मीरा रोड कांड में बड़ा एक्शन, मनसे के 7 कार्यकर्ता हिरासत में
मुंबई में राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के सात कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया। इन पर आरोप है कि इन्होंने एक दुकान मालिक को मराठी में बात न करने पर पीटा। यह घटना ठाणे जिले के मीरा-भायंदर इलाके में हुई। पुलिस ने आरोपियों को नोटिस दिया।
मुंबई में राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के सात कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया। इन पर आरोप है कि इन्होंने एक दुकान मालिक को मराठी में बात न करने पर पीटा। यह घटना ठाणे जिले के मीरा-भायंदर इलाके में हुई। पुलिस ने आरोपियों को नोटिस दिया और बाद में उन्हें जाने दिया। मनसे कार्यकर्ता राज्य में दुकानों और बैंकों में मराठी भाषा के इस्तेमाल पर जोर दे रहे हैं। पुलिस के एक अधिकारी ने शुक्रवार को इस घटना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आरोपियों को नोटिस देने के बाद छोड़ दिया गया। यह घटना मंगलवार को हुई थी। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ है। इसमें कुछ हमलावर मनसे के चुनाव चिह्न वाले पटके पहने हुए दिख रहे हैं।

दुकानदार से मराठी में बात करने को लेकर मारपीट
एक पुलिस अधिकारी ने पहले बताया था कि एक आरोपी खाना खरीदते समय दुकानदार से मराठी में बात करने को कहा। इस पर दुकानदार ने उनसे सवाल किया। अधिकारी ने बताया कि इससे गुस्साए एक आरोपी ने दुकानदार पर चिल्लाना शुरू कर दिया। फिर उसके साथ मौजूद कुछ लोगों ने दुकानदार को थप्पड़ मारे। इसके बाद काशिमीरा पुलिस ने मनसे के सात कार्यकर्ताओं के खिलाफ दंगा, धमकी और मारपीट का मामला दर्ज किया। पुलिस ने यह मामला भारतीय न्याय संहिता के तहत दर्ज किया है।
चेतावनी देकर छोड़ा
शुक्रवार को पुलिस थाने के उपनिरीक्षक किरण कदम ने बताया कि आरोपियों को थाने लाया गया। उन्हें नोटिस दिया गया और फिर जाने दिया गया। उन्होंने यह भी बताया कि पुलिस आरोपियों के खिलाफ ‘निवारक कार्रवाई’ करने की प्रक्रिया में है। इसका मतलब है कि पुलिस यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा रही है कि वे आगे कोई गड़बड़ न करें।
मनसे कार्यकर्ता क्यों कर रहे ऐसा?
कदम ने बताया कि क्षेत्रीय पुलिस उपायुक्त कार्यालय उनसे अच्छे व्यवहार के लिए मुचलके पर हस्ताक्षर करवाएगा। मनसे कार्यकर्ता महाराष्ट्र में दुकानों और बैंकों में मराठी भाषा के इस्तेमाल पर जोर दे रहे हैं। वे चाहते हैं कि राज्य में हर जगह मराठी भाषा का इस्तेमाल हो।
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के पोस्टर लखनऊ में लगे
लखनऊ में शिया धर्मगुरु मौलाना यासूब अब्बास के आवास पर ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई का पोस्टर लगने से शहर में चर्चा तेज हो गई है। मौलाना यासूब ने इसे धार्मिक परंपरा बताया है, जबकि कुछ लोग इसे ईरान-इजरायल जंग से जोड़कर देख रहे हैं।

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई का पोस्टर लगाया गया है। इस पोस्टर को शिया धर्मगुरु मौलाना यासूब अब्बास के आवास अवध प्वाइंट पर लगाया गया है। पोस्टर में खामेनेई के अलावा शिया समुदाय से जुड़े अन्य धार्मिक चेहरों की तस्वीरें भी शामिल हैं। इसे लेकर शहर में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। कुछ लोग इसे ईरान-इजरायल जंग से जोड़कर देख रहे हैं।वहीं कई राजनीतिक हलकों में इस पर सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, इन अटकलों पर खुद मौलाना यासूब अब्बास ने विराम लगाने की कोशिश की है।
शिया धर्मगुरु मौलाना यासूब अब्बास ने स्पष्ट किया है कि यह कोई राजनीतिक स्टैंड नहीं है। बल्कि ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई हमारे धर्मगुरु हैं। उन्होंने बताया कि हर साल ऐसे पोस्टर लगाए जाते हैं। इस बार भी हैदरी टास्क फोर्स की ओर से यह पोस्टर लगाए गए हैं। इसके साथ ही मौलाना यासूब ने यह भी दावा किया कि इस तरह के पोस्टर लखनऊ में कई जगहों पर लगाए गए हैं। वहीं खास बात यह है कि यह पोस्टर ऐसे वक्त में सामने आया है, जब हाल ही में ईरान और इजरायल के बीच 12 दिन तक युद्ध चला है। हालांकि इस जंग में दोनों ही देश अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं।
सुरक्षा और खुफिया एजेंसियां सतर्क
इसी घटनाक्रम के बीच यूपी की राजधानी लखनऊ में लगे इस बैनर को कुछ लोग ईरान के समर्थन के तौर पर भी देख रहे हैं। हालांकि शिया धर्मगुरु मौलाना यासूब अब्बास ने इससे इनकार करते हुए कहा कि इस पोस्टर का ईरान-इजरायल युद्ध से कोई लेना-देना नहीं है। यह परंपरा वर्षों से निभाई जा रही है। वहीं लखनऊ में लगे इन पोस्टरों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। अभी तक प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सुरक्षा और खुफिया एजेंसियां सतर्क हैं।
ईरान का समर्थन कर रहे
बता दें, जंग के दौरान इजरायल के ईरान पर हमला करने के खिलाफ लखनऊ में मौलाना यासूब अब्बास के नेतृत्व में मुस्लिम सड़कों पर उतर आए थे। इस विरोध-प्रदर्शन के दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के राष्ट्रपति नेतन्याहू के पोस्टर जलाते हुए जमकर नारेबाजी की गई थी।
इस तरह लखनऊ के शिया मुसलमान लगातार ईरान का समर्थन कर रहे थे। मौलाना यासूब अब्बास ने केंद्र की मोदी सरकार से भी ईरान का समर्थन करने की अपील की थी। इस जंग के दौरान यूपी के कई मुसलमान ईरान में फंस गए थे। इसमें कई लोग वो थे, जो धार्मिक यात्रा पर गए थे।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को चीन से मिल रही थी रियल टाइम जानकारी
इंडियन आर्मी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन ने भारत की मिलिट्री तैनाती पर नजर रखने के लिए अपने सेटेलाइट का इस्तेमाल किया और पाकिस्तान को इसकी रियल टाइम जानकारी दी। साथ ही कहा कि भारत-पाकिस्तान संघर्षको चीन ने अपने लाइव लैब की तरह इस्तेमाल किया, जिसमें उसने अपने अलग अलग वेपन सिस्टम का टेस्ट किया।

आर्मी के डिप्टी चीफ लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर. सिंह ने कहा कि चीन ने ऑपरेशन सिंदूर में भारत की सैन्य गतिविधियों पर नजर रखने के लिए सैटेलाइट का उपयोग किया और पाकिस्तान को जानकारी दी।
फिक्की के एक कार्यक्रम में बोलते हुए आर्मी के डिप्टी चीफ लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर. सिंह ने कहा कि ‘जब भारत-पाकिस्तान के बीच डीजीएमओ स्तर की बातचीत चल रही थी तब पाकिस्तान यह तक कह रहा था कि हमें पता है कि आपकी ये-ये यूनिट तैयार है और कार्रवाई के लिए तैनात है और हम आपसे अनुरोध करते हैं कि उसे पीछे हटाया जाए। इसका मतलब है कि उसे चीन से रियल टाइम जानकारी मिल रही थी’। हालांकि 31 मई को सिंगापुर में शांगरी-ला डायलॉग में बोलते हुए जनरल अनिल चौहान ने कहा था कि ‘ऐसा माना जा रहा है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने चीन की कमर्शियल सैटेलाइट इमेजरी का इस्तेमाल किया हो सकता है लेकिन अब तक इस बात का कोई सबूत नहीं मिला है कि उसे रियल-टाइम टारगेटिंग की मदद मिली’।
लेफ्टिनेंट जनरल सिंह ने कहा कि मई में हुए भारत-पाकिस्तान संघर्ष को चीन ने एक लाइव लैब की तरह इस्तेमाल किया जिसमें उसने विभिन्न वेपन सिस्टम का टेस्ट किया और पाकिस्तान को हर संभव सपोर्ट दिया। उन्होंने कहा कि यह उस तरह था जैसा प्राचीन काल में मिलिट्री स्ट्रैटजी में दुश्मन को उधार ली हुई छुरी से मारना होता है… वह (चीन) नॉर्दन बॉर्डर पर कीचड़ उछालने की लड़ाई (मड स्लिंगिंग मैच) में शामिल होने की बजाय भारत को तकलीफ देने के लिए पड़ोसी (पाकिस्तान) का इस्तेमाल करेगा।
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान तो सिर्फ फ्रंट फेस था जबकि चीन अपने ऑल वेदर फ्रेंड पाकिस्तान को हरसंभव सहयोग दे रहा था। इसके अलावा तुर्किये भी पाकिस्तान को सैन्य साजो-सामान की आपूर्ति कर अहम भूमिका निभा रहा था।जनरल सिंह ने कहा कि 7 से 10 मई के संघर्ष के दौरान भारत वास्तव में कम से कम तीन विरोधियों का सामना कर रहा था।
जय गुजरात! अमित शाह के सामने एकनाथ शिंदे ने लगाया नारा
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और शिवसेना के प्रमुख नेता एकनाथ शिंदे ने पुणे में एक कार्यक्रम में जय गुजरात का नारा दिया है। उपमुख्यमंत्री शिंदे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में कोंडवा में आयोजित कार्यक्रम में मौजूद थे। उस समय उन्होंने अपने भाषण में अमित शाह की जमकर तारीफ की।

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और शिवसेना के प्रमुख नेता एकनाथ शिंदे ने पुणे में एक कार्यक्रम में जय गुजरात का नारा दिया है। उपमुख्यमंत्री शिंदे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में कोंडवा में आयोजित कार्यक्रम में मौजूद थे। उस समय उन्होंने अपने भाषण में अमित शाह की जमकर तारीफ की। अपने भाषण का समापन करते हुए उन्होंने जय हिंद, जय महाराष्ट्र, जय गुजरात जैसे नारे दिए। शिंदे की ओर से दिए गए जय गुजरात के नारे से कई लोगों की भौंहें तन गईं। दरअसल भाषण के आखिर में शिंदे ने जय हिंद, जय महाराष्ट्र कहा। इसके बाद वे कुछ पल के लिए रुके। इसके बाद उन्होंने जय गुजरात का नारा दिया।
पुणे के दौरे पर अमित शाह
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज पुणे के दौरे पर हैं। पुणे में उनके चार कार्यक्रम हैं। उनका पहला कार्यक्रम राष्ट्रीय सुरक्षा अकादमी में संपन्न हुआ। इसके बाद वे कोंडवा स्थित जयराज स्पोर्ट्स एंड कन्वेंशन सेंटर के उद्घाटन में पहुंचे। यह कार्यक्रम शहर के गुजराती समुदाय की ओर से आयोजित किया गया था। उस समय शाह के साथ उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और अजित पवार भी मौजूद थे। दोनों उपमुख्यमंत्रियों ने भाषण दिया। शिंदे का भाषण खास तौर पर ध्यान खींचने वाला था।
शिंदे ने क्या कहा कि मच गया हंगामा?
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अपने भाषण में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की तारीफ की। उन्होंने जय हिंद, जय महाराष्ट्र, जय गुजरात के नारे के साथ अपना भाषण समाप्त किया। जय हिंद, जय महाराष्ट्र कहने के बाद शिंदे कुछ पल के लिए रुके। वह कुछ पल के लिए माइक्रोफोन से दूर चले गए। लेकिन अगले ही पल वह माइक्रोफोन के करीब आए और जय गुजरात का नारा लगाया। इस पर उपस्थित लोगों में हड़कंप मच गया।
उद्धव सेना ने बोला हमला
शिंदे के जय गुजरात नारे पर उद्धव ठाकरे की शिवसेना ने कड़े शब्दों में हमला बोला है। शिवसेना यूबीटी नेता और मुंबई की पूर्व मेयर किशोरी पेडनेकर ने कहा कि शिंदे ने शिवसेना छोड़ते समय कहा था कि वह बालासाहेब के विचारों का अनुसरण कर रहे हैं। जय गुजरात कब से बालासाहेब के विचार बन गए? पेडनेकर ने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को शिंदे के जय गुजरात नारे पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। क्योंकि वह पूरे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री हैं। वह राज्य का नेतृत्व करते हैं।
शिंदे पर तंज
शिंदे कहते रहते हैं कि वे बालासाहेब के विचारों के अनुयायी हैं। लेकिन बालासाहेब और महाराष्ट्र के अनुयायी कौन हैं जो जय गुजरात कहते हैं? यह गुजरात की पाइप है। इस पाइप में क्या बह रहा है, यह तो शिंदे ही जानते हैं, पेडणेकर ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा। मोरारजी देसाई का सपना था कि मुंबई गुजरात को दे दी जाए। पेडणेकर ने सवाल उठाया कि क्या इसे पूरा करने के लिए शिंदे ने देशद्रोह किया।
जंग, जंग और जंग… कैसे दुश्मनों से लड़कर अमेरिका बना सुपरपावर?
दुनिया में एक मुल्क ऐसा है, जिसका लोहा हर देश मानते हैं। यहां जिस देश की बात हो रही है, वह अमेरिका है। आज शायद ही कोई ऐसा देश हो, जिसके भीतर अमेरिका से भिड़ने की ताकत है। दुनिया अमेरिका को ‘सुपर पावर’ मानती है, यानी ऐसा देश जिसके पास अथाह ताकत, पैसा और वर्चस्व हो। अमेरिका के वर्चस्व का आलम ये है कि अगर वह जब चाहे किसी भी देश में उठापटक करवा सकता है। इराक, यमन, लीबिया, अफगानिस्तान जैसे देश इसके गवाह हैं।

अमेरिका आज यानी 4 जुलाई को अपना 249वां स्वतंत्रता दिवस भी मना रहा है। अमेरिकी क्रांति के बाद उसे ब्रिटेन से 4 जुलाई, 1776 को आजादी मिली। आजादी के करीब 250 साल बाद आज दुनिया में अमेरिका का सिक्का चलता है। दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, सैकड़ों विदेशी मिलिट्री बेस और अंतरराष्ट्रीय संगठनों में लीडरशिप पॉजिशन ने अमेरिका को ग्लोबल पावर बनने की शक्ति दी है। हालांकि, हमेशा से ऐसा नहीं था। एक दौर वो भी था, जब अमेरिका ने खुद को अंतरराष्ट्रीय मामलों से दूर रखा।
अमेरिकी सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और अपना क्षेत्र फैलाने पर जोर दिया। हालांकि, फिर 19वीं शताब्दी के आखिर से अमेरिका ने पर फैलाने शुरू किए और आज वह दुनिया की चौधरी बनकर बैठा है। अब यहां सवाल उठता है कि आखिर अमेरिका को ही दुनिया का सुपर पावर क्यों माना जाता है? वह किस तरह सुपर पावर बना और किन घटनाओं ने उसे दुनिया का ग्लोबल नेता बनाया?
इस तरह के सवाल आमतौर पर यूपीएससी, पीसीएस समेत कई तरह की सरकारी परीक्षाओं में ये सवाल पूछ लिया जाता है। इसका जवाब विस्तार से मालूम होने पर परीक्षा पास करना आसान हो जाएगा। अमेरिका के सुपर पावर बनने की कहानी चार हिस्सों में विभाजित है। आइए एक-एक करके सभी हिस्सों को समझते हैं।
स्पेनिश-अमेरिकन युद्ध
आजादी के बाद 19वीं सदी में अमेरिका को यूरोप के अमीर और ताकतवर साम्राज्यों से खतरा था। ब्रिटिश, फ्रेंच और स्पेनिश साम्राज्य की कई कॉलोनी अमेरिका के आस-पास मौजूद थीं। यूरोप अमेरिका को उत्तरी अमेरिकी महाद्वीप और कैरेबियन में प्रभाव के लिए एक अखाड़े के तौर पर देखता था। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति जेम्स मोन्रो ने यूरोप को चेतावनी भी दी कि वह इस एरिया में दखलअंदाजी ना करे। अमेरिका को समझ आ गया कि उसे भी धीरे-धीरे अपना प्रभाव बढ़ाना होगा, तभी वह यूरोप से निपट पाएगा।
सबसे पहले अमेरिका ने टेक्नोलॉजिकल इनोवेशन, जैसे स्टीम बोट, पैसेंजर ट्रेन और फैक्ट्री मशीन के बूते खुद को एक कृषि आधारित अर्थव्यवस्था से इंडस्ट्रियल अर्थव्यवस्था में तब्दील किया। 1850 आते-आते अमेरिका ने कैरेबियन और प्रशांत महासागर में मौजूद कई सारे द्वीपों को अपने अधीन किया। यहां उसे चिड़ियों की बीट से बना हुआ फर्टिलाइजर भी मिला, जिसने कृषि उपज को बढ़ाने में मदद की। 19वीं सदी के आखिर में कुछ ऐसा हुआ, जिसने अमेरिका को सुपर पावर बनने की दिशा में पहली बढ़त दी।
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दरअसल, अमेरिका के पड़ोस में क्यूबा देश था, जहां पर स्पेन का कब्जा था। 1898 में अमेरिका ने अपने युद्धक विमानपोत को समुद्र में उतारा। कहा जाता है कि स्पेन ने इस जहाज को डुबो दिया, जिसके बाद अमेरिका के साथ उसकी जंग शुरू हो गई। क्यूबा में क्रांतिकारियों को भी अमेरिका ने मदद दी, जिससे उसे स्पेन के खिलाफ बढ़त मिली। समुद्र में अमेरिकी नौसेना स्पेन से मुकाबला कर रही थी और क्यूबा में क्रांतिकारी स्पेनिश सैनिकों को मुहंतोड़ जवाब दे रहे थे। स्पेन को ये जंग भारी पड़ रही थी।
स्पेनिश-अमेरिकन जंग कई महीनों तक चली और स्पेन ने हार मानकर क्यूबा छोड़ दिया। स्पेनिश-अमेरिकन जंग में जीत के बाद स्पेन को कैरेबियन और प्रशांत महासागर को भी छोड़कर जाना पड़ा और इस तरह अमेरिका का प्रभाव इन दो क्षेत्रों में बढ़ गया। स्पेन ने कैरेबियन और प्रशांत महासागर में मौजूद कई क्षेत्रों को अमेरिका को सौंप दिया। इसके परिणाम स्वरूप गुआम, फिलीपींस और प्यूर्टो रिको अमेरिकी संपत्ति बन गए। उसी वर्ष, अमेरिका ने हवाई के स्वतंत्र देश को भी अपने में मिला लिया।
प्रथम विश्व युद्ध
भले ही अमेरिका को स्पेनिश युद्ध में जीत मिली थी, लेकिन राष्ट्रपति हॉवर्ड टाफ्ट और वुडरो विल्सन ने उसे विदेश में जंग लड़ने से दूर रखा। उन्होंने अर्थव्यवस्था पर ज्यादा से ज्यादा ध्यान दिया और देश को आगे बढ़ाया। प्रथम विश्वयुद्ध 1914 में शुरू हुआ और 1918 में जाकर खत्म हुआ। शुरुआती तीन सालों तक अमेरिका इस जंग से दूर रहा। हालांकि, फिर 1917 में कुछ ऐसा हुआ, जिसने अमेरिका को जंग लड़ने के लिए मजबूर किया। अमेरिका प्रथम विश्व युद्ध में दो प्रमुख वजहों से शामिल हुआ।
पहला, जर्मनी ने अटलांटिक महासागर में अमेरिकी जहाजों को डुबो दिया। दूसरा, ब्रिटेन द्वारा इंटरसेप्ट किए गए जिमरमैन टेलीग्राम से पता चला कि जर्मनी ने मेक्सिको को अमेरिकी क्षेत्र को दोबारा हासिल करने में मदद करने का प्रस्ताव दिया था, बशर्ते वे युद्धकालीन गठबंधन बना लें। अमेरिका को समझ आ चुका था कि अब उसे इस जंग में कूदना पड़ेगा। इसके बाद 6 अप्रैल, 1917 को अमेरिका जंग में शामिल हुआ और फिर मित्र राष्ट्रों की किस्मत ही बदल गई। उन्हें इस जंग में जीत हासिल हुई।
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प्रथम विश्व युद्ध का दृश्य (Gemini)
राष्ट्रपति वुडरो विल्सन ने जंग जीतने के बाद साम्राज्यवाद को खत्म करने की वकालत की। उन्होंने लीग ऑफ नेशन (जो आगे चलकर संयुक्त राष्ट्र बना) की स्थापना का प्रस्ताव दिया। हालांकि, लीग ऑफ नेशन को कोई सफलता नहीं मिली और फिर अमेरिका को 1930 के दशक में ग्रेट डिप्रेशन का सामना करना पड़ा। इन घटनाओं की वजह से अमेरिका अलग-थलग पड़ गया, जबकि इसी दौर में यूरोप और एशिया में फासीवाद बढ़ता जा रहा था। अमेरिका ने बस अपनी अर्थव्यवस्था पर ही फोकस किया।
द्वितीय विश्व युद्ध
1930 के बाद से ही यूरोप और एशिया में जंग शुरू हो चुकी थी, लेकिन अमेरिका 1941 तक द्वितीय विश्व युद्ध से दूर खड़ा रहा। अमेरिका ने मित्र राष्ट्रों (फ्रांस, सोवियत यूनियन और ब्रिटेन) को लोन और हथियारों की सप्लाई देना जारी रखा। हालांकि, वह दोबारा से जंग में नहीं कूदना चाहता था, क्योंकि प्रथम विश्व युद्ध में उसके एक लाख के करीब सैनिक मारे गए थे। हालांकि, फिर 1941 में कुछ ऐसा हुआ, जिसकी वजह से ना चाहते हुए भी अमेरिका द्वितीय विश्व युद्ध में शामिल हो गया।
दरअसल, 7 दिसंबर 1941 को जापान ने पर्ल हार्बर में स्थित अमेरिकी नौसेना के अड्डे पर बमबारी की, जिसमें 2400 के करीब सैनिकों की मौत हुई। इस हमले में दर्जनों विमान और जहाज तबाह हो गए। हमले के अगले ही दिन अमेरिका ने जापान के खिलाफ युद्ध का ऐलान कर दिया। कुछ दिनों बाद जर्मनी और इटली ने भी अमेरिका के खिलाफ युद्ध का ऐलान किया, क्योंकि दोनों ही देश धुरी राष्ट्र के ग्रुप में थे। इस ग्रुप में जर्मनी, जापान और इटली शामिल थे। शुरुआत में तो धुरी राष्ट्रों को सफलता भी मिली।
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द्वितीय विश्व युद्ध (Gemini)
एडोल्ड हिटलर की जर्मनी के सामने फ्रांस ने छह हफ्तों तक जंग लड़ने के बाद सरेंडर कर दिया। सोवियत संघ ने पहले जर्मनी के साथ एक अनाक्रमण संधि पर हस्ताक्षर किए थे। लेकिन फिर जर्मनी ने उस पर हमला किया तो वह अचंभित रह गया। ब्रिटेन ने खुद को अलग-थलग और कम संख्या में पाया। अमेरिकी सेना 1942 की शुरुआत में यूरोप में उतरी और जंग धीरे-धीरे मित्र राष्ट्रों के पक्ष में झुकने लगा। जर्मनी पूर्व से सोवियत यूनियन और पश्चिम से अमेरिका की तरफ से हमले का सामना कर रहा था।
जर्मनी ने आखिरकार 7 मई, 1945 को आत्मसमर्पण कर दिया। इसके तुरंत बाद जापान ने भी 14 अगस्त को आत्मसमर्पण कर दिया, जब अमेरिका ने हिरोशिमा और नागासाकी शहरों पर परमाणु बम गिराए। द्वितीय विश्व युद्ध में अमेरिका के नेतृत्व वाले मित्र राष्ट्रों को जीत मिली। दुनिया ने पहली बार परमाणु हथियारों का दंश देखा और इस तरह अमेरिका लगभग सुपर पावर बन गया। उसने यूरोप को फिर से खड़ा होने के लिए अरबों डॉलर की मदद की, जिस वजह से आज भी यूरोप उसका कर्जदार है।
युद्ध के बाद शांति
द्वितीय विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद अमेरिका को अथाह ग्लोबल पावर मिली। यूरोप में स्थित मित्र राष्ट्र जंग की वजह से बर्बाद हो चुके थे और कर्जे में डूबे हुए थे। इसी तरह से धुरी राष्ट्रों की हालत खस्ता थी। अमेरिका की मुद्रा डॉलर स्थिर थी। सभी प्रमुख मुद्राओं ने डॉलर के साथ खुद को फिक्स कर लिया। युद्ध के दौरान अमेरिका की अर्थव्यवस्था दो गुना हो चुकी थी। यूरोप ढह चुका था और जापान का बुरा हाल था। अमेरिका ने यूरोप और जापान की खूब मदद की, ताकि वे फिर से अपने पैरों पर खड़ा हो पाएं। इन्हें काफी पैसा दिया गया।
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सांकेतिक तस्वीर (Gemini)
अमेरिका, कनाडा और दस यूरोपीय देशों ने मिलकर 1949 में नाटो की स्थापना की। अमेरिका ने वैश्विक मुद्दों पर सहयोग को बढ़ावा देने के लिए कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का निर्माण करने में अग्रणी भूमिका निभाई। खास तौर पर अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और मौद्रिक नीति को नियंत्रित करने के लिए संयुक्त राष्ट्र, विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की स्थापना की गई। इन घटनाओं ने अमेरिका को सुपर पावर बनाया है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल ने युद्ध समाप्त होने के बाद ऐलान किया था कि अमेरिका दुनिया की चोटी पर खड़ा है।
युद्ध खत्म होने के बाद अमेरिका शीत युद्ध में उलझ गया और उसने डिफेंस पर खूब सारा निवेश किया। एक से बढ़कर एक हथियार बनाए गए, हर तरह का इनोवेशन अमेरिका में हो रहा था। स्पेस रेस में भी अमेरिका दुनिया के बाकी मुल्कों के मुकाबले सबसे आगे पहुंच गया। उसने 70 के दशक में इंसान को चांद पर पहुंचा गया। इन घटनाओं की वजह से अमेरिका को सुपर पावर होने का दर्जा मिला। 90 के दशक में उसने खाड़ी देशों तक अपना प्रभाव बढ़ा लिया था और आज सारी दुनिया उसकी मुट्ठी में नजर आती है।

यूक्रेन पर रूस ने सात घंटे बमबारी की, शांति के आसार नहीं..
रूस ने यूक्रेन में अब तक का सबसे बड़ा हमला किया है। 22 फरवरी, 2022 को शुरू हुए इस युद्ध को तीन साल से अधिक समय बीत चुके हैं, लेकिन दोनों देशों का टकराव थमने का नाम नहीं ले रहा है। दोनों देशों के बीच शांति बहाल कराने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी प्रयास कर रहे हैं। इसके बावजूद कीव व कुछ अन्य इलाकों में संघर्ष जारी है। ताजा हमले में रूसी सेना ने 550 ड्रोन लॉन्च किए और 11 मिसाइलें भी दागीं। अधिकारियों ने बताया कि कीव में बमबारी सात घंटे तक चली। रूस के इस हमले के बाद राजधानी के कई जिलों में भारी क्षति हुई है। बमबारी में एक व्यक्ति की मौत हो गई और एक बच्चे सहित कम से कम 26 अन्य घायल हो गए। लगातार हो रहे हमलों और वर्तमान सूरत-ए-हाल को देखते हुए यूक्रेन और रूस के बीच 40 महीने के हिंसक संघर्ष के बाद भी फिलहाल शांति बहाल होने के आसार नहीं दिख रहे हैं।
ट्रंप और जेलेंस्की के बीच फोन पर बातचीत
रूस के हमले के बीच जेलेंस्की ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भी बात की। दोनों नेताओं ने यूक्रेनी वायु रक्षा को और मजबूत बनाने पर चर्चा की। जेलेंस्की ने बताया कि ट्रंप के साथ बातचीत सकारात्मक और अर्थपूर्ण रही। यह बातचीत इसलिए भी अहम है क्योंकि अमेरिका ने यूक्रेन को भेजी जा रही सैन्य सहायता को आंशिक रूप से रोक दिया है। जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन घरेलू हथियार उद्योग को बढ़ावा देने पर काम कर रहा है, लेकिन इन योजनाओं पर अमल करने में समय लगेगा।
राष्ट्रपति जेलेंस्की ने हमले को लेकर चिंता जताई
रात के समय हुए इस हमले को लेकर आई खबरों के मुताबीक धमाकों के बाद कीव के आसमान में रोशनी फैल गई। हवाई हमले की चेतावनी देने वाले सायरन की आवाज पूरे शहर में गूंजने लगी। आपातकालीन सेवाओं में इस्तेमाल होने वाले वाहनों की नीली रोशनी ऊंची इमारतों पर पड़ रही थी। मलबे के कारण शहर की सड़कें जाम हो गई थीं। रूस के इस हमले के बाद यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा, यह एक कठोर रात थी।

रूसी सेना ने फिर किया कीव पर हमला
कीव में एक साथ घुसे 550 ड्रोन, रूस ने हमले के लिए 11 मिसाइलों का भी इस्तेमाल किया
बता दें कि रूस यूक्रेनी शहरों पर अपने लंबी दूरी के हमलों को बढ़ा रहा है। ताजा हमले के बारे में रूस की वायुसेना ने बताया कि रात के समय यूक्रेन के ठिकानों को निशाना बनाकर 550 ड्रोन लॉन्च किए गए। अधिकांश शाहिद (Shahed) ड्रोन थे। राजधानी कीव में इमारतों और अन्य ठिकानों को तबाह करने के लिए रूस ने हमले के दौरान 11 मिसाइलों का भी इस्तेमाल किया। इस हमले से कुछ ही दिन पहले रूस ने सबसे बड़ा हवाई हमला करने का दावा किया था। खबरों के मुताबिक रूस की सेना यूक्रेन के लगभग 1,000 किलोमीटर की अग्रिम पंक्ति के कुछ हिस्सों को तोड़ने का प्रयास कर रही है। यूक्रेनी सैनिक गंभीर दबाव में हैं, इसलिए मॉस्को ने यह रणनीति बनाई है।

व्लादिमीर पुतिन, वोलोदिमीर जेलेंस्की
वार और पलटवार पर दोनों देशों के अपने-अपने दावे
रूस के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि सुरक्षा बलों ने कीव में ड्रोन और अन्य सैन्य उपकरण बनाने वाली फैक्ट्रियों को निशाना बनाया। हमलों के बीच यूक्रेनी वायु रक्षा ने दो क्रूज मिसाइलों सहित 270 टारगेट (रूसी ड्रोन या मिसाइल) नष्ट करने के दावे किए हैं। खबरों के मुताबिक रूस ने आठ जगहों पर नौ मिसाइलों और 63 ड्रोनों से हमले किए। इंटरसेप्ट किए गए ड्रोनों का मलबा कम से कम 33 स्थानों पर गिरा।

एक महीने में रूस ने यूक्रेनी कस्बों और शहरों पर 330 से अधिक मिसाइलें दागीं
यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा कि राजधानी कीव के अलावा, निप्रॉपेट्रोस, सुमी, खार्किव, चेर्निहीव क्षेत्रों में भी नुकसान हुआ है। देश की वित्त मंत्री यूलिया स्विरीडेन्को ने कहा कि हमलों के बीच लोग अपने परिवार के साथ मेट्रो स्टेशनों, बेसमेंट, भूमिगत पार्किंग गैरेजों में भाग रहे हैं। राजधानी के बीचोंबीच सामूहिक विनाश हो रहा है। रूस के हमले को आतंकी कार्रवाई के अलावा और कुछ नहीं कहा जा सकता। विदेश मंत्री आंद्रेई सिबिहा ने हमले को बीते तीन साल से अधिक समय में ‘अब तक की सबसे खराब रातों में से एक’ बताया। उन्होंने इस सप्ताह की शुरुआत में कहा था कि रूसी सेना ने जून में यूक्रेनी कस्बों और शहरों पर 330 से अधिक मिसाइलें दागीं हैं। इनमें लगभग 80 बैलिस्टिक मिसाइलें थीं।

आज पुरी में बाहुड़ा यात्रा: सुरक्षा बढ़ाई गई; भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा-बड़े भाई बलभद्र के साथ मंदिर लौटेंगे
ओडिशा के पुरी में आज भगवान जगन्नाथ की बाहुड़ा यात्रा निकाली जाएगी। भगवान जगन्नाथ गुंडिचा मंदिर में एक सप्ताह बिताने के बाद आज बहन सुभद्रा और बड़े भाई बलभद्र के साथ 12वीं शताब्दी के मंदिर लौटेंगे। इसकी के साथ रथ यात्रा उत्सव का समापन हो जाएगा।
गौरतलब है कि 27 जून को भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा शुरू हुई थी। इसके दो दिन बाद 29 जून को गुंडिया मंदिर के पास भगदड़ मच गई थी, जिसमें तीन लोगों की मौत हुई थी और करीब 50 लोग घायल हो गए थे। इस भगदड़ को ध्यान में रखते हुए बाहुड़ा यात्रा के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं।
पुलिस के 6000 और सीएपीएफ के 800 जवान रहेंगे तैनात
एक अधिकारी के अनुसार, मंदिर शहर में पुलिस के 6,000 और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) के 800 जवान तैनात किए जाएंगे। ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भगदड़ जैसी कोई घटना दोबारा न हो। उन्होंने बताया कि मौसम अनुकूल होने के कारण बड़ी संख्या में लोगों के आने की उम्मीद है, जिसके चलते विशेष यातायात व्यवस्था भी की गई है।
275 सीसीटीवी कैमरे भीड़ और शरारती तत्वों पर रखेंगे नजर
अधिकारी ने बताया कि भीड़ और शरारती तत्वों पर नजर रखने के लिए 275 से अधिक एआई तकनीक से लैस सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। डीजीपी वाईबी खुरानिया खुद वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ तटीय शहर पुरी में मौजूद हैं, ताकि बाहुड़ा यात्रा को सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराया जा सके। खुरानिया ने संवाददाताओं से कहा, ‘हमने त्योहार को सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए सभी संभव उपाय किए हैं।’
दोपहर 12 बजे शुरू होगी देवताओं की पहांडी
श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) के अनुसार, देवताओं की ‘पहांडी’ या जुलूस दोपहर 12 बजे शुरू होगा। पुरी के राजा गजपति महाराज दिव्यसिंह देब दोपहर 2:30 बजे से 3:30 बजे के बीच छेरा-पोरा के नाम से जाने जाने वाले रथों की औपचारिक सफाई करेंगे। इसके बाद रथों में घोड़े जोड़े जाएंगे। शाम 4 बजे से रथ खींचने का काम शुरू होगा। इससे पहले, शुक्रवार शाम को ‘संध्या दर्शन’ अनुष्ठान के दौरान हजारों भक्तों ने गुंडिचा मंदिर में देवताओं के दर्शन किए।

टेक्सास में भारी बारिश से ग्वाडालूप नदी में बाढ़, 13 की मौत
टेक्सास में भारी बारिश के कारण अचानक नदी में आई बाढ़ से 13 लोगों की मौत हो गई। इसके अलावा, समर कैंप में भाग लेने वाली 20 से अधिक लड़कियां लापता हो गईं। तेज बहाव वाली नदी ने आसपास के इलाकों जैसे- जंगलों, कैंपग्राउंड और बस्ती वाले इलाकों को खतरे में डाल दिया है। शुक्रवार (स्थानीय समयानुसार) को राहत और बचाव टीमों ने नावों और हेलीकॉप्टर की मदद से लोगों को बचाने के लिए अभियान चलाया।
लेफ्टिनेंट गवर्नर डैन पैट्रिक के अनुसार, पीड़ितों की तलाश में अब तक 6 से 10 शव बरामद किए जा चुके हैं। पैट्रिक ने कहा, ‘कुछ वयस्क और कुछ बच्चे हैं। हम नहीं जानते हैं कि वे शव कहां से आए।’ उन्होंने टेक्सास के लोगों से अपील की कि वह घुटनों के बल बैठकर प्रार्थना करें कि हम इन छोटी लड़कियों को ढूंढ़ लें। वहीं, केर काउंटी शेरिफ लैरी लीथा ने बताया कि बाढ़ से 13 लोगों की मौत हुई है।
केर काउंटी में रातभर में लगभग 10 इंच बारिश हुई
मध्य टेक्सास के केर काउंटी में रातभर में लगभग 10 इंच (25 सेंटीमीटर) बारिश हुई, जिससे ग्वाडालूप नदी में बाढ़ आ गई। केर काउंटी शेरिफ कार्यालय ने कुछ लोगों की मौत की पुष्टि की है, लेकिन ज्यादा जानकारी नहीं दी।
मौसम विभाग ने सात इंच पानी भरने की दी थी चेतावनी
बृहस्पतिवार (स्थानीय समयानुसार) को मौसम विभाग ने चेतावनी दी थी कि कुछ इलाकों में सात इंच तक पानी भर सकता है। इसके बाद रातभर में कम से कम 30,000 लोगों के लिए बाढ़ की चेतावनी जारी की गई। टेक्सास के गवर्नर ग्रेग एबॉट ने कहा कि राज्य बाढ़ से निपटने वाले कंट्री समुदायों को संसाधन उपलब्ध करा रहा है, जिसमें केरविल, इनग्राम और हंट शामिल हैं। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वह राज्य और स्थानीय अधिकारियों की सलाह का पालन करें और बाढ़ वाले क्षेत्रों में गाड़ी चलाने से बचें।

गाजा में इस्राइल के साथ सीजफायर पर बोला हमास, नवीनतम प्रस्ताव पर ‘सकारात्मक’ जवाब दिया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि इस्राइल 60 दिन के संघर्ष विराम के लिए तैयार है, और अमेरिका इस दौरान सभी पक्षों से बातचीत कर युद्ध को खत्म करने की कोशिश करेगा। उन्होंने हमास से कहा कि वह इस प्रस्ताव को स्वीकार कर ले, इससे पहले कि हालात और बिगड़ें। हमास ने शुक्रवार को कहा कि उसने गाजा में संघर्ष विराम के नए प्रस्ताव पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। साथ ही यह भी कहा कि इस पर आगे बातचीत की जरूरत है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि हमास ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा सुझाए गए 60 दिनों के युद्ध विराम प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है या नहीं।
हमास इस बात की गारंटी मांग रहा है कि शुरुआती संघर्ष विराम के बाद युद्ध पूरी तरह समाप्त हो जाए, जो लगभग 21 महीने से जारी है। राष्ट्रपति ट्रंप इस पर समझौता कराने की कोशिश कर रहे हैं, और इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अगले सप्ताह एक समझौते पर चर्चा करने के लिए व्हाइट हाउस का दौरा करने वाले हैं।
इस्राइली हवाई हमले में 15 फलस्तीनियों की मौत
हमास के बयान से कुछ ही समय पहले शुक्रवार सुबह इस्राइल ने गाजा में हवाई हमला किया, जिसमें 15 फलस्तीनी मारे गए। इसके अलावा, एक अस्पताल ने कहा कि सहायता मांगने के दौरान गोलीबारी में 20 अन्य लोग मारे गए।
गाजा में एक महीने के अंदर 613 फलस्तीनियों की मौत
इसके अलावा, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने कहा कि उसने गाजा में एक महीने के अंदर 613 फलस्तीनियों की हत्या दर्ज की है, जब वे सहायता पाने की कोशिश कर रहे थे। संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि ज्यादातर लोग इस्राइल समर्थित अमेरिकी संगठन द्वारा संचालित खाद्य वितरण केंद्रों तक पहुंचने की कोशिश करने के दौरान मारे गए, जबकि अन्य संयुक्त राष्ट्र या अन्य मानवीय संगठनों से जुड़े सहायता ट्रकों की प्रतीक्षा में एकत्र हुए थे।
युद्ध रोकने के प्रयास जारी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि इस्राइल 60 दिन के संघर्ष विराम के लिए तैयार है, और अमेरिका इस दौरान सभी पक्षों से बातचीत कर युद्ध को खत्म करने की कोशिश करेगा। उन्होंने हमास से कहा कि वह इस प्रस्ताव को स्वीकार कर ले, इससे पहले कि हालात और बिगड़ें। वहीं, शुक्रवार देर रात हमास ने कहा कि उसने मिस्र और कतर के जरिये मध्यस्थों को अपनी ‘सकारात्मक प्रतिक्रिया’ दे दी है और वह इस प्रस्ताव को लागू करने पर बातचीत शुरू करने के लिए तैयार है। हालांकि, यह नहीं बताया गया कि किस बात पर और बातचीत करनी है।
हमास ने वार्ता के लिए रखीं हैं कुछ शर्तें
वार्ता से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि हमास की कुछ शर्तें हैं, जिनके लिए वह अनुरोध कर रहा है। हमास ने शर्तें रखी हैं कि इस्राइली सेना को 2 मार्च से पहले की स्थिति में लौटना चाहिए। संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के जरिये गाजा में पर्याप्त मदद पहुंचनी चाहिए। अगर जरूरत पड़े तो 60 दिनों के बाद भी बातचीत जारी रह सके, ताकि युद्ध पूरी तरह खत्म हो और सभी बंधक छोड़े जाएं। हालांकि, पहले भी हमास की ऐसी मांगों पर बातचीत टूट चुकी है, क्योंकि इस्राइली पीएम नेतन्याहू का कहना है कि इस्राइल हमास को पूरी तरह खत्म करने तक लड़ाई जारी रखेगा।
ट्रंप ने कहा- अगले 24 घंटों में पता चल जाएगा
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बृहस्पतिवार (स्थानीय समयानुसार) देर रात एयर फोर्स वन पर पत्रकारों से बात की। जब उनसे पूछा गया कि क्या हमास युद्ध विराम के लिए नवीनतम रूपरेखा पर सहमत हो गया है, तो इसके जवाब में ट्रंप ने कहा, ‘हम देखेंगे कि क्या होता है। हमें अगले 24 घंटों में पता चल जाएगा।’

अदालत ने कमल हासन को कन्नड़ भाषा के खिलाफ टिप्पणी करने से रोका, अगस्त में होगी अगली सुनवाई
अभिनेता कमल हासन को कन्नड़ भाषा पर कथित विवादित टिप्पणी के बाद खूब आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है। अब इस मामले में बंगलूरू की एक अदालत ने अभिनेता को कन्नड़ भाषा के खिलाफ किसी भी तरह की टिप्पणी करने से रोका है। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक बंगलुरू की एक अदालत ने शुक्रवार को एकपक्षीय अंतरिम निषेधाज्ञा पारित कर अभिनेता कमल हासन को कन्नड़ भाषा के खिलाफ कोई भी टिप्पणी करने से रोक दिया।
केएसपी द्वारा दायर मुकदमे की सुनवाई के बाद दिया आदेश
बंगलूरू की अदालत द्वारा कमल हासन को कन्नड़ भाषा पर भाषाई श्रेष्ठता का दावा करने वाले या कन्नड़ भाषा, साहित्य, भूमि और संस्कृति के खिलाफ कोई भी टिप्पणी करने, पोस्ट करने, लिखने, प्रकाशित करने से रोका गया है। अतिरिक्त शहर सिविल और सत्र न्यायाधीश ने कन्नड़ साहित्य परिषद (केएसपी) के अध्यक्ष महेश जोशी द्वारा दायर मुकदमे की सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किया। इसमें हसन के खिलाफ कन्नड़ भाषा और संस्कृति के खिलाफ कोई भी अपमानजनक बयान देने से रोकने की मांग की गई थी।
30 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
अदालत ने कमल हासन को समन जारी करने का भी आदेश दिया। इस मामले की अगली सुनवाई 30 अगस्त को होगी। अभिनेता और राजनेता कमल हासन ने अपनी फिल्म ‘ठग लाइफ’ के प्रचार कार्यक्रम के दौरान बीते दिनों कहा था कि ‘कन्नड़ का जन्म तमिल से हुआ है’। इसके बाद उनकी इस टिप्पणी पर जमकर आलोचना हुई। कन्नड़ समर्थक समूहों और सांस्कृतिक संगठनों में आक्रोश फैल गया।
ओटीटी पर रिलीज हुई ‘ठग लाइफ’
बात करें फिल्म ‘ठग लाइफ’ की तो यह फिल्म 05 जून को सिनेमाघरों में रिलीज हुई। अब यह फिल्म ओटीटी पर भी दस्तक दे चुकी है। इसे नेटफ्लिक्स पर देखा जा सकता है।

सरकार ने 50 प्रतिशत तक घटाया टोल टैक्स, इन राष्ट्रीय राजमार्गों पर मिलेगा फायदा
सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्गों के उन हिस्सों पर टोल शुल्क में 50 फीसदी तक की कमी की है, जहां पुल, सुरंग, फ्लाईओवर या ऊंचे रास्ते जैसी संरचनाएं हैं। इस कदम से गाड़ी चालकों के लिए यात्रा का खर्च कम हो जाएगा।
टोल शुल्क के नए नियम
राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल प्लाजा पर शुल्क 2008 के एनएच शुल्क नियमों के आधार पर लिया जाता है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने इन नियमों में बदलाव किया है और टोल शुल्क की गणना के लिए एक नया तरीका या फॉर्मूला लागू किया है।

2 जुलाई 2025 को जारी अधिसूचना में कहा गया है कि अगर राष्ट्रीय राजमार्ग का कोई हिस्सा ऐसी संरचनाओं से बना है, तो शुल्क की गणना के लिए या तो उस संरचना की लंबाई को दस गुना करके राजमार्ग की बाकी लंबाई में जोड़ा जाएगा, या फिर राजमार्ग के कुल हिस्से की लंबाई को पांच गुना किया जाएगा। इनमें से जो भी कम होगा, उसी के आधार पर शुल्क लिया जाएगा। यहां ‘संरचना’ से मतलब है कोई स्वतंत्र पुल, सुरंग, फ्लाईओवर या ऊंचा राजमार्ग।

नए टोल शुल्क का उदाहरण
मंत्रालय ने नए टोल शुल्क को समझाने के लिए कुछ उदाहरण दिए हैं। एक उदाहरण में बताया गया है कि अगर राष्ट्रीय राजमार्ग का कोई हिस्सा 40 किलोमीटर लंबा है और यह पूरी तरह से किसी संरचना से बना है, तो न्यूनतम लंबाई की गणना इस तरह होगी: संरचना की लंबाई को दस गुना करें, यानी 10 x 40 = 400 किलोमीटर, या फिर राजमार्ग के कुल हिस्से की लंबाई को पांच गुना करें, यानी 5 x 40 = 200 किलोमीटर। टोल शुल्क की गणना कम लंबाई, यानी 200 किलोमीटर के आधार पर होगी। इसका मतलब है कि इस मामले में टोल शुल्क सड़क की आधी लंबाई, यानी 50 फीसदी पर ही लिया जाएगा।

पुराने नियम और बदलाव की वजह
पहले के नियमों के मुताबिक, राष्ट्रीय राजमार्गों पर हर किलोमीटर की संरचना के लिए सामान्य टोल शुल्क का 10 गुना शुल्क देना पड़ता था। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पुराना टोल गणना का तरीका ऐसी संरचनाओं के निर्माण की ज्यादा लागत को पूरा करने के लिए बनाया गया था। लेकिन अब सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की नई अधिसूचना ने फ्लाईओवर, अंडरपास और सुरंग जैसे हिस्सों के लिए टोल शुल्क को 50 फीसदी तक कम कर दिया है।

तीन घंटे रुकी यात्रा, गंगोत्री-यमुनोत्री-बदरीनाथ हाईवे बाधित; रुद्रप्रयाग में भारी बारिश की चेतावनी
बारिश के कारण शुरू हुई दुश्वारियां रुक नहीं रही हैं। शुक्रवार को भी भूस्खलन और मलबा आने के कारण केदारनाथ यात्रा तीन घंटे के लिए रोकनी पड़ी। गंगोत्री, यमुनोत्री और बदरीनाथ हाईवे भी बाधित रहे। प्रदेश में एक राष्ट्रीय राजमार्ग समेत कुल 79 सड़कें बंद हैं।
गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग पर छौड़ी गदेरे में पहाड़ी से बोल्डर और मलबा आ गया। इस कारण करीब तीन घंटे तक यात्रा बंद रही। इस दौरान यात्रियों को गौरीकुंड में ही रोका गया, जबकि केदारनाथ से लौट रहे यात्रियों को भीमबली और जंगलचट्टी में रोका गया। पूर्वाह्न 11 बजे के बाद पैदल यात्रा दोबारा शुरू हो पाई।
चमोली जिले में बदरीनाथ हाईवे पर उमट्टा भूस्खलन क्षेत्र में मलबा आने से शुक्रवार सुबह करीब दो घंटे यातायात बंद रहा। यमुनोत्री हाईवे पिछले छह दिनों से बंद पड़ा है। भटवाड़ी के पपड़गाड के पास गंगोत्री हाईवे का करीब 25 मीटर हिस्सा एक बार फिर धंस गया, जिससे लगभग आठ घंटे तक आवाजाही बंद रही।
रुद्रप्रयाग में भारी बारिश की चेतावनी
मौसम विभाग ने शनिवार को बागेश्वर और रुद्रप्रयाग जिले में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। देहरादून, पिथौरागढ़, नैनीताल और चमोली जनपद में तेज बारिश का यलो अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के मुताबिक आज पर्वतीय जनपदों में तेज बारिश होने के आसार हैं
गलवान झड़प के बाद पहली बार चीन जाएंगे एस जयशंकर
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बाद अब विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर भी अगले सप्ताह चीन की यात्रा पर जाएंगे। सूत्रों के अनुसार, वह 13 जुलाई से तीन दिवसीय दौरे पर बीजिंग और तिआनजिन पहुंचेंगे, जहां वह शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेंगे। इस वर्ष एससीओ की अध्यक्षता चीन कर रहा है।
यह दौरा विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह गलवान घाटी की हिंसक झड़प (जून 2020) के बाद जयशंकर की पहली चीन यात्रा होगी। इससे पहले वे अपने चीनी समकक्ष से विभिन्न बहुपक्षीय मंचों पर मिलते रहे हैं, लेकिन यह दौरा द्विपक्षीय संबंधों की बहाली की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
पांच साल में पहली बार प्रतिनिधिमंडल स्तर पर बैठक
विदेश मंत्री का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत-चीन संबंधों को सामान्य करने की दिशा में कई उच्चस्तरीय मुलाकातें हो चुकी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अक्टूबर 2023 में रूस के कजान में ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान हुई द्विपक्षीय बैठक ने इस प्रक्रिया को गति दी। यह बैठक पांच वर्षों में पहली बार प्रतिनिधिमंडल स्तर पर हुई थी।
डोभाल और राजनाथ भी कर चुके हैं चीन का दौरा
बैठक के दौरान पीएम मोदी ने स्पष्ट किया था कि भारत-चीन संबंधों को तीन “परस्परों” परस्पर विश्वास, परस्पर सम्मान और परस्पर संवेदनशीलता के आधार पर आगे बढ़ाया जाना चाहिए, ताकि यह संबंध सकारात्मक दिशा में लौट सकें और टिकाऊ बन सकें। इसके बाद राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बीजिंग का दौरा किया और विभिन्न जटिल मुद्दों पर गहन चर्चा की।
हंगामेदार होगा संसद का मॉनसून सत्र! कांग्रेस चाहती है सरकार भारत-चीन संबंधों पर करे चर्चा
संसद का मॉनसून सत्र हंगामेदार होने की संभावना है। दरअसल कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा है कि वे संसद के मॉनसून सत्र में भारत-चीन संबंधों पर चर्चा की मांग करेंगे। मॉनसून सत्र 21 जुलाई से शुरू होगा। उन्होंने यह बात एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी के उस खुलासे के बाद कही है जिसमें उन्होंने बताया कि चीन ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान एयर फोर्स की किस तरह मदद की थी। जयराम रमेश चाहते हैं कि मोदी सरकार इस मुद्दे पर बात करे ताकि भारत चीन-पाकिस्तान से आने वाली चुनौतियों का मिलकर सामना कर सके।
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर एक पोस्ट किया। उन्होंने लिखा कि लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर. सिंह ने सार्वजनिक रूप से इस बात की पुष्टि की है कि ऑपरेशन सिंदूर को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के कहने पर अचानक क्यों रोक दिया गया था। लेफ्टिनेंट जनरल सिंह ने बताया कि चीन ने पाकिस्तान एयर फोर्स की असाधारण तरीके से मदद की थी। यह वही चीन है जिसने 5 साल पहले लद्दाख में सब कुछ बदल दिया था, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने 19 जून, 2020 को उसे सार्वजनिक रूप से क्लीन चिट दे दी थी।
जयराम रमेश ने आगे कहा कि कांग्रेस पिछले पांच सालों से संसद में भारत-चीन संबंधों पर चर्चा की मांग कर रही है, लेकिन मोदी सरकार हमेशा से इस बात से इनकार करती रही है। कांग्रेस आने वाले मॉनसून सत्र में भी यह मांग जारी रखेगी। यह सत्र 21 जुलाई से शुरू होने वाला है।
भारत ने पाकिस्तान के साथ अपने मुद्दों में किसी भी तरह की मध्यस्थता से इनकार कर दिया है। भारत का कहना है कि पाकिस्तान के DGMO (डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस) ने अपने भारतीय समकक्ष को फोन किया था, जिसके बाद ऑपरेशन सिंदूर में लड़ाई बंद हो गई थी। जयराम रमेश ने यह भी कहा कि हाल ही में चीन ने कुनमिंग में पाकिस्तान और बांग्लादेश के साथ एक त्रिपक्षीय बैठक की थी। उन्होंने कहा कि भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा रिकॉर्ड स्तर पर है, सीमा पर जो समझौता हुआ है, वह पहले जैसी स्थिति को बहाल नहीं करता है।




