कन्याकुमारी आज तमिलनाडु राज्य में एक जिला है, जिसका पुराना नाम केप कोमोरिन था. यह साल 1656 की बात है, डच ईस्ट इंडिया कंपनी ने यहां पुर्तगाली आधिपत्य स्थापित किया था और तब इस स्थान का नाम कोमोरिन पड़ गया. जानिए, फिर कैसे बदला इसका नाम.एक समय में उसका नाम कुछ और था. जी हां, किसी समय कन्याकुमारी का नाम केप कोमोरिन था. आइए जान लेते हैं इसके नाम की कहानी और इसमें बदलाव की वजह.
कन्याकुमारी आज तमिलनाडु राज्य में एक जिला है, जिसका पुराना नाम केप कोमोरिन था. यह भारतीय उपमहाद्वीप का सबसे दक्षिणी कोना है और यहां लैंड्स इंड यानी जमीन की समाप्ति माना जाता है. त्रिवेंद्रम शहर से इसकी दूरी करीब 90 किलोमीटर है. कन्याकुमारी का जिला मुख्यालय नागरकोल में है, जहां से इसकी दूरी करीब 20 किलोमीटर बताई जाती है.
स्थानीय लोगों के लिए मुश्किल था केप कोमोरिन नाम
यह साल 1656 की बात है, डच ईस्ट इंडिया कंपनी ने यहां पुर्तगाली आधिपत्य स्थापित किया था और तब इस स्थान का नाम कोमोरिन पड़ गया. अंग्रेजों के समय में इसे केप कोमोरिन कहा जाता था. हालांकि, केप कोमोरिन नाम का उच्चारण वहां के स्थानीय लोगों के लिए मुश्किल था. इसलिए धीरे-धीरे यहां मां पार्वती का रूप कही जाने वाली देवी कन्याकुमारी अम्मन के नाम पर इसे कन्याकुमारी बुलाया जाने लगा. साल 2016 में भारत सरकार और मद्रास सरकार ने पूरे जिले का नाम ही बदलकर कन्याकुमारी रख दिया था.

कन्याकुमारी अम्मन मंदिर
इसलिए देवी कन्या के नाम पर प्रचलित हुआ
हिन्दू मान्यताओं के अनुसार देवी पार्वती की अवतार देवी कन्या का शिव से विवाह होने वाला था, लेकिन तय समय पर ऐसा नहीं हो पाया. इस विवाह के लिए तैयार किया गया चावल और दूसरे अनाज बिना पके ही रखे रह गए. मान्यता है कि समय के साथ यही अनाज पत्थरों में बदल गए. कुछ लोग तो आज भी मानते हैं कि कन्याकुमारी में समुद्र किनारे मिलने वाले पत्थर आज भी चावल की तरह दिखते हैं, जिसका इस्तेमाल शिव-पार्वती का विवाह टूटने के कारण नहीं हो पाया था.
कन्याकुमारी शहर के किनारे देवी कन्या का प्राचीन मंदिर स्थापित है, जिसे शक्तिपीठ माना जाता है. देवी की यहां बड़ी मान्यता है और जिस भी लड़की की शादी में दिक्कत आती है, वह उनकी पूजा करती है. बड़ी संख्या में भक्त और पर्यटक कन्या देवी के दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं.
संगम काल से ही है कन्याकुमारी कस्बे का अस्तित्व
संगम काल से ही कन्याकुमारी कस्बे का अस्तित्व माना जाता है और पुराने मलयालम साहित्य और पोल्मी व मार्को पोलो ने भी इसका जिक्र किया था. आज कन्याकुमारी भारत का एक मशहूर पर्यटक स्थल होने के साथ ही साथ तीर्थक्षेत्र भी है. इसके अनोखे पर्यटक स्थलों में सूर्योदय और सूर्यास्त का स्थल खास है. इसके अलावा यहां 41 मीटर ऊंचा तिरिवल्लुवर का स्टेच्यू और विवेकानंद रॉक मेमोरियल लोगों के आकर्षण का केंद्र है. कन्याकुमारी शहर पश्चिम, दक्षिण और पूर्व तीन ओर से समुद्र से घिरा हुआ है. इन तीनों दिशाओं में इस शहर की समुद्री सीमा 71.5 किलोमीटर तक फैली हुई है.





