गौरीशंकर अग्रवाल
सम्मेद शिखर जी को बचाने के लिए सकल जैन समाज की कुल आबादी मात्र 1 करोड़ के लगभग ..
1 करोड़ की जनसंख्या में से 50 लाख जनसंख्या तो काठी जैन धर्मावलंबियों की है जिसमें श्वेताम्बर और दिगंबर पंथी माने जाते हैं .
शेष 50 लाख की जनसंख्या जैन धर्म से संबंधित तो नहीं है पर जैन सिधांतो को मानने वाले जैसे – अग्रवाल जैन, खंडेलवाल जैन, पालीवाल जैन इत्यादि है. जो जैन अल्पसंख्यकों की गिनती में नहीं आते..
इस वर्ग में हजारों लोग वह भी शामिल हैं जो .. … अनुसुचित, अनुसुचित जनजाति और ओबीसी वर्ग के भी हैं जो जैन सीधांतों का पालन तो करते हैं पर आरक्षण वर्ग से है.
जैनधर्म में मुख्यतः दो धाराऐं मानी जाती है – दिगंबर व श्वेतांबर
ऐसा नहीं जैन धर्म की इन दो धाराओं में हिन्दू धर्म की जैसे अलग अलग टोले नहीं हो…
दिगंबर जैनों में.. तैरापंथी, मंदिर मार्गी, मंदिर को मानने वाले . संत आचार्य तरुण सागर जी के पंथी….
ऐसे एकदर्जन से भी अलग अलग टोले है…
श्वेताम्बरधरा में… खतरगच्छ, जिनसूरीजी दादा गुरु देव पंथी श्रीश्री माल
आड़ी, सीधी मुख पट्टी वाले पंथी, आचार्य तुलसी के अणुवर्त पंथी आदि एक दर्जन से ज्यादा पंथ..
सकल जैन समाज ने एक अहिंसक लडाई लड़कर अपने धार्मिक स्थान श्री सम्मेद शिखर जी को पर्यटन स्थल बनाने से बचाने में सफल रहे…
इसके लिए सकल जैन समाज वंदनीय है.
इसके विपरीत हिन्दू धर्म के विभिन्न मठ के शंकराचार्य….
हजारों धाम, सेंकडो अखाड़े, हजारों आश्रम, सेंकडो धर्म बचाओ सैना
आरएसएस जैसी करोड़ों स्वयंसेवको जैसी हिन्दू संस्था……
जिसका एक घटक विश्व हिन्दू परिषद….
इन संस्थोओं से संबंधित प्रधानमंत्री जो विकास पुरुष कहलाता है..
इस विकास पुरुष के नेतृत्व में ……
सेंकडो साल पुराने मंदिर को तोडकर विकास के नाम पर काशी विश्वनाथ और अयोध्या जैसे धार्मिक आस्था के प्रतीक पुरातन नगरों को पर्यटन केंद्र बनाकर विदेशों को समर्पित करने पर एक भी संगठन ने अपना विरोध दर्ज नहीं कराया…
अयोध्या राममंदिर का शिलान्यास, उज्जैन महाकाल तथा काशी विश्वनाथ के कारीडोर का उद्घाटन भी कोई शंकराचार्य द्वारा ना होकर प्रधानमंत्री द्वारा किया जाता है सबके मुहं में दही जम गया.
खैर अब हिन्दुओ को हनीमून मनाने स्विट्जरलैंड जाने की, कोट्यो जाने की कोई आवश्यकता नहीं आदरणीय हीरासन जी ने समस्त सुविधाएं इन्ही धार्मिक स्थलों पर उपलब्ध करवा दी है.
विदेशी जोडों के मोजमस्ती के केंद्र गोवा के अलावा यह पर्यटन केंद्र भी उनके स्वागत के लिए तैयार है.
इन धार्मिक आस्था के केंद्रो का भविष्य क्या होगा यह भविष्य के गर्भ में है.
उत्तराखंड का विकास सामने है…. जोशी मठ दरक रहा है .. जोशी मठ बद्रीनाथ धाम व केदारनाथ धाम का प्रवेश द्वार कहलाता है.
जोशी मठ ही नहीं रूद्र प्रयाग व कर्ण प्रयाग तक धसने लगा है.
लेह में सैना के 20 हजार जवान जो चीन की शरहद पर तैनात थे पहाड़ी के धसने के कारण अन्य जगह सिफ्ट हो रहे हैं..
एक दो दिन से बारिश लगातार जारी है इस बारीश का पानी दरारों में जा रहा है विकास के माडल का दुष्परिणाम अगले दस दिनों की बारिश से सामने आ जाएंगे.
सांप मर जाने के बाद लाठी कूटने वाले … वैज्ञानिक और पारिस्थितिकी विशेषज्ञ इस बात को लेकर आशंकित है…..
विकास के लिए की जा रही बे लगाम गतिविधियों से उत्तराखण्ड के अन्य शहर और गांव भी प्रभावित हो सकते हैं.
आज की खबर के अनुसार बागपत के भी दसियों मकान दरक रहे हैं…
क्या सुपारी मीडिया के नजरों विकास का पैमाना… ऊंचाई वाली मुर्तिया बनाना…….. धार्मिक स्थलों का पुरातन ढांचा ध्वंस कर पर्यटन स्थल बनाना ….. हेरिटेज नगरों को स्मार्ट सिटी बनाना… बड़े बड़े टर्मिनल बनाना ही रह गया है..
सुपारी मीडिया हीरासन से कब पूछना शुरू करेगा… हर सांसद विधायक द्वारा गोद लिए गांवों का क्या हुआ वह आठ साल से गोद में ही खैल रहे हैं या बड़े भी हुए…
बहुत हुआ……. अबकी बार मोदी सरकार..
वादे तो बहुत थे जिनको 2022 तक पूरे हो जाने थे पर उन वादों ने 2047 के लिए लंबी छलांग लगाली…
खैर अब्दुल को टाइट करते रहो…. राहुल की टी शर्ट, जूते, क्या क्या बोला उसको एडिटेड करके दिखाते रहो…
जब ही तो सुपारी मिलेगी..
निरक्षर भट्टाचार्य के अंगुठा से![]()





