अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

एसआर मोहंती की नहीं होगी डिपार्टमेंटल इंक्वायरी

Share

भोपाल। भाजपा सरकार अपने पूर्व कार्यकाल में भले ही आईएएस अफसर एसआर मोहंती पर पूरी तरह से मेहरबान रही है, लेकिन अब उनके खिलाफ कार्रवाई करने का मन बना चुकी है। यही वजह है कि कांग्रेस की कमलनाथ सरकार में मुख्य सचिव रहे मोहंती की बंद की जा चुकी विभागीय जांच (डीई) को एक बार फिर खोल दिया गया है। उनकी इस जांच को नाथ सरकार के समय बंद कर दिया गया था।
यह बात अलग है कि सरकार के चाहने के बाद भी फिर से जांच शुरू नहीं हो सकती है। इसकी वजह है ऑल इंडिया सर्विस रूल और पेंशन नियमों के प्रावधान। हालांकि फिर से जांच खोलने के लिए सरकार ने तर्क दिया है कि तत्कालीन एडवोकेट जनरल राजेंद्र तिवारी पूर्व में उनके वकील रह चुके हैं, इसलिए उनका अभिमत सही नहीं माना जा सकता है। दरअसल यह जांच उनके खिलाफ एमपीएसआईडीसी में पदस्थ रहने के समय बिना गारंटी बांटे गए करोड़ों के कर्ज से संबंधित है।नाथ सरकार के बेहद करीबी होने की वजह से ही उन्हें मुख्य सचिव बनाया गया था। यही वजह है कि नाथ सरकार ने उनको लेकर चल रही जांच वापस लेने के लिए सुप्रीम कोर्ट को लिखकर दे दिया था। इसके लिए उस समय ईओडब्ल्यू ने भी सहमति दे दी थी। अब प्रदेश में सत्ता बदल चुकी है , लिहाजा सरकार ने अब इस मामलें में सुप्रीम कोर्ट से दोबारा कहा है कि चूंकि अभिमत देने वाले एडवोकेट जनरल उनके वकील रह चुके, इसलिए नए सिरे से एडवोकेट जनरल से अभिमत लिया जाना है। खास बात यह है कि यह मामला करीब डेढ़ दशक पुराना है। इस मामले में जांच ऐजेंसी से लेकर सरकार पूरी तरह से उदासीन रहकर मेहरबान रही, जिसकी वजह से इस तरह की स्थिति बनी है। अब कहा तो यह जा रहा है कि सरकार की स्थिति उस किसान की तरह हो गई है, जो खेत चुगने के बाद चिड़ियाओं को उड़ाता है।
उल्लेखनीय है कि एसआर मोहंती ने एमपीएसआईडीसी के चेयरमैन पद पर रहते हुए बिना गारंटी के सरकारी खजाने से करोड़ों रुपए का कर्ज बांट दिया था।
गौरतलब है कि कर्ज देने के नियमों को पूरी तरह से ताक पर रखकर एक शराब निर्माता कंपनी को किस्तों की जगह एक साथ सात सौ करोड़ रुपए के कर्ज का भी भुगतान कर दिया गया था।
असमंजस की स्थिति
इस मामले में ऑल इंडिया सर्विस रूल और पेंशन नियमों में स्पष्ट कहा गया है कि एक बार जो विभागीय जांच बंद कर दी जाती है, उसे दोबारा नहीं खोला जा सकता है। यही नहीं इस मामले में मोहंती सुप्रीम कोर्ट में कह चुके हैं कि राजेंद्र तिवारी इस मामले में कभी उनके साथ नहीं रहे हैं। माना जा रहा है कि वे इस मामले में हलफनामा भी दे सकते हैं।
यह हैं नियम
< ऑल इंडिया सर्विस रूल के तहत मुख्यमंत्री स्तर से बंद की गई जांच को राष्ट्रपति ही खोल सकते हैं।
< दोबारा से जांच खोलने के लिए छह माह का समय तय है।
< सरकार चाहे तो नए मामले में जांच करा सकती है, पर बंद हो चुके मामले में नहीं।
< रिटायरमेंट के बाद जांच सिर्फ अंतिम चार साल के कामकाज पर ही की जा सकती है।

Ramswaroop Mantri

Recent posts

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें