रीवा। नारी चेतना मंच ने कहा है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान लंबे समय से महिलाओं से मामा भांजी और भाई बहन के रिश्ते जोड़कर उनका भावनात्मक शोषण कर रहे हैं। सरकार के पास ऐसी कोई ठोस योजना नहीं है जो बड़े पैमाने पर महिलाओं को स्वाबलंबी जीवन दे सके। गरीब लड़कियों को शिक्षित बनाकर उन्हें पैरों पर खड़ा होने देने के बजाय मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के अंतर्गत उनकी शादी कराकर झूठी वाही लूटी जाती है । देखने को मिलता है कि ऐसे लाखों शादीशुदा जोड़ों के पास कोई रोजगार नहीं होता है जिसके चलते उनका आगे का जीवन काफी कठिन हो गया है। अभी तक प्रदेश में लाखों शादियां हुई लेकिन वर वधु में से किसी को भी सरकारी या गैर सरकारी नौकरियों में जगह नहीं मिली। बेरोजगारी की स्थिति में शादी होने के चलते गृहस्थी का बोझ भी बढ़ जाता है जिसके चलते बड़े पैमाने पर शादीशुदा जोड़े आर्थिक तंगी और गृह कलह के शिकार बने हुए हैं। बच्चा पैदा होने की स्थिति में उनकी आर्थिक हालत बेहद खराब हो गई है।
नारी चेतना मंच की नेत्री सुशीला मिश्रा , डॉ श्रद्धा सिंह , शारदा श्रीवास्तव एवं खुशी मिश्रा ने कहा है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के द्वारा इधर 23 वर्ष से लेकर 60 वर्ष तक की महिलाओं को ₹1000 प्रतिमाह देने किया गया ऐलान ,महज चुनावी लॉलीपॉप है। लंबे समय से शिवराज सरकार के भावनात्मक शोषणकारी बातों से महिलाओं की भारी नाराजगी को देखते हुए उन्हें लाली पाप दिखाया जा रहा है । वर्तमान में यह बात भागते भूत की लंगोटी भली की कहावत को चरितार्थ कर रही है। मुख्यमंत्री के द्वारा महिलाओं के लिए रोजगार की कोई ठोस व्यवस्था बनाने की जगह इस तरह का लॉलीपॉप चुनावी प्रलोभन ही कहा जा सकता है। प्रदेश में महिलाओं के साथ होने वाले अपराध, घरेलू हिंसा, दुष्कर्म के मामले थमते नजर नहीं आ रहे हैं। नारी चेतना मंच की नेत्रियों ने कहा है कि प्रदेश में एक करोड़ से भी अधिक युवा बेरोजगारी का शिकार बने हुए हैं, ऐसी स्थिति में उनको नजरअंदाज करके ऊंट के मुंह में जीरा वाली योजनाएं शुरू की जा रही हैं जिससे किसी का भला होने वाला नहीं है। नारी चेतना मंच ने कहा कि यदि युवा पीढ़ी के पास वैकल्पिक रोजगार की व्यवस्था बन जाएगी तो उन्हें घर बसाने के लिए किसी के आश्रित नहीं होना पड़ेगा। शिक्षित लड़कियां भी बड़े पैमाने पर बेरोजगारी से जूझ रही हैं लेकिन सरकार सिर्फ लॉलीपॉप दिखा रही है।





