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रीवा पुलिस ट्रेनिंग स्कूल में प्रशिक्षणरत छह नव आरक्षकों की वर्दी में बनाई गई रील, सभी 6 ट्रेनी कॉन्‍स्‍टेबल को कारण बताओ नोटिस

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रीवा पुलिस ट्रेनिंग स्कूल में प्रशिक्षणरत छह नव आरक्षकों की वर्दी में बनाई गई रील सोशल मीडिया पर वायरल हो गई. डायलॉग में सरकारी नौकरी और वर्दी को लेकर आत्मव्यंग्य किया गया था. वीडियो पर विवाद बढ़ा तो मध्य प्रदेश पुलिस ने सभी को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया. अधिकारियों का कहना है कि वर्दी संस्थागत पहचान है. जवाब के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी.

मध्य प्रदेश पुलिस में एक वायरल रील ने अनुशासन और गरिमा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. पुलिस ट्रेनिंग स्कूल रीवा में प्रशिक्षण ले रहे छह नव आरक्षकों ने वर्दी पहनकर सोशल मीडिया पर एक रील बनाई. रील में सरकारी नौकरी और वर्दी को लेकर कुछ डायलॉग बोले गए. वीडियो तेजी से वायरल हुआ. इसके बाद विभाग ने इसे गंभीरता से लिया और तत्काल कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है. यह मामला सिर्फ एक रील तक सीमित नहीं रहा. इसने यह बहस भी छेड़ दी कि क्या वर्दी में व्यक्तिगत अभिव्यक्ति की कोई सीमा होनी चाहिए. पुलिस बल में प्रशिक्षण के दौरान अनुशासन सर्वोपरि माना जाता है. ऐसे में वर्दी में बनाए गए इस कंटेंट को विभागीय छवि से जोड़कर देखा गया. अधिकारियों का मानना है कि वर्दी किसी व्यक्ति की नहीं, बल्कि संस्था की पहचान होती है.

25 फरवरी 2026 को दोपहर करीब 3.04 बजे एक सोशल मीडिया ग्रुप पर यह रील पोस्ट हुई. वीडियो में छह ट्रेनी आरक्षक पूर्ण वर्दी में नजर आए. वे ट्रेंडिंग ऑडियो पर लिप सिंक कर रहे थे. डायलॉग में कहा गया कि शक्ल अच्छी नहीं तो क्या हुआ, सरकारी नौकरी तो है. पैसा नहीं तो मंथली आती है. कपड़े नहीं तो वर्दी है. कुछ घंटों में वीडियो हजारों व्यूज पार कर गया. बाद में यह इंस्टाग्राम और फेसबुक तक फैल गया. कई यूजर्स ने इसे मजाक बताया. वहीं बड़ी संख्या में लोगों ने इसे वर्दी की गरिमा से खिलवाड़ कहा.

सोशल मीडिया पर बंटी राय
वीडियो पर प्रतिक्रियाएं मिश्रित रहीं. कुछ लोगों ने लिखा कि रील बनाना गलत नहीं, पर वर्दी में ऐसा नहीं होना चाहिए. कई यूजर्स ने कहा कि ट्रेनिंग के दौरान अनुशासन सबसे अहम होता है. आलोचकों का तर्क था कि पुलिस की छवि जनता के भरोसे पर टिकी होती है. ऐसे में वर्दी को व्यक्तिगत हास्य का माध्यम बनाना गलत संदेश देता है. कुछ पूर्व पुलिस अधिकारियों ने भी डिजिटल एटिकेट पर सख्ती की जरूरत बताई.

विभागीय नियम क्या कहते हैं
पुलिस मुख्यालय स्तर पर सोशल मीडिया को लेकर स्पष्ट गाइडलाइन जारी हैं. वर्दी का उपयोग केवल आधिकारिक कार्यों के लिए किया जा सकता है. प्रशिक्षण संस्थानों में इस बारे में विशेष निर्देश दिए जाते हैं. रीवा PTS के एसपी सुरेंद्र कुमार जैन ने माना कि रील का टोन अनुशासित बल की छवि से मेल नहीं खाता. उन्होंने कहा कि वर्दी संस्थागत प्रतीक है. इसे निजी ब्रांडिंग या मनोरंजन के लिए उपयोग नहीं किया जा सकता.

छह ट्रेनी को कारण बताओ नोटिस
वीडियो सामने आने के बाद सभी छह नव आरक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया. नोटिस में स्पष्ट लिखा गया कि उनके कृत्य से विभाग की गरिमा प्रभावित हुई है. उनसे जवाब मांगा गया है कि अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों न की जाए? सूत्रों के अनुसार, जवाब के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी. इसमें प्रशिक्षण पर असर, दंड या अन्य विभागीय कदम शामिल हो सकते हैं. विभाग ने इसे जीरो टॉलरेंस का मामला बताया है.

रील विवाद, वर्दी सम्मान का प्रतीक
यह पहली बार नहीं है जब वर्दी में रील विवाद बना हो. देश के अलग अलग राज्यों में ऐसे मामले सामने आ चुके हैं. सोशल मीडिया की लोकप्रियता ने युवा कर्मियों के सामने नई चुनौती खड़ी की है. विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में डिजिटल व्यवहार पर अधिक जोर देना चाहिए. सरकारी नौकरी की स्थिरता के साथ जवाबदेही भी जुड़ी होती है. वर्दी सम्मान का प्रतीक है. छोटी चूक भी बड़े परिणाम ला सकती है.

Ramswaroop Mantri

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