● चंद्रशेखर शर्मा
अब धीरज फिजूल है। अफसोस कि बजरंगी इंदौर में पिट गए ! बहुत लोगों के ज्यादा अफसोस और खुशी का भी, एक मामला यह है कि भाजपा के राज में पिट गए ! अपन ने धीरज के साथ उम्मीद बांधी थी कि बजरंगी पिटने का तगड़ा पलटवार करेंगे। अफसोस कि बजरंगियों ने निराश किया।
इस मामले में पुलिस प्रशासन को माकूल जवाब बनता था ! ध्यान रहे, अपन किसी जाम या लोगों की परेशानी को बिलकुल खारिज नहीं करते। दुःख है कि बजरंगियों का बल उसमें भी फेल रहा ! अलबत्ता पलटवार हर सूरत बनता था !
इस मामले में अपन को याद आये प्रदेश के पूर्व शिक्षा मंत्री और इंदौर के लाड़ले नेता स्वर्गीय लक्ष्मणसिंह गौड़ ! उनका एक चर्चित किस्से का चर्चित डायलॉग था कि ‘कल कर्बला मैदान पर पचास हजार हिंदुओं का भंडारा होगा !’ बता दूं कि उन्होंने इंदौर के एक तत्कालीन तेजतर्रार कलेक्टर और कानूनविद को चैलेंज बतौर यह चेतावनी जारी की थी !
जब ये याद आया तो साथ में एक सवाल भी लाया ! जी हां, सवाल ये था कि इस शहर में वैसा ही या कैसा भी नेतृत्व नायक अब क्यों नहीं है ? असल बात तो यह कि इस शहर के मसलों पर मजबूत दखल दे सकने वाली लीडरशिप कहाँ है ? सिर्फ स्वर्गीय गौड़ नहीं, बल्कि इस शहर ने कांग्रेस के नेता स्वर्गीय महेश जोशी और पंडित कृपाशंकर शुक्ला का दौर देखा है। कायदे से तो कोई भी शहर से लेकर देश तक को भी, लीडर्स को ही हांकने का विधान-संविधान है। फिर इंदौर में नाइट कल्चर से लेकर नशे के बढ़ते गढ़ में तब्दील होने का फैसला करने वाली नौकरशाही कौन होती है ?
अपन मानते हैं कि शहर यदि महानगर होगा तो उसके साथ महानगरीय बुराइयां भी आएंगी ही ! यह तय है। अलबत्ता इसका मतलब ये नहीं कि जो इन बुराईयों की रोकथाम या इनका बंदोबस्त देखने वाला जिम्मेदार तंत्र है, वो केवल अपनी निजी कमाई की संभावना देखकर इन बुराइयों को रोकने के बजाय उनको स्थापित करने में अपनी सारी ईमानदार-बेईमान ऊर्जा लगा दे ! बजरंगी शायद इसलिए भी पिटे हैं कि वो नशे पर कार्रवाई के नाम पर पुलिस के पेट पर लात मार रहे हैं ! बेशक इस पूरे मसले में बड़ा बाजार और धंधा भी शामिल है। मूल बात यह है कि शहर में किसी बुरी संस्कृति को पनपने से रोकने और नयी नस्ल को एक खतरे से बचाने की कोई समूह कोशिश कर रहा है तो बजाय उसकी पीठ थपथपाने के उसे पीटा जा रहा है ! शहर का जिम्मेदार नेतृत्व क्या गांधी के तीन बंदर हो गया है ? आप पाएंगे शहर से वो वांछित नेतृत्व ही लापता है ! उसमें आप शहर के तमाम नेतृत्व समूहों को भी शामिल मान सकते हैं !
जाने क्यों ऐसा लगता है कि जान से प्यारा ये शहर अब रहने के काबिल नहीं रहा !





