अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

बदतमीज़ औरतें

Share

हम नहीं पहनतीं पैरों में पायल
जिससे तुम्हें हो आभास
हमारी मौज़ूदगी का
और हमें हो एहसास
अपने दायरे का

हम नहीं पहनतीं नाक में नथनी
जिससे लगे पहरा
हमारी सांस पर
और हमें हो एहसास
अपने क़ैद होने का

हम नहीं पहनतीं हाथों में चूड़ियां
जिसकी खनक नज़र रखे
हमारी हर बात पर
और हमें हो एहसास
अपने नज़रबंद होने का

हम नहीं पहनतीं कोई भी चोला
किसी भी धर्म का
जिससे हमें बांटा जाए
और हमें हो एहसास
इन्सान होने से पहले
मज़हबी होने का

हम नहीं लगाती आंखों में काजल
जिसके लगाने से
राहें हो जाएं धुंधली
और हमें हो एहसास
अपने भटके होने का

हम नहीं लगातीं मांग में सिंदूर
जो खिंचता है लकीर
एक सीमा बनकर
और हमें हो एहसास
अपनी हदों का

हम नहीं लगातीं माथे पर बिंदी
जो लगाए हम पर मुहर
किसी की जागीर होने की
और हमें हो एहसास
अपने वस्तु होने का

हम नहीं रिझातीं किसी भी मर्द को
कठपुतली की तरह
हम नहीं हो सकतीं मादक
शराब की तरह
हम ढूंढती हैं ख़ुद का वज़ूद
ख़ुद के नज़रिए से
हां हम हैं,
बदतमीज़ औरतें !

  • रुपाली जाधव

Ramswaroop Mantri

Recent posts

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें