भोपाल। मप्र ऐसा राज्य है, जहां पर सार्वजनिक बैंकों के बाद सर्वाधिक शाखाओं के मामले में ग्रामीण बैंक आते हैं, इसके बाद भी यह ग्रामीण बैंक अपने ग्राहकों को सुविधा देने में कोई रुचि नहीं ल रहे हैं, जिसकी वजह से अब इन बैंकों से ग्राहकों का मोहभंग होना शुरू हो गया है। यह बात अलग है कि प्रदेश सरकार द्वारा तैयार किए गए आत्मनिर्भर मप्र के लक्ष्यों में भी इसे शामिल किया गया है। यह बात अलग है कि इन बैंकों के प्रबंधनों का रवैया ही प्रदेश के सहकारी बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को भी आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य तय किया गया है, लेकिन इन बैंकों का रवैया ही उनकी आत्मनिर्भरता की राह का रोड़ा बन चुका है। यही वजह है कि अब भी प्रबंधन इनके संचालन में पुराना ढर्रा ही अपनाए हुए हैं जिसकी वजह से यह बैंक लगातार तकनीक के मामले में सार्वजनिक क्षेत्रों और निजी बैंकों की तुलना में लगातार पिछड़ते जा रहे हैं। हालत यह है कि क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों द्वारा तो अपने ग्राहकों को एटीएम तक की सुविधाएं नहीं दे पा रहा है। जिसकी वजहों से सर्वाधिक ग्रामीण उपभोक्ताओं वाले यह बैंक अब ग्राहकों के मामले में भी पीछे होते जा रहे हैं।
प्रदेश में सिर्फ एक एटीएम: प्रदेश में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की 1320 से अधिक शाखाएं हैं। इनमें से ग्रामीण शाखाओं की संख्या सर्वाधिक 855 है। इन बैंकों की 316 अर्ध शहरी और 149 शहरी शाखाएं भी हैं। इसके बाद भी यह बैंक एटीएम की सुविधा देने में रुचि नहीं ले रहे हैं। यही वजह है कि अब तक प्रदेश में महज यह बैंक सिर्फ एक एटीएम ही संचालित कर रहे हैं।
प्रदेश के सहकारी बैंकों के 21 एटीएम: ग्रामीण बैंको की तुलना में प्रदेश में ग्राहक सुविधा के मामले में सहकारी बैंकों की स्थिति कुछ अच्छी है। प्रदेश में 853 शाखाओं वाले सहकारी बैंकों की सबसे अधिक 470 शाखाएं अर्ध शहरी क्षेत्रों में है। इसी तरह से ग्रामीण इलाकों में 297 और शहरी क्षेत्रों में 86 शाखाएं हैं। इन बैंकों द्वारा भी प्रदेश में इतनी शाखाओं के बाद भी वे केवल 21 एटीएम ही संचालित कर रहे हैं।
स्माल फायनेंस बैंकों से भी पीछे
प्रदेश में कुछ समय पहले शुरू हुए स्माल फायनेंस बैंकों की शाखाओं की संख्या भले ही दो सौ के आंकड़ों को नहीं छू पा रही है, लेकिन वे ग्राहक सुविधाओं के मामले में सहकारी बैंकों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को पीछे छोड़ चके हैं। प्रदेश में स्मॉल फायनेंस बैंक की ग्रामीण शाखाएं मात्र 37 हैं। इसी तरह अर्ध शहरी क्षेत्रों में 57 और शहरी क्षेत्रों में 8 -8 शाखाएं कार्यरत हैं। इतनी कम शाखाओं के बाद भी उनके प्रदेश में 66 एटीएम कार्यरत हैं।
निजी बैंकों के 1268 एटीएम संचालित
प्रदेश में निजी बैंकों की 1047 शाखाएं हैं। यह बैंक सार्वजनिक क्षेत्र और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक के बाद तीसरे स्थान पर हैं। इसके बाद भी इनके द्वारा ग्रहकों को उनकी तुलना में बेहतर सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। खास बात यह है कि इन बैंको की प्रदेश में 1047 शाखाएं हैं, लेकिन उनके कुल 1268 एटीएम कार्यरत हैं। यही वजह है कि इन बैंकों का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है। इन बैंकों का पूरा फोकस बिजनेस को देखते हुए अर्ध शहरी और शहरी क्षेत्रों पर हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में निजी बैंकों की महज 190 शाखाएं हैं, जबकि अर्ध शहरी क्षेत्रों में 385 और शहरी क्षेत्रों में 472 शाखाएं हैं।
सार्वजनिक क्षेत्रों की बादशाहत कायम
सेवा और सुविधा के मामले में सार्वजनिक क्षेत्रों की बैंकों की बादशाहत पूरी तरह से कामय है। प्रदेश में कुल 7665 शाखाएं हैं। इनमें से 50 फीसद से अधिक 4263 शाखएं सार्वजनिक क्षेत्रों के बैंकों की है। इनकी ग्रामीण क्षेत्रों में 1348 शाखाएं हैं। इसी तरह अर्ध शहरी क्षेत्रों में 1239 और शहरी क्षेत्रों में 1676 शाखाएं हैं। इसकी तुलना अगर एटीएम से की जाए तो इन शाखाओं के मुकाबले प्रदेश में दोगुने से अधिक एटीएम संचालित किए जा रहे हैं। प्रदेश में कुल 9445 एटीएम कार्यरत हैं, जिनमें से 8089 तो केवल सार्वजनिक क्षेत्रों के बैंकों के हैं।
ग्राहक सुविधा में फिसड्डी साबित हो रहे हैं प्रदेश के ग्रामीण बैंक





