सतना। शिक्षकों की कमी से जूझ रहे ग्रामीण स्कूलों की शैक्षणिक व्यवस्था पूरी तहर चौपट हो चुकी है।इससे ग्रामीण स्कूल के बच्चे क्लास छोड़ आंदाेलन की राह पर चल पड़े हैं। सांसद गणेश सिंह के पैतृक गांव खम्हरिया िस्थत शासकीय हायर सेकंडरी स्कूल के छात्र छात्राएं स्कूल में शिक्षकों की पदस्थापना की मांग को लेकर सड़क पर उतर आए। स्कूल में शिक्षक न होने से आक्रोशित छात्रों ने स्कूल के प्रवेश द्वार पर ताला लगाते हुए हाथ मे दफि्तया लेकर सड़क पर बैठ गए। छात्रों ने शिक्षकों की नियुक्ति की मांग को लेकर स्कूल के बाहर चार घंटे तक प्रदर्शन किया।
छात्र बोले सिर पर परीक्षा, पढ़ाने वाला कोई नहीं
स्कूल में तालाबंदी की जानकारी लगते ही डीइओ ने जिला मुख्यालय से टीम भेजी जिसमें सहायक संचालक शिक्षा एनके सिंह, डीपीसी वीके त्रिपाठी, बीइओ व बीआरसीसी रामपुर शामिल रहे। अधिकारी खम्हरिया स्कूल पहुंच कर धरने पर बैठे छात्रों से उनकी समस्या पूछी। छात्रों ने बताया की स्कूल में कक्षा एक से 12वीं तक कुल 300 छात्र अध्ययन रत हैं। जिन्हें पढ़ाने के लिए मात्र छह शिक्षक पदस्थ्य किए गए हैं। स्कूल में हिन्दी, भौतिकशास्त्र, संस्कृत तथा समाजिक विज्ञान विषय का एक भी शिक्षक नहीं हैं। जिससे इन विषयों की पढ़ाई शुरू नहीं हो सकी। छह माह बीत जाने के बाद भी शिक्षकाें की नियुक्ति नहीं हुई। अद्ध वार्षिक परीक्षा सिर पर है लेकिन अभी हिन्दी जैसे विषय की पढ़ाई शुरू नहीं हुई। ऐसे में छात्र परीक्षा में क्या लिखेगे। छात्रों ने अधिकारियों से स्कूल में विषयवार शिक्षक नियुक्त करने की मांग की।संकुल
प्राचार्य को सौंपी जिम्मेदारी
सहायक संचालक एनके सिंह ने गोरइया संकुल प्राचार्य राजीव शुक्ला को खम्हरिया स्कूल में विषयवार शिक्षक उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा की जब तक स्थाई शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हो तब तक संकुल के अन्य स्कूलों में पदस्थ शिक्षकों को खम्हरिया स्कूल में अटैच किया जाए। जो सप्ताह में तीन दिन इस स्कूल में क्लास लेगे।
4 विषय के शिक्षक नहीं
खम्हरियां गांव के बच्चों को स्कूल शिक्षा गांव में ही मिल सके। इसके लिए उन्हाेंने गांव में माध्यमिक शाला का उन्नयन हायर सेकंडरी के रूप में कराया। स्कूल भवन बनवाने बजट भी दिलवाया, लेकिन शिक्षा विभाग के अधिकारी स्कूल को शिक्षक उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैँ। खम्हरिया विद्यालय में मात्र 6 शिक्षक पदस्थ्य है। जिन पर कक्षा एक से 12 तक के बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी है। स्कूल की उच्चरत कक्षाओं में पढ़ने के लिए मात्र तीन शिक्षक पदस्थ्य है। जिन पर लिपिक से लेकर भृत्य तक की जिम्ममेदारी है। स्कूल में हिन्हीं,सामाजिक विज्ञान, भौतिकशास्त्र एवं संस्कृत का एक भी शिक्षक नहीं है। इसलिए चालू शिक्षा सत्र में अभी तक उक्त विषयों की क्लास ही शुरू नहीं हो सकी।





