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गुलामी का पर्याय बनी है बकस्वाहा जंगल क्षेत्र की 15पंचायतें

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बंदर हीरा उत्खनन क्षेत्र की 15 पंचायतें आज भी गुंडों के हवाले है। ये गुंडे कोई और नहीं भाजपा द्वारा पालित पोषित हैं ।अपने स्वार्थ में अंधे इन गुंडों में भाजपा और कांग्रेस दोनों पार्टियों के लोग शामिल हैं। रियो टंटो कंपनी द्वारा किए गए सर्वे के दौरान काम पर रखे गये लोगों को विदेशी दर पर मिले वेतन व भत्ता को ध्यान मे रख कर हीरा उत्खनन के लिए सरकार से अधिक बिडला ग्रुप से भी कुछ इसी तरह की उम्मीद लगाए बैठे क्षेत्रीय लोगों, जिनमें यादव समाज के लोगों की संख्या अधिक है,द्वारा हर उस आंदोलन कारी को काले झंडे दिखाए जा रहे हैं ,जो परियोजना के नाम पर काटे जा रहे पेड़ बचाने की मुहिम चलाते हुए परियोजना इस क्षेत्र मे आते हैं। 

         बकस्वाहा जंगल बचाओ आंदोलन के ट्रैक्टर से जा रहे कार्य कर्ताओं को निमानी गांव में सड़क जाम कर काले झंडे दिखाने व गाली गलौज कर आंदोलन के राष्ट्रीय संयोजकश्री ईश्वर चंद्र त्रिपाठी जी के कपडे उतारने का दुस्साहस करनेवाले निमानी गांव के पूर्व सरपंच जगदीश यादव, कांग्रेसी नेता मिलन यादव, बहादुर यादव सहित सैकडों लोगों ने साथ में चल रही महिलाओंं से अश्लील और यौन उत्पीड़न करने वाली शब्दावली का उच्चारण कर उन्हें अपमानित करने का अपराध किया गया। इस दौरान धैर्य का परिचय देते हुए सभी कार्य कर्ताओं ने मौन धारण कर लिया गया। इस दौरान मिलन यादव, जगदीश यादव, बहादुर यादव सहित दर्जनों लोगों ने झगड़ा करने का प्रयास किया गया। 100नंबर पुलिस को फोन करते समय इस तरह शोर मचाया गया और सीटी बजा कर महिलाओं को गंदे इशारे किए गये उनके वीडियो बनाए गए, जिससे हम पुलिस की मदद नहीं ले पायें। किसी तरह पुलिस को फोन कर पाये कि कुछ देर बाद ही वन विभाग के एस.डी.ओ. गुप्ता आकर उन गुंडों की वकालत कर हमें उनकी संख्या अधिक होने का भय दिखा कर सतना लौट जाने की सलाह देने लगे।आंदोलन के नेता ईश्वर चंद्र त्रिपाठी ने उनको समझाने का प्रयास भी किया गया परंतु उनके साथ आये रेंजर डिप्टी रेंजर गुंडों की भाषा बोल अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर काम करने को तत्पर दिखे। उनके आने से गुंडों का मनोबल और अधिक बढ़ता दिखा।       

  निमानी के इन गुंडों की सारी जानकारी देते हुए आंदोलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा.सदाचारी सिंह तोमर तथा बुन्देलखंड प्रभारी पं.दिलीप शर्मा ने व्हाट्सएप से छतरपुर कलेक्टर व एस.पी को सूचना देने के बाद आज धरने के तीसरे दिन भी पुलिस प्रशासन का कोई नुमाइंदा नहीं आया।     

     अफसोस समाचार पत्रों व इंटेलिजेंस रिपोर्ट के बाद भी कलेक्टर और एस.पी की यह उदासीनता एकबडे षडयंत्र का हिस्सा समझ में आती है। बकस्वाहा जंगल बचाओ आंदोलन की ओर से कलेक्टर ,एस.पी, एस.डीएम आदि सभी संबंधित थाना प्रभारियों को लिखित सूचना देने के बाद भी जंगल और पर्यावरण बचाने की मुहिम चलाने वाले पदयात्रियों को यह जानते हुए भी कि परियोजना क्षेत्र मे प्रवेश करने पर स्थानीय लोगों द्वारा गुंडागर्दी की जायेगी,संबंधित थाना प्रभारी द्वारा आंदोलन कारियों को सुरक्षा उपलब्ध नहीं कराना पुलिस प्रशासन की बड़ी चूक है और इसकी न केवल जांच होनी चाहिए वरन् सभी संबंधितों के खिलाफ अपराधिक मुकदमें भी दर्ज होना चाहिये। आंदोलन के नेता और उनके साथियों ने प्रशासन व पुलिस को चेतावनी भी दी है कि यदि आरोपियों पर अपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं हुआ तो धरना आमरण अनशन में बदल जायेगा।     

   आज जबकि देश आजादी की 74वीं सालगिरह मनाने जा रहा है तब लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत शांति पूर्ण आंदोलन कर रहे पर्यावरण प्रेमियों व समाजसेवी किसान नेताओं को सरकार सड़क पर चलने नहीं दिया जा रहा है।आखिर क्यों ?  पश्चिम बंगाल सरकार के गुंडागर्दी के खिलाफ फैसला सुनाने वाली बडी अदालतों को क्या यह गुंडागर्दी भी दिखेगी ?          कहना न होगा कि हीरा कंपनी में अपनी नौकरी के लिए जंगल नहीं कटने देने के पक्ष में खड़े आदिवासियों को आंदोलन कारियों से दूर रखने के लिए लोगों को बाहरी बता कर डराने धमकाने काले झंडे दिखाने सडकों पर नहीं चलने देनेवाले और जंगल कटाई का विरोध कर रहे लोगों के साथ मार-पीट की घटनाओं के बाद भी पुलिस प्रशासन के निकम्मेपन को जाहिर करता है। आज पूर्व सरपंच जगदीश यादव ने पुलिस की मौजूदगी के बाद भी नेता, पत्रकार वरिष्ठ समाज सेवी श्री ईश्वर चंद्र त्रिपाठी के साथ अभद्रता किया !जिससे जाहिर होता है कि जगदीश यादव, मिलन यादव जैसे लोगों को विधायक व मंत्री के जरिए कलेक्टर व एस.पी.से अभयदान प्राप्त है।   

स्पष्ट है बकस्वाहा जंगल क्षेत्र के यादव समुदाय के लोग आज भी वहां के मूल निवासियों के साथ अत्याचार कर रहे है। दुर्भाग्य पूर्ण यह कि रामराज का दावा करनेवाले और पंश्चिम बंगाल में सत्ता रूढ दल पर भाजपा कार्यकर्ताओ के उत्पीड़न का रोना रोने वाली म.प्र. की भाजपा सरकार को बकस्वाहा में अपने कार्यकर्ताओं की गुंडागर्दी नहीं दिखती ! आखिर क्यों ? बकस्वाहा जंगल बचाओ आंदोलन के नेता श्री ईश्वर चंद्र त्रिपाठी का सवाल है कि क्या इस स्वतंत्रता दिवस पर बकस्वाहा क्षेत्र मे लोग आजादी के साथ कभी भी किसी से मिल सकेगें ?                सोशल मीडिया में जंगल बचाने वालोँ की यूं तो भारी भीड़ है,लेकिन बकस्वाहा जंगल बचाओ आंदोलन के असली योद्धा हैं ईश्वर चंद्र त्रिपाठी और उनके साथ गांधी आश्रम छतरपुर से बकस्वाहा तक पैदल यात्रा पर आये उनके साथी अरुण मिश्रा ,रामकिशोर केवट ,चौरसिया चौधरी व आरती केवट। ये सभी बकस्वाहा जंगल क्षेत्र जाते समय निमानी मे गांव वासियों द्वारा रोक दिये जाने के बाद वहीं पर धरना पर  बैठ गये हैं, उनके धरना आंदोलन का आज तीसरा दिन  है

।- ईश्वर चंद्र त्रिपाठी

,संपर्क-72475 94063राष्ट्रीय संयोजक बकस्वाहा जंगल बचाओ आंदोलन,छतरपुर, भारत         

 ‘मुझे बहुत दुख हुआ यह पढकर की बदमाशों की कोई जाति धर्म नहीं होता । ऐसे लोगों को तो बस दंगा फसाद के अलावा और कुछ नहीं चाहिए । ऐसे लोग मानवता के दुश्मन होते हैं । ऐसे लोगों को तो कड़ी से कड़ी सजा मिलनी ही चाहिए । जो अपने समाज को भी कलंकित करते हैं । ऐसे लोग इनसान के रूप में भेडिये होते हैं ।मुझे शर्म आ रही है अपने पर कि बदकिस्मती से मैं भी उन्ही के समाज से हूँ ।
       -राजन सिंह यादव ,संपर्क-84750 27550  

     इस देश के सभी प्रबुद्धजनों, पर्यावरहितैषी लोगों से एक मार्मिक अपील..   

       आप उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्यप्रदेश, राजस्थान, हरियाणा आदि राज्यों के प्रबुद्ध और पर्यावरणहितैषी लोगों तथा यादव समाज के पुरोधाओं से अपील है कि आप सभी लोग बक्सवाहा जंगल बचाओ आंदोलन के नायकों और वीरांगनाओं को अपमानित और अश्लील हरकत करनेवाले यादव कुलकलंक मिलन यादव,जगदीश यादव और बहादुर यादव सहित उन सैकड़ों गुँडों और समाज के कलंक तथा पर्यावरण के दुश्मनों की पुरजोर विरोध व भर्त्सना करें..और इस समस्त देश तथा मध्यप्रदेश सहित अन्य राज्यों के भी यादव समाज के प्रबुद्ध और पर्यावरणहितैषी लोग बक्सवाहा जंगल बचाओ आंदोलन में सशरीर उपस्थित होकर इन गुँडे और असामाजिक तत्वों को हर तरह से सबक सिखाएं…
-निर्मल कुमार शर्मा, ‘

गौरैया एवम पर्यावरण संरक्षण ‘,प्रताप विहार,गाजियाबाद,

Ramswaroop Mantri

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