शशिकांत गुप्ते
सामान्य ज्ञान Common sense इसे व्यवहारिक बुद्धि, अनुभवजनित बुद्धि और सामान्य बुद्धि भी कहतें हैं।
मानस विज्ञान के अनुसार मानव, सामान्य बुद्धि का व्यवहारिक उपयोग करने लग जाए तो अधिकांश मानसिक त्रुटियां और दकियानुसी सोच दूर हो सकता है?
सामान्य ज्ञान को अनुभवजनित बुद्धि कहते हैं।
व्यवहारिक जिंदगी में हम सामन्य ज्ञान का उपयोग नहीं करते हैं।
इसीलिए हम विज्ञापनों में दर्शाई लुभावनी उपलब्धियों पर विश्वास कर लेते हैं और ठगे जाते हैं।
सामन्य ज्ञान को मानस में जागृत न करने के कारण ही हम व्यक्ति पूजक बन जाते हैं। व्यक्ति पूजा में लीन होने से हम अपने अप्रत्यक्ष मानसिक,और आर्थिक शोषण के शिकार हो जाते हैं।
सामन्य ज्ञान से हम अनभिज्ञ होने से हम पौराणिक कथा वाचकों को अति महंगा मानधन देने में भी संकोच नहीं करते हैं।
इसीलिए हम कथा वाचकों की गिनती को देश के पूंजीपतियों में शुमार करने में गर्व का अनुभव करते हैं।
सामन्य ज्ञान का व्यवहारिक उपयोग नहीं कर पाने से हम साहित्य समाज का दर्पण है। इस सूक्ति के विपरित आचरण करने वाले साहित्य के नाम पर समाज में फूहड़ता प्रस्तुत करने वालों को प्रोत्साहित करने में हम जरा भी संकोच नहीं होता है। इसी तरह के कुछ कथित साहित्यकार राजनीति को कोसते हुए उसे दो कोड़ी का बताते हैं। इनका यह संबोधन राजनीति में निर्लोभ,निष्पक्ष ऐसे स्वच्छ छबि वाले, लोगों को राजनीति में आने से अप्रत्यक्ष रोकने की साजिश ही तो है।
अंग्रेजी की एक उक्ति है।
common sense is very uncommon.
इस उक्ति का मतलब है,सामान्य ज्ञान बहुत ही असामान्य है।
इसीलिए समाज में कुछ अति असामान्य साहित्यकार पूंजीवाद को बढ़ावा देते हुए बड़े शान से कहते हैं, मैं कविता प्रस्तुत करने का मानधन लाखों रुपयों में लेता हूं।
हमारी उदासीनता का कारण ही हमारे द्वारा सामन्य ज्ञान का उपयोग न करना है।
जन सामान्य को यह याद रखना चाहिए जो संदेश इस शेर में कहा गया है।
शायर गालिब फरमाते हैं।
मुझे गिरते हुए पत्तों ने ये समझाया है
बोझ बन जाओगे तो अपने भी गिरा देते हैं
शशिकांत गुप्ते इंदौर





