सुसंस्कृति परिहार
बंगाल राज्य भारत के अन्य प्रदेशों से एकदम अलग थलग है । आज़ादी के इतिहास में अपना अमूल्य योगदान देने में जहां यहां तमाम कौमों ने मिलकर संघर्ष किया।सभी मज़हबी लेखकों ने तमाम देश को एकता का संदेश दिया। यहां के सांस्कृतिक उत्सव खासकर काली पूजा दुर्गोत्सव पूरे देश में लोकप्रिय हुए ।साथ ही साथ बांग्ला पहनावा और चूड़ी आज भी सिर चढ़कर बोल रही है । रवीन्द्र नाथ टैगोर का राष्ट्रगान हो या वंकिम चट्टोपाध्याय का वन्देमातरम की गूंज भारत ही नहीं विश्व में सुनाई देती है ।जय हिन्द भी देश की सरज़मी पर बुलंद है। हां 2014के बात जय भारत भी कहा जाने लगा है लेकिन जय हिन्द हमें नेताजी सुभाषचंद्र बोस से जोड़ कर रखे हुए है ।पहले नोबल पुरस्कार के लिए बंगाल को ही श्रेय जाता है। रसोगुल्ला हो या संदेश आदि की मिठास सारे हिंदुस्तान में महसूस की जाती है ।माछ भात और मिष्ठी का भी कोई जोड़ नहीं।
बंगाल ही वह पहली शैक्षणिक और औद्योगिक भूमि रही है जहां बड़ी तादाद में लोग अध्ययन करने और रोजगार पाने जाते रहे हैं। बंगाल ने देश को जादू टोना से मुक्ति, बाल-विवाह से मुक्ति और विधवा विवाह जैसे महत्वपूर्ण काम कर देश को नई दिशा दी। गांधी जी का नोआखोली का संदेश आज भी यहां मौजूद है । बंगाल में बंगाली अस्मिता के साथ भारतीय संस्कृति ख़ूब फली फूली ।वाम और कांग्रेस ने भी इस एका को सिंचित किया और मज़बूती दी ।
लेकिन बंगाल में ममता की सरकार में अप्रत्यक्ष तौर पर भाजपाई चाल चरित्र और चेहरे वालों के प्रवेश के बाद बंगाल के चेहरे को हिंदुत्व वादी बनाने की कोशिशें होती रहीं जिन पर जनता ने भरोसा जताया और यही लोग ममता का साथ छोड़ भाजपा में आज शामिल हैं। बंगाल के समझदार मतदाताओं ने दो चरणों में ही भाजपा की हकीकत समझ ली और उनके ख़िलाफ़ तीसरे चरण से खड़े हो गए हैं। इसके बावजूद भाजपा ने बिहार ,झारखंड और उत्तर प्रदेश के लोगों के बीच बंगाल और अप्पन देस के ऐसे जहरीले बीज बो दिए गए हैं जो आगे चलकर ख़तरनाक हो सकते हैं।लगता है दूसरे हिंदी प्रदेशों से आने वाले लोगों को प्रभावित करने योगी और मोदी की बड़े पैमाने पर सभाएं की जा रही हैैं ।ये सत्य है बंगाल में अपनी पेट पूजा की ख़ातिर आए लोग इस बार अपने देस की ओर आशा भरी नज़रों से देखते हुए भाजपा को जिताने का संकल्प लिए हैं।वे विधानसभा क्षेत्र जिनमें ये बहुलता से हैं, भाजपा को आसानी से जीतने की संभावना दिखाई दे रही है किंतु सरकार बनती नज़र नहीं आती ।
बहरहाल रोटी देने वाला बंगाल आने वाले कल में कहीं महाराष्ट्र, गुजरात जैसा फैसला लेकर इन परदेसियों को खदेड़ना ना शुरू कर दे। भाजपा द्वारा जिन विषैले बीजों का बंगाल में रोपण किया गया है वह दुखद है।देश की एका को तोड़ने वाला है यह विभाजक रेखा बाहर से आए लोगों के लिए दुखदाई ना बन जाए इस बारे ज़रुर सोचना चाहिए ।ममता को मुसलमान बताना और बंगाल को पाकिस्तान बनाने वाले उनके विचारों को जिस तरह चुनाव में जनता ने नकारा है उसी तरह बंगाल में सदियों से रह रहे परदेशियों को सोचना होगा।तभी बंगाल ही नहीं बल्कि तमाम देश खुशहाल होगा।कुछ सीट जीतने की प्रत्याशा में बंगाल से इतना ख़फ़ा होना ठीक नहीं। चुनाव को चुनाव की तरह लेना ही हितकर है। विचारधाराओं में फर्क होना स्वाभाविक है पर अपनी रोजी रोटी का ख्याल भी लाज़मी है।उम्मीद है बंगाल इस घाव पर मरहम लगा लेगा।शुभास्तु ।





