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रेमडेसिविर इंजेक्शन आया पर मिला नहीं:डॉक्टर ने ही कहा- मेरी मां मर जाएगी, तब दोगे इंजेक्शन, ‘सरकार’ बोली- इससे न मौत रुकती है और न ये इलाज है

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भोपाल

रेमडेसिविर इंजेक्शन आने की खबर लगते ही शनिवार को हजार से ज्यादा लोग दवा मार्केट पहुंच गए। हालात ऐसे बने कि पुलिस बुलाना पड़ी। घंटेभर में यहां से डोज अस्पताल भेज दिए गए। लेकिन लोग नहीं जानते थे कि दवा दुकानों से इंजेक्शन सीधे अस्पताल जाएंगे, उन्हें नहीं मिल सकते। तीन कहानियां अपनों के लिए इंजेक्शन ढूंढने की

साहब, मेरे भाई के लंग्स में 75% इंफेक्शन हो चुका है, वो मर जाएगा
महावीर मेडिकल कॉलेज में मेरा भाई राजकुमार जैन भर्ती है। दो दिन से इंजेक्शन की तलाश कर रहा हूं। 75 फीसदी इंफेक्शन हो चुका है। यदि इंजेक्शन नहीं मिला तो वो मर जाएगा। आपके पैर पड़ रहा हूं। इंजेक्शन दे दो। छोटे भाई की उम्र अभी 19 साल है। सुबह से अस्पताल से निकला हूं। कुछ तो मदद करिए।
(जैसा पवन जैन ने बताया )

मैं डॉक्टर हूं, कई जान बचाईं, मेरी मां मर जाएगी, तब दोगे इंजेक्शन?
मेरी मां रामकली देवी अस्पताल में पिछले बुधवार से भर्ती हैं। लंग्स में 30 फीसदी इंफेक्शन है। शहर के हर स्टॉकिस्ट के पास जा चुका हूं। लेकिन इंजेक्शन नहीं मिला। इंदौर में पता कर लिया। अब जब सरकार ने इंजेक्शन भेजे हैं तो दे दो। मैं खुद भी डॉक्टर हूं। हमेशा लोगों की इमरजेंसी के समय मदद की है। मेरी मां जब मर जाएगी क्या तब इंजेक्शन दोगे।
(जैसा कि डॉ. पीसी शर्मा ने कहा)

फिर लौटना ही पड़ेगा, पता नहीं बहन का क्या होगा
मेरी बहन शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती है। उसको लंग्स इंफेक्शन हुआ है। कई दिनों से इंजेक्शन की तलाश में शहर में भटक रहा हूं। आज उम्मीद थी कि इंजेक्शन मिल जाएगा। शाम हो गई लेकिन इंजेक्शन नहीं मिला। फिर आज निराश होकर लौटना पड़ रहा है।
(जैसा कि जमीर उल रहमान ने बताया )

स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव सुलेमान बोले- रेमडेसिविर से न मौत रुकती है, न ये इलाज है

स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव मो. सुलेमान ने कहा कि रेमडेसिविर इंजेक्शन से न किसी की मौत रुक सकती है और न ही इससे इलाज हो सकता है। इस इंजेक्शन को लेकर कंफ्यूजन है, फिर भी इमरजेंसी में डॉक्टर की सलाह पर इसका उपयोग हो रहा है। डब्ल्यूएचओ के साथ आईसीएमआर की गाइडलाइन है। एम्स दिल्ली ने भी इस बारे में स्पष्ट कर दिया है। ऑक्सीजन प्लांट को लेकर भी उन्होंने कहा कि मप्र का कोई प्लांट नहीं है। ऑयनोक्स को उत्पादन शुरू करने में अभी दो साल का समय लगेगा।

5 लोगों से पांच सवाल, एक का भी पूरा जवाब नहीं
कोरोना के हालात और सरकार की तैयारियों को बताने के लिए शनिवार को सरकार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई। इसमें चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग, अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य मोहम्मद सुलेमान, अपर मुख्य सचिव गृह डॉ. राजेश राजौरा, स्वास्थ्य सचिव डॉ. संजय गोयल और डॉ. देवपुजारी मौजूद थे। इनसे कुछ अहम सवाल पूछे गए लेकिन पूरा जवाब किसी का नहीं मिला।

  • रेमडेसिविर इंजेक्शन मप्र में कितने आ गए और किन अस्पतालों को भेजे गए?
  • इसकी सूची अलग से भिजवा देंगे।
  • ऑक्सीजन के कितने टैंकर शनिवार को मप्र में आए हैं और कहां स्टोर किया है?
  • हंसते हुए.., ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है। पर्याप्त आपूर्ति हो रही है। यह जानकारी भी आपको दे दी जाएगी।
  • आंकड़ों में मौत कम है, श्मशान में भीड़ लगी है? क्या स्वास्थ्य विभाग झूठ बोल रहा है?
  • सरकारी के साथ निजी अस्पतालों में भी इलाज चल रहा है। इस वजह से आंकड़ों में कुछ फर्क हो सकता है।
  • तो क्या सरकारी अस्पताल में कम और प्राइवेट अस्पतालों में ज्यादा मौतें हो रहीं?
  • ऐसा नहीं, आज आप कुछ ज्यादा नाराज हो रहे हैं। आगे से सही आंकड़े मिलेंगे।
  • साल भर पहले भी यही व्यवस्थाएं हुई थीं, फिर उन्हीं की बात हो रही है, क्या कमी रह गई कि सुविधाएं नहीं बन पाईं?
  • कोई जवाब नहीं, प्रेस कांफ्रेंस से सभी लोग उठ गए।

सुलेमान के आंकड़ों पर सीएम के सामने बिफरे भाजपा विधायक विश्नोई
कोरोना संक्रमण के आंकड़ों पर भाजपा विधायक अजय विश्नोई बिफर गए। वीडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान विश्नोई ने कहा कि सुलेमान की यह रिपोर्ट सही है तो फिर चिंता की बात ही नहीं। लेकिन जमीन पर हकीकत कुछ और है। संक्रमितों की संख्या आधी बताई जा रही है।

जबलपुर में शुक्रवार को 15 अंत्येष्टि हुई। सुलेमान एक-दो मौत बता रहे हैं। जबलपुर में 600 केस रोजाना आ रहे, जबकि संख्या आधी बताई जा रही है। यदि सरकार ही सही वस्तुस्थिति नहीं बताएगी तो लोग न डरेंगे और न सावधान होंगे। रेमडेसिवर इंजेक्शन की ब्लैक मार्केटिंग क्यों हो रही है। ग्यारह हजार के इंजेक्शन मिल रहे हैं। विश्नोई के इस रुख को देखते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि ऐसे ही एक-एक उदाहरण पर बात करेंगे तो 52 जिलों से कैसे बात होगी।  इस पर विश्नोई ने कहा कि तो चुप हो जाते हैं। जब बात सुनना ही नहीं तो यहां क्यों बुलाया गया।

Ramswaroop Mantri

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