बच्चे पर फ़िल्मों का बड़ा असर था। उसे लगता था, स्मगलर बहुत बड़ा आदमी होता है। वह बड़ा होकर स्मगलर बनना चाहता था और अपनी इस इच्छा को वह सबके सामने बड़े गर्व से प्रकट करता था। एक दिन वह अंग्रेज़ी के किसी आसान से शब्द का अर्थ नहीं बता पाया तो सहज भाव से दो साल बड़ी बहन ने कहा – इत्ती-सी अंग्रेज़ी तो आती नहीं, बनेगा स्मगलर! स्मगलरों को तो अंग्रेज़ी में बात करनी पड़ती है।
बच्चे ने कुछ देर सोचा, फिर बोला – बन गया तो ठीक है, न बना तो प्रमुख समाजसेवी बन जाऊँगा, वे भी तो बहुत बड़े आदमी होते हैं।
– तुझे क्या पता कि वे बड़े आदमी होते हैं ?
– हर चौक-चौराहे पर तो उनकी तस्वीरों के इश्तहार लगे रहते हैं, नीचे उनके नाम के साथ लिखा होता है- प्रमुख समाजसेवी।
- हरभगवान चावला,सिरसा,हरियाणा
संकलन व संपादक -निर्मल कुमार शर्मा, गाजियाबाद



