया परिवार की तीसरी पीढ़ी महानआर्यमन सिंधिया ने एमपीसीए प्रेसीडेंट का पद संभाला। खूब जश्न मना, पोस्टर लगे। सबने एक-दूसरे को बधाई दी, जैसे उन सभी के घर का सदस्य पद पा गया है। फिर एक और घटना हुई महापौर के बेटे के भाषण की। हर नेता ने इस बहती गंगा में हाथ धोया कुछ अच्छे मन से कुछ तंज करने के लिए। महापौर के बेटे पर हमले को तो एक वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री ने तो अपने ही दिल पर लेते हुए लिखा कि आज हृदय बहुत व्यथित है… और भी बहुत लंबा मैसेज X पर डाला।
अब एमवाएय में जो दो नवजात की मौत हुई उनकी इन दो बड़ी घटनाओं के आगे बिसात ही क्या थी। बेहूदगी देखिए, डीन, अधीक्षक और जाने-माने डॉक्टर विभागाध्यक्ष एक के बाद एक झूठ बोलते रहे। कहा कि चूहों ने केवल कुतरा था, इससे मौत नहीं होती (जबकि चार उंगलियां पूरी खा गए चूहे)। फिर कलेक्टर को भी झूठ बोल दिया कि पीएम हो गया है। नेचुरल मौत हुई है। फिर साहब लोग बोले कि इन बच्चों को दो दुनिया का कोई भी अस्पताल और डॉक्टर बचा ही नहीं सकता था। यह आमजन की धारणा ही इन्होंने बदल दी कि धरती पर भगवान डॉक्टर का रूप होते हैं।
मोहन सरकार तो सुदर्शन चक्र चलाने के लिए जानी जाती है, फिर अभी तक जांच का ढोंग क्यों हो रहा है यह समझ के परे हैं। इस मौके पर शिवराज सिंह चौहान भी याद आते हैं, जिन्होंने भोपाल में शव की पलकों को चूहे द्वारा कुतरने पर अधिकारी और डीन दोनों को हटा दिया था, ना जांच ना कोई बात। अभी तक बेहूदगी और सिर्फ बेहूदगी देखी जा रही है। पहले कलेक्टर को अस्पताल भेजने की नौटंकी, फिर डीन और अधीक्षक द्वारा कुछ स्टाफ को हटाने की नौटंकी, फिर पेस्ट कंट्रोल वाली कंपनी से 1 करोड़ के मासिक ठेके से केवल 1 लाख प्रति माह के काम के ठेके को रद्द करने की नौटंकी, नवजात के लावारिस बताने की नौटंकी। ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस ने यह मुद्दा उठाया तो उसे कोई राजनीतिक लाभ नहीं मिले इसलिए इस पूरे मामले में टालमटोली की जा रही या फिर क्या वजह आर्थिक है। ठेका लेने वाली एचएलएल कंपनी और पेटी कांट्रेक्ट की एजाइल कंपनी का आपस में क्या रिश्ता है और इन कंपनियों के पीछे कौन है, क्यों सभी को बचाया जा रहा है।
काश राहुल जी आप इस घटना पर टिव्ट नहीं करते तो शायद कुछ कार्रवाई हो जाती। आपने इसे हादसा नहीं हत्या बता दिया। कुछ सख्त शब्द बोल दिए, अरे आप बिहार के चुनाव में लगे थे, वोट चोरी का मुद्दा उठा रहे थे, इस मामूली घटना में कूद गए। आप कुछ नहीं बोलते तो शायद सरकार कुछ कार्रवाई कर भी देती। अब सरकार तो आपको पप्पू मानती है और एक दल विशेष के लोग तो आपको मानसिक इलाज की जरूरत भी बता देते हैं, सही कहा बिहार चुनाव जैसे अहम मामले में आपको इंदौर के चूहे और नवजात की मौत याद कर रहे हैं तो यह मानसिक बीमारी ही कही जाएगी।
मंत्री जी इस घटना पर भी कभी व्यथित होईए कुछ तो बोलिए और कुछ तो करिए। केवल इंदौर के लिए मैं सीएम और किसी से भी लड़ने वाली बातों से कुछ नहीं होगा, इंदौर के लिए लड़ना भी होगा और खासकर उन नवजातों के लिए तो बोलिए जिन्होंने दस दिन भी दुनिया नहीं देखी और ना चूहों के कुतरने पर उन्हें हटा सके और ना कुछ बोल सके।
मां को गाली देने पर अभी देश में जमकर गुस्सा है, बिहार भी बंद हो चुका है। पीएम भी खुलकर बोल चुके हैं, बोलना भी चाहिए, हर जगह भगवान नहीं होता इसलिए उन्होंने मां को जमीन पर उतारा। लेकिन इन दो नवजातों की क्या गलती थी, क्या इस पर इंदौर और मप्र बंद नहीं होना चाहिए। चलो खत्म करते हैं यह बात, अब सभी के पोहे, समोसे, जलेबी खाने का समय हो चुका होगा।
धन्यवाद
*संजय गुप्ता*





