अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

सामाजिक अंकेक्षण ग्रामीणों के सशक्तिकरण का मनरेगा में सबसे मजबूत प्रावधान था

Share

अरुंधती धुरू व संदीप पाण्डेय

इधर जबसे केन्द्र सरकार महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम की जगह  विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका मिशन की गारंटी-ग्रामीण अधिनियम लेकर आई है दोनों कानूनों के कई पहलुओं पर बातचीत हो चुकी है। यहां पर हम मनरेगा के एक प्रावधान ’समाजिक अंकेक्षण’ या सरल भाषा में ’जनता जांच’ को रेखांकित करेंगे जिसपर जितनी चर्चा होनी चाहिए थी वह नहीं हुई है। राजस्थान में मजदूर किसान शक्ति संगठन ने इस प्रावधान का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया था। पूरे पूरे जिलों में ग्रामीणों व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने गांव-गांव जाकर मनरेगा के तहत कराए गए कामों का भौतिक सत्यापन किया था।

मजदूर किसान शक्ति संगठन से प्रेरित होकर 2006 से 2010 के बीच उत्तर प्रदेश के पांच विकास खण्डों, हरदोई जिले के भरावन, सण्डीला, बेहेंदर व उन्नाव जिले के मियागंज व फतेहपुर चैरासी, जो सभी लखनऊ से 100 किलोमीटर के अंदर हैं सामाजिक अंकेक्षण हेतु चुने गए। हरेक विकास खण्ड में करीब 50-60 ग्राम सभाएं हैं। करीब एक सौ कार्यकर्ता जिन्हें दस-दस सदस्यों के दस समूहों में बांटा गया था विकास खण्ड की सभी ग्राम सभाओं में हफ्ते भर में पहुंचे। हरेक समूह प्रत्येक ग्राम सभा में एक दिन रहा। उन्नाव की सिर्फ एक ग्राम सभा माखी में ग्राम प्रधान के विरोध के कारण सामाजिक अंकेक्षण सम्भव नहीं हो पाया जिसमें कुलदीप सिंह सेंगर का गांव भी पड़ता है। यहां अधिकारी भी लाचार थे।

हरेक विकास खण्ड के सामाजिक अंकेक्षण के बाद विकास खण्ड मुख्यालय पर एक जन सुनवाई आयोजित की जाती थी जिसमें ग्रामीण, जन प्रतिनिधि व अधिकारी शामिल होते थे। सामाजिक अंकेक्षण की आख्या पढ़ी जाती थी, जो कई बार तीखी होती थी, और अंत में अधिकारी अपना स्पष्टीकरण देते थे और अपना पक्ष रखते थे।

मनरेगा के क्रियान्वयन के दस्तावेज सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त किए जाते थे, हलांकि इन्हें मनरेगा के तहत भी प्राप्त किया जा सकता था। मियागंज, उन्नाव के खण्ड विकास अधिकारी ने ये दस्तावेज उपलब्ध कराने में आना-कानी की। मामला लखनऊ में राज्य सूचना आयोग पहुंचा। सूचना आयुक्त आवेदक के पक्ष में दस्तावेजों के अवलोकन का आदेश पारित करने को तैयार हुए। उन्हें जब बताया गया कि सामाजिक अंकेक्षण की प्रक्रिया के तहत इन दस्तावेजों को गांव-गांव ले जाना है ताकि ग्रामीण मनरेगा के क्रियान्यवन की सच्चाई जान सकें तब आयुक्त महोदय ने डेढ़ वर्ष बाद दस्तावेज मुफ्त में उपलब्ध कराने का आदेश दिया क्योंकि जन सूचना अधिकारी ने एक माह की नियत अवधि में दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए थे। 

हरदोई के सण्डीला विकास खण्ड की मण्डोली ग्राम पंचायत में जब सामाजिक अंकेक्षण हेतु समूह पहुंचा तो पाया गया कि ग्राम प्रधान पिछड़े वर्ग की महिला रामरती के पास सिवाय रबर की मोहर के ग्राम पंचायत के कोई दस्तावेज नहीं थे। ग्राम पंचायत का काम अभी भी पूर्व प्रधान अशोक सिंह चला रहे थे। वही ग्राम पंचायत भवन की चाभी भी रखते थे और ग्राम पंचायत के सारे दस्तावेज भी। जब जरूरत पड़ती थी तब आकर रामरती से अंगूठा व रबर की मोहर लगवा लेते थे जो रामरती सामंती प्रथा के तहत करने को मजबूर थी। दूरदर्शन इस सामाजिक अंकेक्षण का समाचार बनाने आया था। जब उसे मण्डोली की स्थिति के बारे में पता चला तो उसने मण्डोली में जाकर समाचार बनाया। जैसे ही यह खबर दूरदर्शन पर चली अशोक सिंह के फोन की घंटी बजने लगी। लज्जित अशोक सिंह ने ग्राम पंचायत के सारे दस्तावेज रामरती को सौंप दिए।

मियागंज विकास खण्ड के ग्राम प्रधान सामाजिक अंकेक्षण के विरोध में एकजुट हो गए। सामाजिक अंकेक्षण करने वाले दल को धमकियां मिलनी शुरू हो गईं। कहा गया कि यदि सामाजिक अंकेक्षण हुआ तो बंदूकें निकलेंगी। सामाजिक अंकेक्षण करने वालों ने भी कमर कस ली। खण्ड विकास अधिकारी से आग्रह करने पर अनिच्छा पूर्वक उन्होंने ग्राम प्रधानों के साथ एक बैठक रखवाई। बैठक में ग्राम प्रधानों को समझाया गया कि यह प्रक्रिया व्यक्तिगत रूप से उनके खिलाफ नहीं है। वे आज ग्राम प्रधान हैं, कल शायद नहीं रहेंगे। सामाजिक अ्रंकेक्षण का उद्देश्य मनरेगा के कार्यों का सही ढंग से गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन व मजदूरों को समय से पूरी मजदूरी का भुगतान था। जब ग्राम प्रधानों को सामाजिक अंकेक्षण का उद्देश्य समझ में आया तो वे अपनी दिक्कतों के बारे में बताने लगे। उन्होंने पूछा कि जब उन्हें अभियंता को कार्य पूरा होने पर 15 प्रतिशत कमीशन व खण्ड विकास अधिकारी को पैसे के भुगतान हेतु 15 प्रतिशत कमीशन देना पड़ता है तो वे गुणवत्तापूर्ण काम कैसे करेंगे? उन्हें बताया गया कि सामाजिक अंकेक्षण के बाद होने वाली जन सुनवाई में वे भी बड़े अधिकारियों के सामने अपनी बात रख सकते हैं। सामाजिक अंकेक्षण के उद्देश्य के प्रति निश्चिंत हो जाने पर उन्होंने अपना विरोध वापस ले लिया। फिर भी कुलदीप सिंह सेंगर की ग्राम सभा में सामाजिक अंकेक्षण नहीं हो पाया।

जब उपरोक्त सामाजिक अंकेक्षण की विकास खण्ड मुख्यालय पर जन सुनवाई हुई, जिसमें जिलाधिकारी एवं अपर आयुक्त, ग्रामीण विकास मौजूद थे, एक सामाजिक अंकेक्षण दल के मुखिया, दलित कार्यकर्ता राम सागर वर्मा ने अपने प्रस्तुतीकरण में साफ कह दिया कि इस विकास खण्ड कार्यालय में एक गैंग जनता के संसाधनों को लूट रहा है और उस गैंग के मुखिया खण्ड विकास अधिकारी महोदय हैं। वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में खण्ड विकास अधिकारी की बोलती बंद हो गई और वे अपने बचाव में कुछ कह पाने में भी असमर्थ रहे। एक सेवा निवृत सैनिक ने कहा कि वह जिंदगी भर सेना की नौकरी कर गांव लौटा है लेकिन उसकी हैसियत नहीं कि वह एक नई मोटरसाइकिल भी ले ले और इस विकास खण्ड के कई ग्राम पंचायत अधिकारी जो सरकारी वरियता क्रम में सबसे निचले स्तर के अधिकारी हैं लखनऊ से रोजाना चार पहिए वाहन से आते हैं। वह उत्सुक था कि यह कैसे सम्भव है? इसमें कोई दो राय नहीं रह गई थी कि विकास खण्ड में भ्रष्टाचार की कोई सीमा नहीं रह गई थी। इस विकास खण्ड के प्रत्येक ग्राम प्रधान ने लखनऊ की एक ही नर्सरी से एक ही कीमत पर एक ही संख्या में पौधे खरीदे थे। एक ऐसी योजना में जिसमें काम ग्राम सभा के स्तर पर तय होने थे, केन्द्रीकृत क्रय किया गया था। स्पष्ट था कि ऊपर के अधिकारी ग्राम प्रधान की जगह निर्णय ले रहे थे।

अपने लोकतंत्र में लोगों द्वारा सामाजिक अंकेक्षण के माध्यम से सशक्तिकरण के अनुभव का यह अभूतपूर्व उदाहरण था। उन्होंने सिर्फ सुना था कि लोकतंत्र लोगों के लिए, लोगों के द्वारा व लोगों का होता है। किंतु यह जमीनी हकीकत भी हो सकता है इसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी। 

यह बात अलग है कि इन सामाजिक अंकेक्षण के बाद सरकार ने पूरी प्रक्रिया का संस्थानीकरण कर लिया जिससे सामाजिक अंकेक्षण की भावना ही मर गई।

लेखिका एवं लेखकः अरुंधती धुरू व संदीप पाण्डेय

ए-893, इंदिरा नगर, लखनऊ-226016

फोनः 9415022772, 9919664444, 0522 2355978, 3564437

e-mail: arundhatidhuru@gmail.comashaashram@yahoo.com

अरुंधती धुरू जन आंदोलनों के राष्ट्रीय समन्वय से जुड़ी हुई हैं व संदीप पाण्डेय सोशलिस्ट पार्टी (इण्डिया) से।

Ramswaroop Mantri

Add comment

Recent posts

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें