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सीएम भूपेश बघेल के पिता नंदकुमार बघेल की बयानबाजी पर बवाल

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कहीं बेटे पर भारी न पड़ जाये पिता की बयानबाजी*
उप्र की राजनीति में प्रियंका गांधी को लगेगा झटका
बघेल खानदान का ब्राहम्णों विरोधी सच आया सामने
विजया पाठक
, एडिटर, जगत विजन
छत्तीसगढ़ में पहले से ही मुख्यमंत्री पद को लेकर चल रही खींचतान के बीच अब एक नए विवाद ने जन्म ले लिया है। इस बार इस विवाद के जन्मदाता हैं राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पिता नंदकुमार बघेल। अपने बड़बोलेपन और बयानबाजी को लेकर चर्चा में रहने वाले नंदकुमार बघेल ने इस बार ब्राम्हण समाज को अपना निशाना बनाया। ब्राम्हणों पर निशाना साधते हुए नंदकुमार बघेल ने ब्राम्हण समाज की धार्मिक भावनाओं को आहत किया है। सीएम भूपेश बघेल के पिता नंदकुमार ने कुछ समय पहले ही यूपी के लखनऊ में एक आंदोलन के दौरान मीडिया को बयान देते हुए कहा था कि ब्राम्हण विदेशी हैं और वे उत्तरप्रदेश में 06 अगस्त को उनके खिलाफ एक बड़ा आंदोलन करेंगे ताकि उन्हें मंदिरों से निकाला जाए। वे गांव-गांव जाकर उनका बहिष्कार करेंगे। नंदकुमार बघेल के बयान का यह वीडियो वायरल होने के बाद इस पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया। मुख्यमंत्री के पिता द्वारा की गई बयानबाजी के बाद राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई हैं और भाजपा से लेकर विभिन्न संगठनों ने मुख्यमंत्री के पिता को इस मामले में घेरा है। अपने पिता के इस बयान के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मुश्किलें और बढ़ गई हैं और भाजपा ने उन्हें घेरना शुरू कर दिया है। वैसे यह भी सच है कि सीएम स्‍वयं ब्राहमण विरोधी रहे हैं। कहीं न कहीं उनके पिता के बयान से यही साबित होता है।
उत्तरप्रदेश में आगामी चुनाव के होने वाले प्रभारी और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पिता से निकले ब्राह्मणों के बारे में आपत्तिजनक बयान से चुनाव में अभी से नुकसान करा लिया है। एक तरफ उत्तरप्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी पिछले 2-3 सालों से उत्तरप्रदेश में ब्राह्मणों को काफी हद तक अपने पक्ष ने कर लिया है। उत्तरप्रदेश का चुनाव कांग्रेस के अस्तित्व से जुड़ा है। एक तरफ उसने अपने सर्वोच्च नेता में से एक प्रियंका गांधी को प्रदेश की बांगडोर सौंपी है और वो काफी मेहनत करती दिखाई भी देती हैं। ऐसे समय में जहां उत्तरप्रदेश के ब्राह्मण भाजपा से नाराज़ हैं, उन्‍हें रिझाने में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी दोनों लगे हैं। इनका उत्तरप्रदेश में एक बड़ा वोट बैंक और ब्राम्‍हण आबादी 11 प्रतिशत से ज्‍यादा है और किसी भी चुनाव को मोडने में ब्राम्‍हण महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाते है। उत्‍तर प्रदेश में आज भी चुनाव जातीय समीकरण से जीते जाते हैं, ऐसे में वहां छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पिता नंद कुमार बघेल के बयान से कांग्रेस ने स्‍वयं ही पैरो पर कुल्‍हाडी मार ली।
हालांकि मामला बढ़ता देख छत्तीसगढ़ सरकार ने नंद कुमार बघेल के खिलाफ एक दिखावटी एफआईआर दर्ज की है, जिसमें कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। धार्मिक भावनाएं भड़काने, दंगा भड़काने की धारा 153 ए के तहत एफआईआर दर्ज करवाई है। जबकि छत्तीसगढ़ प्रशासन आजकल केस रजिस्टर कर गिरफ्तार करने में एक्सपर्ट हो गया है। इनके पिछले 2.5 साल के शासन में जिसने भी इनके भ्रष्टाचारों पर आवाज उठाई उसे जेल भेज दिया गया।
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में हुई यह घटना अब तक किसी भी राज्य में हुई इकलौती घटना है, जिसमें स्वयं मुख्यमंत्री के पिता द्वारा इस तरह की बयानबाजी की गई और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई हो। भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष विष्णुदेव साय ने इस वीडियो को ट्वीट कर सीधे राहुल गांधी और भूपेश बघेल पर तंज कसते हुए लिखा कि समाज में विद्वेष फैलाने वाले अपने पिता के इस बयान का मुख्यमंत्री भूपेश बघेल समर्थन करते हैं? क्या तथाकथित जनेऊधारी ब्राम्हण राहुल गांधी विदेशी हैं? विपक्ष की ओर से इस बयान को मुद्दा बनाते देख खुद भूपेश बघेल ने एक लिखित बयान जारी किया और कहा कि छत्तीसगढ़ में कानून व्यवस्था सबके लिए एक बराबर है। पिता नंदकुमार बघेल से मेरे शुरुआत से वैचारिक मतभेद हैं, सबको पता है। उनके इस बयान से सामाजिक सदभाव को ठेस लगी और मुझे भी काफी दुख हुआ है। कुल मिलाकर अपने पिता के बयान के बाद खुद के राजनीतिक जीवन में किसी प्रकार की कोई हलचल न हो इसके लिए खुद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पिता और उनके बीच वैचारिक मतभेद बताकर पल्ला झाड़ने की कोशिश की है। लेकिन ऐसा नहीं है। यह पिता के इस बयान ने सिर्फ छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के ब्राम्हण संगठनों के बीच असंतोष जाहिर हो रहा है। ऐसी स्थिति में पिता का यह बयान पुत्र भूपेश बघेल को कहीं गहरे संकट में न खड़ा कर दे। राज्य में पहले से ही मुख्यमंत्री की कुर्सी के दावेदारी को लेकर राज्य के मुखिया भूपेश बघेल और स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव के बीच मतभेद चल रहे हैं। ऐसे में टीएस सिंहदेव को अपनी दावेदारी मजबूत करने का यह एक बेहतरीन मौका मिला है और निश्चित ही इस बयान के बाद कांग्रेस अलाकमान के बीच उनका पक्ष मजबूत हुआ होगा। खैर, अब यह आने वाला समय बताएगा कि इस बयान का संपूर्ण राज्य की कांग्रेस सरकार और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर इसका क्या असर होता है।
यह भी सच है कि इस बयान के कई हफ्ते तक भूपेश बघेल चुप रहे क्योंकि उनकी भी विचारधारा पिता के समान ही रही है। भूपेश बघेल ने अपने पिता को उत्तरप्रदेश की योगी सरकार को बोलकर राज्य अतिथि का दर्जा उनके पिछले दौरे में दिलवाया था, जो कि 17-21 नवंबर 2020 को नंद कुमार बघेल लखनऊ के राज्य वीआईपी अतिथि ग्रह में रुके थे।
नंद कुमार बघेल पहले भी ब्राह्मण विरोधी बयान देते रहे हैं। राजनीति में कोई बयान बहुत सोच समझकर कर देना चाहिए, गुजरात चुनाव में “मौत का सौदागर” बयान को लेकर नरेंद्र मोदी अपना चुनाव जीत गए, मध्यप्रदेश में पिछले चुनाव में “माई के लाल” से शिवराज अपनी कुर्सी गवां बैठे। ऐसे में क्या इस बयान से उत्तरप्रदेश चुनाव में कांग्रेस को जबरदस्त क्षति होने वाली है। वैसे भी अभी दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में भूपेश ने आलाकमान को उसकी औकात दिखा दी। अब उनके लिए भूपेश के क्या भाव है। वो उनके पिता के बयान के बाद के 06 सप्‍ताह की चुप्पी बताती है। वैसे भी वो अपने नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को बाहर करना चाहते हैं। शायद भविष्य में अपनी पार्टी बना लें। खैर, ओबीसी नेता का जो नकली दंभ उनमें है, वो भी भविष्य में होने वाले उत्तरप्रदेश चुनाव में स्पष्ट हो जाएगा।

Ramswaroop Mantri

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